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सपा की टिकट फीस 45 हजार
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बसपा के पदचिह्नों पर चलते हुए इस बार सपा ने भी लगभग सवा वर्ष पहले ही विधानसभा चुनाव के टिकट के दावेदारों से आवेदन लेना शुरू कर दिया है। आवेदन करने वालों को पार्टी फंड में 20 हजार रुपये जमा कराने होंगे। इसकी रसीद लगा कर किया गया आवेदन ही पार्टी के प्रदेश कार्यालय के माध्यम से राष्ट्रीय अध्यक्ष तक भेजा जाएगा।
इसके बाद आवेदक को 20 हजार का शुल्क देकर समाजवादी बुलेटिन का सदस्य बनना होगा, जो सपा की आधिकारिक मासिक पुस्तिका है। इसके साथ ही आवेदक को पांच सक्रिय सदस्य बनाने होंगे। जिसके लिए प्रति सदस्य एक हजार रुपये का शुल्क जमा कराना होगा। इस तरह से दावेदारी का खर्च लगभग 45 हजार रुपये तक आ रहा है।
आवेदन में अपना ब्योरा देने के साथ आवेदकों को आपराधिक मामलों की जानकारी देनी होगी। इसके साथ ही अगर पूर्व में कोई चुनाव लड़ा हो तो उसका विस्तृत परिणाम, पार्टी में पूर्व में पदाधिकारी रहने पर उसकी जानकारी भी देनी होगी। विधानसभा चुनाव वर्ष 2022 में भाजपा को कड़ी टक्कर देने के लिए पार्टी अभी से बेहतर उम्मीदवारों की तलाश में जुट गई है।
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आवेदन शुल्क भी इसकी एक कड़ी है, जिससे गंभीर आवेदक ही सामने आएं। बेवजह टिकट का आवेदन करने की परंपरा पर कुछ ब्रेक लग सके। जिलाध्यक्ष गिरीश यादव ने बताया कि आवेदन पूरा करने के बाद आवेदकों को सीधे प्रदेश कार्यालय में जमा कराना होगा। इसके बाद हाईकमान ही फैसला करेगा।
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इसके बाद आवेदक को 20 हजार का शुल्क देकर समाजवादी बुलेटिन का सदस्य बनना होगा, जो सपा की आधिकारिक मासिक पुस्तिका है। इसके साथ ही आवेदक को पांच सक्रिय सदस्य बनाने होंगे। जिसके लिए प्रति सदस्य एक हजार रुपये का शुल्क जमा कराना होगा। इस तरह से दावेदारी का खर्च लगभग 45 हजार रुपये तक आ रहा है।
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आवेदन में अपना ब्योरा देने के साथ आवेदकों को आपराधिक मामलों की जानकारी देनी होगी। इसके साथ ही अगर पूर्व में कोई चुनाव लड़ा हो तो उसका विस्तृत परिणाम, पार्टी में पूर्व में पदाधिकारी रहने पर उसकी जानकारी भी देनी होगी। विधानसभा चुनाव वर्ष 2022 में भाजपा को कड़ी टक्कर देने के लिए पार्टी अभी से बेहतर उम्मीदवारों की तलाश में जुट गई है।
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आवेदन शुल्क भी इसकी एक कड़ी है, जिससे गंभीर आवेदक ही सामने आएं। बेवजह टिकट का आवेदन करने की परंपरा पर कुछ ब्रेक लग सके। जिलाध्यक्ष गिरीश यादव ने बताया कि आवेदन पूरा करने के बाद आवेदकों को सीधे प्रदेश कार्यालय में जमा कराना होगा। इसके बाद हाईकमान ही फैसला करेगा।