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Aligarh News: एएमयू में थाना बनाने पर छिड़ी रार, जुबानी जंग
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एएमयू।
- फोटो : Archive
अलीगढ़ मुस्लिम यूनिवर्सिटी (एएमयू) परिसर में थाना स्थापित करने की मांग को लेकर रार छिड़ गई है। इसके साथ जुबानी जंग भी जारी हो गई है। एक ओर जहां एएमयू प्रॉक्टर ने इसे यूनिवर्सिटी की छवि खराब करने की कोशिश बताया है। वहीं, दूसरी ओर कोल विधायक ने कानून-व्यवस्था को और मजबूत करने के लिए परिसर में थाना स्थापित करने की मांग को उचित ठहराया है।
यूनिवर्सिटी के प्रॉक्टर प्रो. मोहम्मद नवेद खान ने कहा कि जब भी चुनाव का माहौल आता है, इस तरह के मुद्दे उठाए जाते हैं। उन्होंने कहा कि यूनिवर्सिटी में थाना बनाने के लिए न तो शासन या प्रशासन ने एएमयू से कोई प्रस्ताव मांगा है और न ही इस संबंध में यूनिवर्सिटी को कोई आधिकारिक जानकारी दी गई है। उन्होंने कहा कि यूनिवर्सिटी में 99.99 फीसदी छात्र शांतिपूर्वक पढ़ाई कर रहे हैं। अगर कुछ गिने-चुने छात्र नियमों का उल्लंघन करते हैं तो उनके खिलाफ कार्रवाई की जाती है। पूरे यूनिवर्सिटी की कानून-व्यवस्था पर सवाल उठाना उचित नहीं है।
एएमयू को कानून-व्यवस्था के लिहाज से असुरक्षित बताकर उसकी छवि धूमिल करने का प्रयास किया जा रहा है, जबकि यह एक अंतरराष्ट्रीय स्तर का शिक्षण संस्थान है। जेएन मेडिकल कॉलेज के पास पहले से पुलिस चौकी और पुलिस बूथ मौजूद है और थोड़ी ही दूरी पर सिविल लाइंस थाना भी स्थित है। ऐसे में परिसर के भीतर नया थाना स्थापित करने की मांग समझ से परे है।
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कोल विधायक अनिल पाराशर ने कहा कि उन्होंने एएमयू और आसपास के क्षेत्र की सुरक्षा व्यवस्था को और सुदृढ़ बनाने के उद्देश्य से अपर मुख्य सचिव (गृह) को पत्र लिखकर विश्वविद्यालय परिसर में थाना स्थापित करने की मांग की है। जब आबादी बढ़ती है तो पुलिस थानों की संख्या भी बढ़ाई जाती है।
पिछले वर्ष महुआखेड़ा और रोरावर जैसे नए थाने बनाए गए हैं। शासन की मंशा कानून-व्यवस्था को और मजबूत करना है। ऐसे में एएमयू में थाना स्थापित करने के प्रस्ताव का सकारात्मक रूप से स्वागत होना चाहिए। उन्होंने प्रॉक्टर के बयान पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि उनकी टिप्पणी में हताशा झलकती है। उन्होंने सवाल उठाया कि यदि थाना बनने से सुरक्षा व्यवस्था बेहतर होती है तो इसका विरोध क्यों किया जा रहा है।
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यूनिवर्सिटी के प्रॉक्टर प्रो. मोहम्मद नवेद खान ने कहा कि जब भी चुनाव का माहौल आता है, इस तरह के मुद्दे उठाए जाते हैं। उन्होंने कहा कि यूनिवर्सिटी में थाना बनाने के लिए न तो शासन या प्रशासन ने एएमयू से कोई प्रस्ताव मांगा है और न ही इस संबंध में यूनिवर्सिटी को कोई आधिकारिक जानकारी दी गई है। उन्होंने कहा कि यूनिवर्सिटी में 99.99 फीसदी छात्र शांतिपूर्वक पढ़ाई कर रहे हैं। अगर कुछ गिने-चुने छात्र नियमों का उल्लंघन करते हैं तो उनके खिलाफ कार्रवाई की जाती है। पूरे यूनिवर्सिटी की कानून-व्यवस्था पर सवाल उठाना उचित नहीं है।
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एएमयू को कानून-व्यवस्था के लिहाज से असुरक्षित बताकर उसकी छवि धूमिल करने का प्रयास किया जा रहा है, जबकि यह एक अंतरराष्ट्रीय स्तर का शिक्षण संस्थान है। जेएन मेडिकल कॉलेज के पास पहले से पुलिस चौकी और पुलिस बूथ मौजूद है और थोड़ी ही दूरी पर सिविल लाइंस थाना भी स्थित है। ऐसे में परिसर के भीतर नया थाना स्थापित करने की मांग समझ से परे है।
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कोल विधायक अनिल पाराशर ने कहा कि उन्होंने एएमयू और आसपास के क्षेत्र की सुरक्षा व्यवस्था को और सुदृढ़ बनाने के उद्देश्य से अपर मुख्य सचिव (गृह) को पत्र लिखकर विश्वविद्यालय परिसर में थाना स्थापित करने की मांग की है। जब आबादी बढ़ती है तो पुलिस थानों की संख्या भी बढ़ाई जाती है।
पिछले वर्ष महुआखेड़ा और रोरावर जैसे नए थाने बनाए गए हैं। शासन की मंशा कानून-व्यवस्था को और मजबूत करना है। ऐसे में एएमयू में थाना स्थापित करने के प्रस्ताव का सकारात्मक रूप से स्वागत होना चाहिए। उन्होंने प्रॉक्टर के बयान पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि उनकी टिप्पणी में हताशा झलकती है। उन्होंने सवाल उठाया कि यदि थाना बनने से सुरक्षा व्यवस्था बेहतर होती है तो इसका विरोध क्यों किया जा रहा है।