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रोडवेज बेबस : यात्री अपनी जान की रक्षा खुद करें

Wed, 16 Feb 2022 12:02 AM IST
Aligarh Bureau अलीगढ़ ब्यूरो
Updated Wed, 16 Feb 2022 12:02 AM IST
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Roadways helpless: Passengers should protect their own lives
गांधीपार्क बस अड्डे पर जर्जर हालात में खड़ी बस। - फोटो : CITY OFFICE
मथुरा में सोमवार को रोडवेज बस में लगी आग से यात्री के जिंदा जलने की घटना के बाद भी परिवहन निगम नहीं चेता। सड़कों पर दौड़ रहीं जर्जर बसों की न तो जांच की गई और न ही सुरक्षा इंतजाम देखे गए। परिवहन निगम के अधिकारियों की लापरवाही का खामियाजा यात्रियों को भुगतना पड़ रहा है। लेकिन महकमा यात्रियों से किराया पूरा वसूल रहा है।
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मंगलवार को अमर उजाला ने पड़ताल की तो पता चला कि रोडवेज की ज्यादातर बसों (नॉन एसी) में यात्री सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम ही नहीं हैं। अग्निशमन यंत्र से लेकर प्राथमिक उपचार बॉक्स भी नहीं था, जिन बसों में थे, वो खाली थे। चालक भी बस को जुगाड़ से चला रहे हैं। स्टेयरिंग के पास खुले तार थे और उसी के पास तेल रिस रहा था। ऐसे में शार्ट सर्किट से आग लगने की आशंका है।
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रोजाना लाखों लोग परिवहन निगम की रोडवेज बसों से यात्रा करते हैं। मंगलवार को गांधी पार्क, मसूदाबाद व सैटेलाइट बस अड्डों पर यात्रियों की भीड़ रही। लेकिन रोडवेज बसों में सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम नहीं थे। बसों में यात्री सुरक्षा के लिए न तो अग्निशमन यंत्र मिले। प्राथमिक उपचार बॉक्स भी खाली मिला। चालक की स्टेयरिंग जर्जर हालत में थी। स्टेयरिंग के पास खुले तार हादसे को न्योता दे रहे हैं। खुले तारों के पास तेल रिस रहा था, जिससे कभी भी बड़ा हादसा हो सकता है। मथुरा में हुए बस हादसे ने परिवहन निगम पर कई सवाल खड़े कर दिए हैं। इस संबंध में आरएम मोहम्मद परवेज खान का कहना है कि कोरोना के बाद से परिवहन निगम की आर्थिक स्थिति लगातार खराब हो रही है। मरम्मत कराने के लिए बजट नहीं होने से बसें खराब हो रही हैं।
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1- अधिकारी प्राइवेट बसों को चेक करते हैं। लेकिन कभी उनका ध्यान जर्जर बसों पर नहीं जाता। यात्री सुरक्षित सफर करने के लिए किराया देता है। फिर सुरक्षा की जिम्मेदारी किसकी है।
आशीष कुमार, यात्री
2- बसों में यात्री सुरक्षा को लेकर कोई इंतजाम नहीं होते हैं। खराब अग्निशमन यंत्र से कैसे आग बुझाएंगे। मजबूरी में रोडवेज की जर्जर बसों में सफर करना पड़ता है। - पूजा शर्मा, यात्री
3- अगर सरकारी बसों की ऐसी स्थिति है तो फिर प्राइवेट बसों का क्या हाल होगा। पहले भी हादसे हो चुके हैं। इन हादसों से सबक लेकर यात्री सुरक्षा पर काम करना चाहिए। -रवि कुमार, यात्री
4- ऐसे हादसों के बाद रोडवेज बसों में सफर करने में डर लगता है। लेकिन मजबूरी है, क्या कर सकते हैं। बसों की हालत इतनी खराब है कि चालक उसे रामभरोसे चला रहे हैं। - विनय, यात्री
लालच के चक्कर में होते हैं अधिकतर हादसे
सोमवार को बुद्ध विहार की बस में हुआ हादसा चालक परिचालक की मिलीभगत का नतीजा है। बस में आगे की तरफ रासायनिक पदार्थ रखा था, जिसके कारण आग ने इतना भयानक रूप ले लिया। अगर बस में कोई ज्वलनशील पदार्थ नहीं होता तो शायद शार्ट सर्किट से इतना बड़ा हादसा नहीं होता। लालच के चक्कर में चालक-परिचालक यात्रियों की जिंदगी से खिलवाड़ करते हैं। इससे पहले भी ऐसे ही हादसे हो चुके हैं। इसके बावजूद परिवहन निगम ने सबक नहीं लिया है।
अलीगढ़ परिक्षेत्र में सात डिपो हैं। सातों डिपो में करीब 710 बसें है। बसों की मरम्मत व घिसे टायरों को बदलने के लिए मुख्यालय से लगातार पत्र व्यवहार किया जा रहा था, बजट जारी हो गया है। करीब 250 नए टायर उपलब्ध कराए गए हैं। आगे और भी टायर मिलने की उम्मीद है।
मो. परवेज खान आरएम, परिवहन निगम
रोडवेज बसों की जर्जर हालत से यात्रियों के साथ-साथ चालक परिचालकों को भी खतरा है। हादसा होने के बाद भी परिवहन निगम सजग नहीं है। पहले भी इस तरह के कई हादसे हो चुके हैं। बसों की खराब हालत हादसों को न्योता दे रही है। संगठन इसे कतई बर्दाश्त नहीं करेगा।

- मुनेंद्र पाल सिंह, मंडल अध्यक्ष, रोडवेज कर्मचारी संयुक्त परिषद
50 से अधिक बसें वर्कशाप में खड़ी हैं
सारसौल स्थित वर्कशाप में 50 से अधिक बसें टायर व स्पेयर पार्ट्स के अभाव में खड़ी हैं। इसके अलावा डेढ़ दर्जन से अधिक बसें ऐसी हैं जो सड़कों पर दौड़ रही हैं, जिनकी स्थिति दयनीय है। कर्मचारियों ने बताया कि मरम्मत के लिए कई बसें महीनों से वर्कशाप में खड़ी हैं। स्पेयर पार्ट्स व टायर के लिये मुख्यालय से मांग की गई है।

गांधी पार्क बस अड्डे पर जर्जर हालात में खड़ी बस ।

गांधी पार्क बस अड्डे पर जर्जर हालात में खड़ी बस । - फोटो : CITY OFFICE

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