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खनन की रॉयल्टी रसीद एक बार ही कर पाएंगे इस्तेमाल

Wed, 10 Jun 2020 01:54 AM IST
Aligarh Bureau अलीगढ़ ब्यूरो
Updated Wed, 10 Jun 2020 01:54 AM IST
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Royalty receipts of mining will only be used once
जिला खनन अधिकारी अनंत कुमार। - फोटो : CITY OFFICE
आशीष निगम
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सरकारी निर्माण कार्य करने वाली कार्यकारी संस्थाओं को अब इस्तेमाल हुए खनिज और उसकी रायल्टी का पूरा लेखा-जोखा न सिर्फ रखना होगा बल्कि विभागीय पोर्टल पर अपडेट भी कराना होगा। कार्यकारी संस्था को काम करने वाले ठेकेदार द्वारा उपयोग में लाए गए खनिज पदार्थ की चुकाई गई सरकारी रायल्टी की रसीद देनी होगी। खनन विभाग जांच करेगा कि इसकी रायल्टी जमा हुई या नहीं। इसकी सूचना कार्यकारी संस्था को भी मिलेगी। अगर रायल्टी कम हुई तो बची हुई रायल्टी वसूली जाएगी।
ये व्यवस्था बालू, मौरंग, गिट्टी, संगमरमर सहित सभी तरह के खनिज में लागू होगी। यही नहीं इस पूरी प्रक्रिया में कार्यकारी संस्था की ओर से उपलब्ध कराई गई खनन की रसीद को उत्तर प्रदेश खनन विभाग के पोर्टल पर अपडेट किया जाएगा। ऐसी हर एंट्री पोर्टल पर एक फ्लैग के साथ दिखेगी। ये व्यवस्था इसलिए बनाई गई ताकि एक रसीद को प्रदेश में एक बार ही इस्तेमाल किया जा सके। उस रसीद का दोबारा प्रयोग न हो सके। अगर एक बार पोर्टल पर लगाई गई रसीद दोबारा किसी जिले में कहीं लगाई गई तो इसकी खबर खनन विभाग के प्रदेश मुख्यालय तक पहुंचेगी। जिससे संबंधित ठेकेदार या कार्यदायी संस्था की गड़बड़ी पकड़ी जाएगी। इससे व्यवस्था पारदर्शी होने के साथ रायल्टी का पूरा हिसाब किताब एक क्लिक में सामने आएगा।
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प्रदेश के मुख्य सचिव राजेंद्र कुमार तिवारी ने बीती छह जून को इस संबंध में आदेश निर्गत किए हैं। जिला खनन अधिकारी अनंत कुमार ने बताया कि इस व्यवस्था को और कारगर बनाने के लिए जिलाधिकारी की अध्यक्षता में होने वाली बैठकों में खनन विभाग की भी उपस्थिति रहेगी, ताकि उनके समक्ष खनन और उसकी रायल्टी की सही तस्वीर सामने आए। साथ ही वह अन्य विभागों को निर्देशित कर सकेंगे। कार्यकारी संस्था को मौरंग, बालू, गिट्टी और अन्य खनिज की सही जानकारी देनी होगी। गंगा यमुना के दोआब पर बसे अलीगढ़ में खनन का वर्तमान में गंगा तट पर केवल एक पट्टा है। यमुना तट के दूसरे पट्टे की प्रक्रिया जारी है।
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अलीगढ़ में खनन की स्थिति
1- गंगा के सांकरा में दिल्ली के मंजीत चावला का खनन का ठेका है, 79-80 लाख रायल्टी हर महीने दे रहे हैं। ये ठेका 26 सितंबर 2018 को आगामी पांच साल के लिए दिया गया था।
2- यमुना में खनन ठेका प्रक्रिया जारी, पर्यावरण सुरक्षा एनओसी का इंतजार है, अक्तूबर तक चालू होगा खनन कार्य। ये ठेका भी पांच साल के लिए दिया जाएगा।
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