{"_id":"0b1b8155a28047996d4686d52044ab1f","slug":"save-son-into-battle-to-save-bitia-hindi-news","type":"story","status":"publish","title_hn":"बिटिया बचाने की लड़ाई बेटे बचाने में तब्दील","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
बिटिया बचाने की लड़ाई बेटे बचाने में तब्दील
अमर उजाला ब्यूरो/अलीगढ़
Updated Thu, 31 Dec 2015 01:47 AM IST
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
बिटिया के न्याय के लिए शुरू हुआ गांव वालों का धरना अब ‘कथित निर्दोषों’ के मानवाधिकारों की लड़ाई में तब्दील हो गया है। पुलिस ने बिटिया से दरिंदगी के आरोपी चतरा और एक नाबालिग को जेल भेज दिया है।
वहीं फरार आरोपी की गिरफ्तारी में दबिश दे रही है। पुलिस का यह खुलासा गांव वालों के गले नहीं उतर रहा है। इसके विरोध में धरने पर बैठ गए हैं। इसमें आरोपियों के परिजन भी शामिल हैं।
बिटिया प्रकरण के खुलासे के बाद प्रशासन मानकर चल रहा था कि ग्रामीण धरने से उठ जाएंगे। बुधवार को धरना खत्म होने की चर्चा गांव में फैल भी गई, लेकिन घटनाक्रम एकदम बदला और दोपहर एक बजते-बजते धरना स्थल पंचायत घर पर लोगों का जमावड़ा हो गया।
विज्ञापन
ग्रामीणों का कहना था कि पुलिस की जांच निष्पक्ष नहीं है। सीबीआई से जांच कराई जाए। पुलिस का उत्पीड़न रोका जाए। ग्रामीण एक ही बात बार-बार कह रहे हैं कि पुलिस ने पिटाई के बल पर मामला कबूल करवाया है।
असली आरोपी अभी बचे हैं। डीएनए टेस्ट केवल एक दो का नहीं सभी आरोपियों का कराया जाए। 10- 15 दिन में उसकी रिपोर्ट मंगाई जाए। ओमपाल सिंह के नेतृत्व में यह धरना दिया जा रहा है।
इसमें मुख्य आरोपी चतरा के ताऊ के बेटे सतीश गौतम, नाबालिग आरोपी के परिजन के अलावा दिनेश सिंह, सुभाष चौहान, अनिल गहलोत, बीरेंद्र सिंह, शीलेंद्र राघव, विजय पाल, रंजीत सिंह, चंद्र पाल सिंह, गोपाल सिंह, राजवती हरी सिंह, हरपाल सिंह आदि इस धरने में शामिल हुए।
विज्ञापन
वहीं फरार आरोपी की गिरफ्तारी में दबिश दे रही है। पुलिस का यह खुलासा गांव वालों के गले नहीं उतर रहा है। इसके विरोध में धरने पर बैठ गए हैं। इसमें आरोपियों के परिजन भी शामिल हैं।
विज्ञापन
बिटिया प्रकरण के खुलासे के बाद प्रशासन मानकर चल रहा था कि ग्रामीण धरने से उठ जाएंगे। बुधवार को धरना खत्म होने की चर्चा गांव में फैल भी गई, लेकिन घटनाक्रम एकदम बदला और दोपहर एक बजते-बजते धरना स्थल पंचायत घर पर लोगों का जमावड़ा हो गया।
विज्ञापन
ग्रामीणों का कहना था कि पुलिस की जांच निष्पक्ष नहीं है। सीबीआई से जांच कराई जाए। पुलिस का उत्पीड़न रोका जाए। ग्रामीण एक ही बात बार-बार कह रहे हैं कि पुलिस ने पिटाई के बल पर मामला कबूल करवाया है।
असली आरोपी अभी बचे हैं। डीएनए टेस्ट केवल एक दो का नहीं सभी आरोपियों का कराया जाए। 10- 15 दिन में उसकी रिपोर्ट मंगाई जाए। ओमपाल सिंह के नेतृत्व में यह धरना दिया जा रहा है।
इसमें मुख्य आरोपी चतरा के ताऊ के बेटे सतीश गौतम, नाबालिग आरोपी के परिजन के अलावा दिनेश सिंह, सुभाष चौहान, अनिल गहलोत, बीरेंद्र सिंह, शीलेंद्र राघव, विजय पाल, रंजीत सिंह, चंद्र पाल सिंह, गोपाल सिंह, राजवती हरी सिंह, हरपाल सिंह आदि इस धरने में शामिल हुए।