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Aligarh: मदरसों की नियुक्तियों में हुई भारी धांधली, कइयों ने लगाए फर्जी दस्तावेज, दोबार फिर शुरू हुई जांच

Wed, 09 Apr 2025 05:24 PM IST
चमन शर्मा अमर उजाला नेटवर्क, अलीगढ़
अमर उजाला नेटवर्क, अलीगढ़ Published by: चमन शर्मा Updated Wed, 09 Apr 2025 05:24 PM IST
सार

सन 2020 में कोरोना के दौरान हुए लॉक डाउन में प्रदेश के मदरसों के साथ ही अलीगढ़ जिले के चार मदरसों में 13 लोगों के स्टाफ की भर्ती की गई। इन नियुक्तियों में गड़बड़ी के आरोप लगे और शिकायत शासन को हुई। शासन स्तर से अल्पसंख्यक कल्याण एवं वक्फ विभाग के विशेष सचिव को मामले की जांच सौंपी गई। 

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scam in madrassas
मदरसा - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

अलीगढ़ जिले के शासकीय सहायता प्राप्त मदरसों में नियुक्तियों में भारी धांधली हुई है। फर्जी दस्तावेज लगाकर नौकरी हासिल कर ली गई। इतना ही नहीं नियुक्ति प्रक्रिया भी सवालों के घेरे में है। जब शिकायतें शासन तक पहुंचीं तो जांच बैठा दी गई। हालांकि पहले भी दो दफा जांच हो चुकी है और अनियमितता सामने आ चुकी थी लेकिन एक बार फिर जांच शुरू हो गई है। अब एसडीएम इगलास और जिला सूचना अधिकारी को जांच अधिकारी बनाया गया है।

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अलीगढ़ में शासन से सहायता हासिल करने वाले चार मदरसे हैं। यह सभी 70 वर्ष से अधिक पुराने हैं। सन 2020 में कोरोना के दौरान हुए लॉक डाउन में प्रदेश के मदरसों के साथ ही जिले के इन मदरसों में 13 लोगों के स्टाफ की भर्ती की गई। इन नियुक्तियों में गड़बड़ी के आरोप लगे और शिकायत शासन को हुई। शासन स्तर से अल्पसंख्यक कल्याण एवं वक्फ विभाग के विशेष सचिव को मामले की जांच सौंपी गई। 
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इस जांच में खुलासा हुआ कि अलीगढ़ समेत प्रदेश के कुल 33 जिलों में 308 मदरसों में लॉक डाउन के दौरान नियुक्तियां की गई थीं। इसके बाद निदेशालय स्तर पर निदेशक अंकित कुमार अग्रवाल की अध्यक्षता में जांच के लिए तीन सदस्यीय समिति बनी। निदेशक स्तर से स्थानीय प्रशासन पर पत्र आया कि जिसमें जिला अल्पसंख्यक कल्याण अधिकारी को जांच के लिए समिति बनाने को कहा है। यह समिति नियुक्ति संबंधी पत्रावली और दस्तावेज की जांच करेगी।

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लॉक डाउन के दौरान हुई मदरसों में नियुक्ति के संबंध में जांच के निर्देश मिले हैं। जांच समिति गठित कर दी है। यह एक महीने में रिपोर्ट देगी। जिसे शासन को भेज दिया जाएगा। - निधि गोस्वामी, जिला अल्पसंख्यक कल्याण अधिकारी

अलीगढ़ में इन मदरसों में हुईं थी नियुक्तिां

-मदरसा लुत्फिया अरबिया तुर्कमान गेट- 1948 में बना है। इसमें 375 विद्यार्थी हैं। 15 लोगों का स्टाफ है
- मदरसा सिराजुल उलूम निस्वां कालेज ऊपरकोट- 1950 में बना है। 275 विद्यार्थी हैं। 17 लोगों का स्टाफ है
-मदरसा अरेबिया बालाये किला सराय रहमान- 1950 में बना है। 350 विद्यार्थी हैं। 14 लोगों का स्टाफ है
-मदरसा इस्लमियां अरबिया जामा मस्जिद- 1949 में बना है। यहां 712 विद्यार्थी हैं और 15 लोगों का स्टाफ है।

जांच के बाद रिकवरी और भुगतान रोकने की सिफारिश की गई थी
शासन की जांच में आशंका जताई गई थी कि चतुर्थ श्रेणी के कर्मचारियों की भी बड़ी संख्या में नियुक्तियां की गईं हैं। इन नियुक्तियों के लिए दी गई वेतन राशि बहुत अधिक है। इसलिए इन नियुक्तियों में शामिल मदरसा प्रबंधकों, जिला अल्पसंख्यक कल्याण अधिकारियों और रजिस्ट्रार मदरसा शिक्षा बोर्ड उत्तर प्रदेश से रिकवरी की जाए और वेतन की भुगतान को रोका जाए।

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