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मथुरा में 23 करोड़ के छात्रवृत्ति घोटाले के बाद अलीगढ़ में भी जांच के आदेश
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मथुरा में 23 करोड़ रुपये का छात्रवृत्ति एवं शुल्क प्रतिपूर्ति घोटाला सामने आने के बाद अलीगढ़ में भी जांच के आदेश हो गए हैं। वर्ष 2010-2011से 2014-2015 के बीच जिले में वितरित हुई छात्रवृत्ति-शुल्क प्रतिपूर्ति की यह जांच होगी। शासन की ओर से समाज कल्याण विभाग के निदेशक बाल कृष्ण त्रिपाठी की ओर से यह आदेश दिए गए हैं। आदेश के तहत 4 सदस्य कमेटी बनेगी, जिसमें ऐसा कोई भी सदस्य नहीं रखा जाएगा, जो 2010 से 2015 के बीच में जिले में तैनात रहा हो। कमेटी में जिला समाज कल्याण अधिकारी, जिला पिछड़ा वर्ग कल्याण अधिकारी, जिला अल्पसंख्यक कल्याण अधिकारी और जिला परीक्षा लेखा विभाग की ओर से नामित एक सदस्य को रखा जाएगा। डीएम ने शासन के पत्र को सीडीओ को भेज जांच कराने के आदेश दिए हैं।
आदेश के अनुसार जांच के दौरान आवेदन पत्रों की जांच जिसमें देखा जाएगा कि किसी फर्जी प्रमाणपत्र का प्रयोग कर शुल्क प्रतिपूर्ति तो नहीं ली गई या अपात्र छात्रों को भी शुल्क प्रतिपूर्ति तो नहीं कर दी गई। इसके साथ ही यह भी देखा जाएगा कि किन्हीं पात्र छात्रों को तो छात्रवृत्ति से वंचित नहीं किया गया। बिना आवेदन/दावों के तो शुल्क प्रतिपूर्ति नहीं की गई। डाटा विश्लेषण के संबंध में आपत्तियां, सक्षम डाटाबेस में अशुद्धता के साथ ही यह भी देखा जाएगा कि किसी मिथ्या घोषणा के आधार पर शुल्क प्रतिपूर्ति तो नहीं की गई, शुल्क की अनियमित प्रतिपूर्ति तो नहीं हुई, अधिक दरों पर शुल्क प्रतिपूर्ति स्वीकार तो नहीं की गई, एक ही छात्र को अलग-अलग श्रेणियों मेें तो शुल्क प्रतिपूर्ति नहीं की गई या फिर एक ही पाठ्यक्रम के लिए अलग-अलग शुल्क प्रतिपूर्ति तो नहीं की गई।
बता दें कि मथुरा जिले के निजी आईटीआई संस्थानों में छात्रवृत्ति और शुल्क प्रतिपूर्ति में 23 करोड़ के गबन के मामले में वहां के जिला समाज कल्याण अधिकारी करुणेश त्रिपाठी को निलंबित करने के साथ ही दोषी अधिकारी-कर्मचारियों पर मुकदमा दर्ज कराया गया है। डीएम चंद्रभूषण सिंह के मुुताबिक शासन के पत्र को सीडीओ को भेज दिया है। जांच कराकर शासन को रिपोर्ट भेजी जाएगी। अगर, किसी भी प्रकार की अनियमितता पाई जाती है तो दोषी के खिलाफ कठोर कार्रवाई की जाएगी। शासन ने 15 दिन में जांच आख्या मांगी है।
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आदेश के अनुसार जांच के दौरान आवेदन पत्रों की जांच जिसमें देखा जाएगा कि किसी फर्जी प्रमाणपत्र का प्रयोग कर शुल्क प्रतिपूर्ति तो नहीं ली गई या अपात्र छात्रों को भी शुल्क प्रतिपूर्ति तो नहीं कर दी गई। इसके साथ ही यह भी देखा जाएगा कि किन्हीं पात्र छात्रों को तो छात्रवृत्ति से वंचित नहीं किया गया। बिना आवेदन/दावों के तो शुल्क प्रतिपूर्ति नहीं की गई। डाटा विश्लेषण के संबंध में आपत्तियां, सक्षम डाटाबेस में अशुद्धता के साथ ही यह भी देखा जाएगा कि किसी मिथ्या घोषणा के आधार पर शुल्क प्रतिपूर्ति तो नहीं की गई, शुल्क की अनियमित प्रतिपूर्ति तो नहीं हुई, अधिक दरों पर शुल्क प्रतिपूर्ति स्वीकार तो नहीं की गई, एक ही छात्र को अलग-अलग श्रेणियों मेें तो शुल्क प्रतिपूर्ति नहीं की गई या फिर एक ही पाठ्यक्रम के लिए अलग-अलग शुल्क प्रतिपूर्ति तो नहीं की गई।
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बता दें कि मथुरा जिले के निजी आईटीआई संस्थानों में छात्रवृत्ति और शुल्क प्रतिपूर्ति में 23 करोड़ के गबन के मामले में वहां के जिला समाज कल्याण अधिकारी करुणेश त्रिपाठी को निलंबित करने के साथ ही दोषी अधिकारी-कर्मचारियों पर मुकदमा दर्ज कराया गया है। डीएम चंद्रभूषण सिंह के मुुताबिक शासन के पत्र को सीडीओ को भेज दिया है। जांच कराकर शासन को रिपोर्ट भेजी जाएगी। अगर, किसी भी प्रकार की अनियमितता पाई जाती है तो दोषी के खिलाफ कठोर कार्रवाई की जाएगी। शासन ने 15 दिन में जांच आख्या मांगी है।
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