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सलमान खुर्शीद ने कहा : नफरत फैलाने वालों से पूछो किस दुकान में मिलता है हिंदू-मुसलमान का खून
Fri, 04 Feb 2022 01:42 AM IST
दुष्यंत शर्मा
अमर उजाला नेटवर्क, अलीगढ़
अमर उजाला नेटवर्क, अलीगढ़
Published by: दुष्यंत शर्मा
Updated Fri, 04 Feb 2022 01:42 AM IST
सार
कांग्रेस नेता सलमान खुर्शीद ने ऊपरकोट में सभा कर अलीगढ़ वालों से मांगे वोट। अलीगढ़ को अपनी जन्मस्थली बताकर कहा, किसी के भी बहकावे में न आएं।
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सलमान खुर्शीद
- फोटो : ANI
विस्तार
कांग्रेस के वरिष्ठ नेता व पूर्व विदेश मंत्री सलमान खुर्शीद ने बृहस्पतिवार देर शाम ऊपरकोट टीले पर आयोजित सभा में कहा कि जो लोग कहते हैं कि हिंदू और मुसलमान के रास्ते अलग हैं। उन नफरत फैलाने वालों से पूछो कि अलीगढ़ के किस बाजार में कोई दुकान है, जहां हिंदू और मुसलमान के खून की बोतल बिकती हो। उन्होंने कहा मेरा जन्म अलीगढ़ में एएमयू कुलपति के घर का है। मेरा बचपन यहां बीता है। किसी के बहकावे में आने की जरूरत नहीं है, जो सीएए-एनआरसी के दौरान तुम्हारे साथ सीना ठोककर खड़ा था, आज उसे मजबूत करने की जरूरत है।
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सलमान खुर्शीद ने ये बातें कांग्रेस के शहर प्रत्याशी मो. सलमान इम्तियाज के समर्थन में आयोजित सभा में कहीं। उन्होंने कहा कि मैं फर्रुखाबाद की बात बता रहा हूं। जहां गंगा बहती है। उसके किनारे पर सुबह एक तरफ हिंदू भाई स्नान कर खुद को पवित्र करते हैं तो दूसरी ओर मुस्लिम भाई नमाज जाने के लिए वजू करते हैं। उस गंगा मां के पानी में कहीं हिंदू मुसलमान नहीं लिखा। उस गंगा में ये भी नहीं लिखा कि वह किसकी मां है। वह हम सबकी मां है। हमारे खेतों को सींचती है। उसी खेत से अनाज उगता है। उस अनाज के आटे की हम रोटी खाते हैं और उससे हमारी रगों में खून दौड़ता है। न अनाज में, न रोटी में और न खून में कहीं हिंदू मुसलमान लिखा होता है। फिर ये बातें क्यों।
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उन्होंने कहा कि मैं आज अपने अपने हमनाम अपने छोटे भाई के लिए अलीगढ़ आकर आप लोगों से वोटों की गुजारिश करने आया हूं और बड़ा फक्र मानता हूं। ये स्थान बहुत इज्जत का मुकाम है। क्योंकि इस्लाम की तारीख जो जानता है, वो बत सकता है कि टीले से इस्लाम का क्या रिश्ता है। तारीख में इस्लाम की पैदाइश एक टीले से हुई थी और इस्लाम इंसानियत का पैगाम है। इस देश की खुशकिस्मती देखिये इस्लाम इंसानियत का पैगाम है, इंसानियत एक दूसरे की मदद करने का पैगाम है। हिंदू धर्म जिसे सनातन धर्म कहते हैं, वह भी सम्मान है इंसानियत का।
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हम उसी इंसानियत के नाम पर वोट मांग रहे हैं। गंगा जमुनी तहजीब के नाम वोट मांग रहे हैं।
इशारों-इशारों में किया सीएए-एनआरसी पर तंज
उन्होंने इशारों इशारों में सीएए-एनआरसी पर तंज कसते हुए कहा कि यहां हमारे छोटे भाई खड़े हैं। इनके सामने एक सवाल खड़ा किया था हुकूमत ने। सवाल था कि तुम कौन हो? किसी इंसान से कोई ये पूछे कि तुम क्या अपनी मां की औलाद हो? हिंदुस्तान तुम्हारी मां है इसका सुबूत दो। मां की औलाद अपने दिल से सबूत देती है कागज के टुकड़ों पर नहीं। जब यह सवाल पूछा गया तो (सलमा इम्तियाज की ओर इशारा करते हुए) आपका ये शेर, आपके टीले का शेर निकला यह कहते हुए कि मैं आपको सुबूत दूंगा। उससे पहले आपसे सुबूत मांगूंगा कि तुम्हारी मां कौन है ये बताओ? इम्तियाज के इस कदम पर ऐसी दहशत में आए वो लोग और इनसे कह दिया कि अलीगढ़ से बाहर कर देते हैं। मगर इन्होंने कानून का सहारा लिया और आज देखिये ये आपके सामने खड़े हैं। इस दौरान एएमयू को लेकर उन्होंने कहा कि एएमयू यहां से दूर नहीं है। वहां चुनावी गणित लगाए जा रहे होंगे। मगर किसी हिसाब में पड़ने के बजाय, किसी को तोलते हुए ये मत कहना कि कौन भारी है। सवाल यह करना कि आप कंधों पर किसका बोझ उठा सकते हो।
खुद को अलीगढ़ी बताकर मांगा वोट
अंत में उन्होंने खुद को अलीगढ़ बताकर वोट मांगा। कहा कि जो लोग कहते हैं कि कांग्रेस जमीन पर कहां है, उनको जवाब दे दिया है कि हम जमीन पर हैं। आपके मजबूत सिपाही के लिए वोट मांगने आया हूं। मंच से बार-बार सलमान को वोट मांगे जा रहे हैं। मुझे लग रहा है कि मेरे लिए मांगे जा रहे हैं। अलीगढ़ भी मेरा घर है। इसलिए ध्यान रखें। सपा बसपा छोड़कर आए लोगों का स्वागत करते हुए कहा कि अभी जो लोग रह गए हैं, वे भी आ जाएं। ये हाथ नहीं हुआ तो साइकिल भी नहीं चल पाएगी। इस मौके पर कांग्रेस नेता रूही जुबैरी, आगा यूनुस आदि मौजूद रहे।