Raksha Bandhan 2024: राखी पर्व 19 अगस्त को, बहनें इस समय के बाद ही बांधें अपने भाई को राखी
भद्रा कब तक, राखी कब बांधें,जिसके भाई नहीं है, वह क्या अपने पिता, चाचा को राखी बांध सकती है, क्या भगवान श्रीकृष्ण या किसी देवता के राखी बांधना सही है, रक्षाबंधन पर किसकी पूजा की जाती है... ज्योतिषाचार्य पंडित हृदय रंजन शर्मा ने रक्षा बंधन से जुड़े सवालों के जवाब यह दिए ...
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भाई-बहन का पावन पर्व रक्षा बंधन 19 अगस्त को मनाया जाएगा। ज्योतिष के अनुसार इस बार भद्रा कब तक रहेगी ? राखी कितने बजे से बांधना शुभ है? अगर भाई दूर है और बहन को राखी डाक से भेजनी है, तो वह लिफाफे में क्या-क्या रखे ? अगर डाक से राखी रक्षा बंधन के बाद पहुंचे तो क्या उसे बांधना चाहिए ? जिसके भाई नहीं है, वह क्या अपने पिता, चाचा को राखी बांध सकती है ? क्या भगवान श्रीकृष्ण या किसी देवता के राखी बांधना सही है ? आजकल की फैंसी राखी से वैदिक राखी कैसे अलग है और कैसे बनाई जाती है ? रक्षाबंधन पर किसकी पूजा की जाती है ? यह प्रश्न हर साल भाई-बहन के सामने आते हैं। अलीगढ़ के ज्योतिषाचार्य पंडित हृदय रंजन शर्मा ने रक्षा बंधन पर्व से जुड़े सवालों के जवाब ज्योतिष के अनुसार दिए।
भद्रा में न बांधें राखी
ज्योतिषाचार्य पंडित हृदय रंजन शर्मा ने बताया कि भारतीय ज्योतिष के अनुसार मध्याह्न यानी कि दोपहर बाद से राखी बांधना अत्यंत शुभ माना जाता है। इस बार 19 अगस्त दिन सोमवार रक्षाबंधन वाले दिन अशुभ भद्रा प्रातः सूर्योदय से दोपहर 1:33 तक मान्य होगी। भद्रा काल में कोई भी शुभ कार्य करना अत्यंत अशुभ माना गया है। अत: इसके पश्चात ही राखी बांधें।
राखी बांधने का शुभ समय
राखी बांधने के लिए 19 तारीख की दोपहर 1:45 से शाम 7:45 तक अति उत्तम समय माना जाएगा, इस समय में चौघड़िया मुहूर्त के अनुसार भी उद्देग, चर,लाभ और अमृत का चौघड़िया मुहूर्त उपलब्ध रहेंगे। जिसमें हर प्रकार के शुभ कार्य किये जा सकते हैं। अतः इसी समय पर बहन अपने भाई के हाथ पर राखी बांधे।
डाक से राखी भेजते समय लिफाफे में यह रखें
अगर किसी बहन का भाई काफी दूर-दराज या देश-विदेश में रहता है तो डाक से भेजे जाने वाले लिफाफे में राखी के साथ चावल, रोली, प्रसाद बताशा, चीनी या गुड़ रख सकती है। अगर किसी बहन की रक्षाबंधन वाले दिन तक राखी नहीं पहुंचती है तो उन राखियों को भगवान कृष्ण या भगवान भोलेनाथ पर चढ़ा सकते हैं या उनके बांध सकती है, जो शुभ माना जाता है।
भाई नहीं है तो पिता, चाचा को बांध सकते हैं राखी
अगर किसी बहन के भाई न हो तो वह अपने पिता, गुरु, मित्र, चाचा या किसी भी सम्मानित व्यक्ति के, जिसे वह अपनी नजर में भाई जैसा रक्षक मानती हो उसके राखी बांध सकती है।
भगवान कृष्ण और अन्य देवताओं के राखी बांधना
भगवान कृष्ण या भगवान भोलेनाथ के राखी बांधी जा सकती है, जो शुभ माना जाता है।
फैंसी राखी और घर की बनी वैदिक राखी
आजकल के जमाने में जो फैंसी राखियां चल रही हैं, उन्होंने वैदिक राखी को भारतीय सभ्यता से अलग कर दिया है। वैदिक सभ्यता में जो राखी बनाई जाती थीं, उनमें विशेष रूप से पांच चीजों की आवश्यकता होती थी। जिनमें दूर्वा घास, अक्षत यानि कि चावल, केसर और सरसों के दाने विशेष रूप से प्रयोग किए जाते हैं।
रक्षाबन्धन पर श्रवणकुमार की पूजा
इस दिन घरों में मातृ-पितृ भक्त श्रवणकुमार की याद में सोना या सोन रखे जाते हैं। उनका रोली-चावल से पूजन कर लड्डू, सेवईं या मीठे चावल का भोग लगाया जाता है। उन पर राखी लगाई जाती है । सोन पूजा करने का कारण यह है कि राजा दशरथ के बाण से श्रवणकुमार की मृत्यु हो गयी थी। राजा दशरथ ने श्रवणकुमार के माता-पिता को आश्वासन दिया कि श्रावणी के दिन श्रवण पूजा की जाएगी। इसी कारण रक्षाबंधन के दिन सबसे पहले राखी श्रवणकुमार की याद में सोन को अर्पण करते हैं।