{"_id":"68cdb8aeb74677d48e02ee8c","slug":"seats-are-not-being-filled-in-sewing-computer-and-beauty-related-trades-aligarh-news-c-56-1-hts1003-137696-2025-09-20","type":"story","status":"publish","title_hn":"Aligarh News: सिलाई, कंप्यूटर व सौंदर्य संबंधी ट्रेडों में नहीं भर रहीं सीटें","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
Aligarh News: सिलाई, कंप्यूटर व सौंदर्य संबंधी ट्रेडों में नहीं भर रहीं सीटें
Sat, 20 Sep 2025 01:40 AM IST
अलीगढ़ ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, अलीगढ़
संवाद न्यूज एजेंसी, अलीगढ़
Updated Sat, 20 Sep 2025 01:40 AM IST
विज्ञापन
औद्योगिक प्रशिक्षण संस्थान (आईटीआई) सिकंदराराऊ में इस बार भी सिलाई, कंप्यूटर और सौंदर्य संबंधी ट्रेडों की सीटें भरना मुश्किल हो रहा है। स्थिति यह है कि छह बार काउंसिलिंग होने के बाद भी इन तीनों ट्रेडों में आधे से अधिक सीटें खाली हैं।
आईटीआई के शिक्षकों का कहना है कि युवाओं में अब पारंपरिक और कम आय वाले ट्रेडों के बजाय तकनीकी और रोजगारपरक ट्रेडों की ओर अधिक रुझान बढ़ा है। इलेक्ट्रिकल, फिटर, मैकेनिकल, इलेक्ट्रॉनिक्स, वेल्डिंग जैसे ट्रेडों में सीटें लगभग पूरी भर जाती हैं, जबकि कंप्यूटर एडेड एंब्राइडरी, स्विंग (सिलाई) और सौंदर्य जैसे कोर्स युवाओं को आकर्षित नहीं कर पा रहे हैं।
विशेषज्ञों का मानना है कि इसके पीछे कई कारण हैं। पहला इन ट्रेडों से रोजगार की संभावनाएं सीमित हैं और निजी क्षेत्र में भी प्रतिस्पर्धा अधिक है। दूसरा युवाओं की सोच अब आईटीआई से सीधे नौकरी पाने पर केंद्रित हो गई है, जबकि इन ट्रेडों से स्वरोजगार की संभावनाएं तो हैं, लेकिन पर्याप्त जागरूकता और प्रोत्साहन की कमी से विद्यार्थी इनकी ओर कदम बढ़ाने से बचते हैं। आईटीआई के प्रधानाचार्य रोहिताश ने बताया कि पिछले कई सालों से इन तीनों ट्रेडों में प्रवेश की स्थिति कमजोर बनी हुई है। अब 30 सितंबर तक सीटें भरने की अंतिम तिथि दी गई है। कमजोर ट्रेड को हटाए जाने के लिए जरूरी है कि तीन साल तक उस ट्रेड में 50 फीसदी से कम प्रवेश हों, लेकिन अभी तक इनमें प्रवेश का अनुपात 50 फीसदी से ऊपर ही है।
विज्ञापन
विज्ञापन
आईटीआई के शिक्षकों का कहना है कि युवाओं में अब पारंपरिक और कम आय वाले ट्रेडों के बजाय तकनीकी और रोजगारपरक ट्रेडों की ओर अधिक रुझान बढ़ा है। इलेक्ट्रिकल, फिटर, मैकेनिकल, इलेक्ट्रॉनिक्स, वेल्डिंग जैसे ट्रेडों में सीटें लगभग पूरी भर जाती हैं, जबकि कंप्यूटर एडेड एंब्राइडरी, स्विंग (सिलाई) और सौंदर्य जैसे कोर्स युवाओं को आकर्षित नहीं कर पा रहे हैं।
विज्ञापन
विशेषज्ञों का मानना है कि इसके पीछे कई कारण हैं। पहला इन ट्रेडों से रोजगार की संभावनाएं सीमित हैं और निजी क्षेत्र में भी प्रतिस्पर्धा अधिक है। दूसरा युवाओं की सोच अब आईटीआई से सीधे नौकरी पाने पर केंद्रित हो गई है, जबकि इन ट्रेडों से स्वरोजगार की संभावनाएं तो हैं, लेकिन पर्याप्त जागरूकता और प्रोत्साहन की कमी से विद्यार्थी इनकी ओर कदम बढ़ाने से बचते हैं। आईटीआई के प्रधानाचार्य रोहिताश ने बताया कि पिछले कई सालों से इन तीनों ट्रेडों में प्रवेश की स्थिति कमजोर बनी हुई है। अब 30 सितंबर तक सीटें भरने की अंतिम तिथि दी गई है। कमजोर ट्रेड को हटाए जाने के लिए जरूरी है कि तीन साल तक उस ट्रेड में 50 फीसदी से कम प्रवेश हों, लेकिन अभी तक इनमें प्रवेश का अनुपात 50 फीसदी से ऊपर ही है।
विज्ञापन