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आआरएसएस बताए, उसने ब्रिटिश राज के खिलाफ क्या किया ः इरफान

Tue, 22 Mar 2016 02:00 AM IST
लखनऊ/ब्यूरो
लखनऊ/ब्यूरो Updated Tue, 22 Mar 2016 02:00 AM IST
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rss stated , he did up against the British Raj : Irfan
इरफान हबीब - फोटो : लखनऊ/ब्यूरो

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विख्यात इतिहासकार इरफान हबीब ने केंद्र सरकार के राष्ट्रवाद के नारे को धोखा बताया है। कहा कि जिन्होंने साम्प्रदायिक दंगे भड़का कर अंग्रेजों की मदद की वे आज खुद को सबसे बड़ा राष्ट्रवादी बताने में लगे हैं। जो आज हिंसा फैलाने में लगे रहते हैं वे दूसरे को कह रहे हैं कि वह राष्ट्रवादी नहीं है। राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ को पहले यह बताना चाहिए कि उसने ब्रिटिश राज के खिलाफ क्या किया? सोमवार को उत्तर प्रदेश सरकार का सर्वोच्च सम्मान यश भारती ग्रहण करने आए इरफान हबीब से ‘अमर उजाला’ ने बातचीत की:
a यश भारती सम्मान मिलने पर क्या प्रतिक्रिया है?
a मैं बहुत आभारी हूं।
a आप केंद्र सरकार पर लगातार हमले करते रहे हैं, आपकी नाराजगी किन बातों को लेकर है?
a मेरी किसी से नाराजगी नहीं है लेकिन जाहिर है कि मैं 1931 में पैदा हुआ था तो मैंने ब्रिटिश राज देखा है। मैं जानता हूं कि वे कौन लोग थे जिन्होंने ब्रिटिश राज का विरोध किया था, उसके  खिलाफ संघर्ष किया और किन लोगों ने दंगे भड़का कर व साम्प्रदायिक विभेद उभारकर अंग्रेजों की मदद की। इनमें राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ और मुस्लिम लीग के लोग सबसे आगे थे। मैं तो जमाने से वाकिफ हूं। आज जो अपने को राष्ट्रवादी कह रहे हैं, राष्ट्रवाद का नारा दे रहे हैं, यह बिल्कुल धोखा है।
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a क्या आपको लगता है कि भाजपा सरकार में इतिहास को बदलने की कोशिश भी हो रही है?
a यह तो करते ही जा रहे हैं। राष्ट्रीय आन्दोलन का ही इतिहास बदलते जा रहे हैं। वे इसमें अपने को बहुत सूरमा बता रहे हैं जबकि इन्होंने कुछ नहीं किया। 1925 में आरएसएस बना, वे बताएं कि 1947 तक ब्रिटिश राज के खिलाफ उन्होंने क्या किया?
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a आपने यह भी कहा था कि एक धर्म, एक राष्ट्र, एक भाषा का नारा तालिबानी सोच को दर्शाता है?
a मैंने तालिबानी नहीं कहा था। मैंने कहा था कि धर्म और राष्ट्र को मिलाना तथा हिंसा की बात करना उसी तरह की विचारधारा है जो इस्लामी राष्ट्र की ओर ले जाती है। इसी तरह की विचारधारा से इस्लामी राष्ट्र भी पैदा हुए।

a पिछले दिनों बहुत सारे संस्कृतिकर्मियों ने सम्मान लौटाकर सरकार का विरोध किया था, यह विरोध अब कम होता दिख रहा है?
a मैं उनके जज्बे की कद्र करता हूं। उन्होंने सम्मान वापस किया जिससे देश में एक जागरूकता पैदा हुई। यह जागरूकता अब तक है।
a क्या आपको लगता है कि असहिष्णुता बढ़ी है?
a ये हर जगह हिंसा को उभार रहे हैं। उप्र में कितनी कोशिशें हो रही हैं हिंसा उभारने की और दूसरे लोगों को कहते हैं कि वे राष्ट्रवादी नहीं हैं। प्रधानमंत्री मोदी जी ने भी कहा है। ऐसा लगता है गोया इन्होंने राष्ट्रवाद का ठेका ले रखा हो।
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