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संजीव हत्या कांडः डीएस में वर्चस्व की जंग ने रखी थी इस दुश्मनी की नींव
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चौधरी बलवीर सिंह।
- फोटो : CITY OFFICE
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डीएस कॉलेज का दबंग छात्र संजीव चौधरी किसी पहचान का मोहताज नहीं था। टप्पल के गांव उसरह से आकर प्रेस कॉलोनी में बसे संजीव के डीएस कॉलेज के साथ-साथ रामघाट रोड पर बढ़ते रसूख ने इस दुश्मनी की नींव रखी। डीएस कॉलेज में ही दबंग छवि के हरदुआगंज के गांव कलाई के रॉबी-कालू की जोड़ी के रूप में मशहूर दबंग छात्र नेताओं ने इसे नागवार समझा। मन में बस यही बात आई कि कॉलेज से बाहर अब हमारे घर वाले रोड पर प्लाटिंग भी शुरू कर दी। इसी रसूख को कायम रखने को लेकर संजीव चौधरी की हत्या की गई। शुक्रवार को फैसला आने के बाद जब उस दौर के लोगों से बात की गई तो उस वारदात की याद ताजा कर वे चौंक गए और बोले कि क्या सजा हो गई।
रॉबी-योगेश की फरारी ने कराई निर्णय में देरी
इस घटना को लेकर संजीव चौधरी के अधिवक्ता पिता बलवीर सिंह बताते हैं कि 2002 में हुई हत्या आरोपियों को गिरफ्तार कर जेल भेजा गया। 2003 में मुकदमे का ट्रायल एडीजे न्यायालय में शुरू हो गया। इसी बीच जमानत पर बाहर आने के बाद अलग-अलग अपराधों में रॉबी व योगेश फरार होते चले गए। इसी बीच योगेश मेरठ के कविता चौधरी हत्याकांड में और रॉबी 2006 में पूर्व विधायक मलखान सिंह हत्याकांड में लंबे समय तक फरारी के बाद जेल गए। तब 2006 में हाईकोर्ट से उनके पक्ष में त्वरित गति से सुनवाई के आदेश आए। इसके बाद 2016 में हाईकोर्ट ने विशेष जज से जल्द सुनवाई के आदेश दिए। फिर 2018 में हर दिन सुनवाई के और 2019 में तीन माह में निस्तारण के निर्देश दिए। मगर, इस दौरान बचाव पक्ष की ओर से लगातार अपनी पैरोकारी के दम पर मुकदमे में देरी के प्रयास किए जाते रहे। एक मर्तबा रॉबी के अधिवक्ता ने यह कहते हुए हाईकोर्ट में यहां से ट्रांसफर अर्जी भी लगाई थी।
दस्तावेजों का गायब होना भी बना देरी का कारण
बलवीर सिंह एडवोकेट बताते हैं कि उनके बेटे की हत्या की पत्रावली से पांच अहम दस्तावेज अलग-अलग बार में गायब हुए। जिनमें चार्ज पत्र, चार्जशीट, तहरीरी रिपोर्ट, नकल चिक आदि शामिल रहे। इसे लेकर उन्होंने लिखित में शिकायत दी। बाद में तत्कालीन जिला जज के निर्देश पर इन दस्तावेजों की पुन: संरचना हुई और ट्रायल शुरू हो सका।
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- जिला जज बब्बू सारंग द्वारा मेरे बेटे के हत्याकांड में फैसला सुनाया गया जिसमें दोषी लोगों को सजा सुनाई गई। मैंने खुद अपने बेटे की हत्या के मुकदमे की पैरवी की है। मुझे न्यायपालिका पर भरोसा था। काफी मेहनत व इंतजार के बाद आज वो घड़ी आई है, जिसका मुझे इंतजार था। मैंने इस निर्णय को पाने में कितनी कठिनाइयां झेली हैं। मैं ही जानता हूं। मगर न्यायालय में देर है ,अंधेर नहीं, आज यह सच साबित हुआ है। इसके लिए बार एसोसिएशन व जिला जज का आभारी रहूंगा। - चौधरी बलवीर सिंह ,एडवोकेट/वादी
- जिले के बहुप्रतिक्षित मामले में आज न्यायालय ने तीनों आरोपियों को तलब कर दोषी करार देते हुए उम्रकैद की सजा से दंडित किया गया है। यह मामला काफी समय से लंबित था। कई अदालतों में इसकी सुनवाई हुई। इसके बाद जिला जज के न्यायालय में सुनवाई के बाद यह फैसला सुनाया गया है। -धीरेंद्र सिंह तोमर डीजीसी फौजदारी
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- हम पहले दिन से इस मामले में खुद को निर्दोष करार देते आए हैं। न्यायालय में हमने अपने साक्ष्य भी रखे हैं। इन्हीं साक्ष्यों की वजह से निर्णय लगातार टलता रहा। अब अदालत ने जो फैसला सुनाया है। उसके खिलाफ हम हाईकोर्ट में अपील दायर करेंगे। वहां अपने साक्ष्य रखे जाएंगे। - प्रताप सिंह राघव, एडवोकेट बचाव पक्ष
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रॉबी-योगेश की फरारी ने कराई निर्णय में देरी
इस घटना को लेकर संजीव चौधरी के अधिवक्ता पिता बलवीर सिंह बताते हैं कि 2002 में हुई हत्या आरोपियों को गिरफ्तार कर जेल भेजा गया। 2003 में मुकदमे का ट्रायल एडीजे न्यायालय में शुरू हो गया। इसी बीच जमानत पर बाहर आने के बाद अलग-अलग अपराधों में रॉबी व योगेश फरार होते चले गए। इसी बीच योगेश मेरठ के कविता चौधरी हत्याकांड में और रॉबी 2006 में पूर्व विधायक मलखान सिंह हत्याकांड में लंबे समय तक फरारी के बाद जेल गए। तब 2006 में हाईकोर्ट से उनके पक्ष में त्वरित गति से सुनवाई के आदेश आए। इसके बाद 2016 में हाईकोर्ट ने विशेष जज से जल्द सुनवाई के आदेश दिए। फिर 2018 में हर दिन सुनवाई के और 2019 में तीन माह में निस्तारण के निर्देश दिए। मगर, इस दौरान बचाव पक्ष की ओर से लगातार अपनी पैरोकारी के दम पर मुकदमे में देरी के प्रयास किए जाते रहे। एक मर्तबा रॉबी के अधिवक्ता ने यह कहते हुए हाईकोर्ट में यहां से ट्रांसफर अर्जी भी लगाई थी।
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दस्तावेजों का गायब होना भी बना देरी का कारण
बलवीर सिंह एडवोकेट बताते हैं कि उनके बेटे की हत्या की पत्रावली से पांच अहम दस्तावेज अलग-अलग बार में गायब हुए। जिनमें चार्ज पत्र, चार्जशीट, तहरीरी रिपोर्ट, नकल चिक आदि शामिल रहे। इसे लेकर उन्होंने लिखित में शिकायत दी। बाद में तत्कालीन जिला जज के निर्देश पर इन दस्तावेजों की पुन: संरचना हुई और ट्रायल शुरू हो सका।
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- जिला जज बब्बू सारंग द्वारा मेरे बेटे के हत्याकांड में फैसला सुनाया गया जिसमें दोषी लोगों को सजा सुनाई गई। मैंने खुद अपने बेटे की हत्या के मुकदमे की पैरवी की है। मुझे न्यायपालिका पर भरोसा था। काफी मेहनत व इंतजार के बाद आज वो घड़ी आई है, जिसका मुझे इंतजार था। मैंने इस निर्णय को पाने में कितनी कठिनाइयां झेली हैं। मैं ही जानता हूं। मगर न्यायालय में देर है ,अंधेर नहीं, आज यह सच साबित हुआ है। इसके लिए बार एसोसिएशन व जिला जज का आभारी रहूंगा। - चौधरी बलवीर सिंह ,एडवोकेट/वादी
- जिले के बहुप्रतिक्षित मामले में आज न्यायालय ने तीनों आरोपियों को तलब कर दोषी करार देते हुए उम्रकैद की सजा से दंडित किया गया है। यह मामला काफी समय से लंबित था। कई अदालतों में इसकी सुनवाई हुई। इसके बाद जिला जज के न्यायालय में सुनवाई के बाद यह फैसला सुनाया गया है। -धीरेंद्र सिंह तोमर डीजीसी फौजदारी
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- हम पहले दिन से इस मामले में खुद को निर्दोष करार देते आए हैं। न्यायालय में हमने अपने साक्ष्य भी रखे हैं। इन्हीं साक्ष्यों की वजह से निर्णय लगातार टलता रहा। अब अदालत ने जो फैसला सुनाया है। उसके खिलाफ हम हाईकोर्ट में अपील दायर करेंगे। वहां अपने साक्ष्य रखे जाएंगे। - प्रताप सिंह राघव, एडवोकेट बचाव पक्ष