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मधुर सिटी के खिलाफ रिपोर्ट, 1.89 करोड़ जुर्माना लगाया
न्यूूज डेस्क, अमर उजाला, अलीगढ़।
Updated Wed, 25 Jul 2018 02:19 AM IST
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मधुर सिटी कॉलोनी में अवैध कब्जे को हटती जेसीबी व खड़े अधिकारी।
- फोटो : Amar Ujala
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एटा चुंगी रोड के पास की मधुर सिटी कालोनी के कालोनाइजर ने सुखरावली बार्डर से नगला देवी तक नाले के दोनों ओर के चक रोड के रास्ते पर कब्जा रखा था। लगातार दो दिन हुई पैमाइश में यह तथ्य सामने आया है। तहसील की टीम ने ज्वाइंट मजिस्ट्रेट की अगुवाई में बचे हुए अवैध कब्जे को भी ढहा दिया। इस मामले में मधुर सिटी के नाम से एफआईआर दर्ज करायी जा रही है और कालोनाइजर पर 1.89 करोड़ जुर्माना लगाया है। एडीए को भी कार्रवाई के लिए लिखा गया है। बताते चलें कि अलीगढ़ विकास प्राधिकरण ने इस साल की शुरूआत में 164 अवैध कालोनियों की सूची शासन को भेजी थी। इन सभी का ध्वस्तीकरण होना था। इनमें क्वारसी क्षेत्र की दर्जनभर कालोनियों में मधुर सिटी का नाम भी शामिल था। बाद में शासन द्वारा अवैध कालोनियों के नियमितीकरण की आड़ में कार्रवाई टाल दी गई। महानगर में कुल 400 अवैध कालोनियां हैं। इन्हें तोड़ना या नियमित करना है, यह सब शासनादेश पर टिका है।
यह था मामला
सोमवार की सुबह जिलाधिकारी चंद्रभूषण सिंह की जनसुनवाई में एक बुजुर्ग अपनी जमीन पर दबंगों द्वारा कब्जा कर लेने की शिकायत लेकर पहुंचे थे। ये जमीन भी असदपुर कयाम की है। जिलाधिकारी के निर्देश पर तहसील की एक टीम बुजुर्ग की जमीन को कब्जा मुक्त कराने पहुंची तो वहां पहले से मौजूद मधुर नगर कालोनी को बसाने वाले लोगों ने पैमाइश नहीं होने दी। टीम के लौटने के बाद जिलाधिकारी को पूरी स्थिति से अवगत कराया गया तो उन्होंने सख्त कार्रवाई करने का निर्देश दिया। एसडीएम कोल ने बताया कि शाम को वो खुद एक टीम लेकर मौके पर पहुंचे। मौके पर बुजुर्ग की जमीन की पैमाइश कराई गई। इसी दौरान पूरे कागजात जांचने पर पता चला कि वहां के खसरा संख्या 9, 11 और 174 में 5790 वर्गमीटर सरकारी चकरोड की जगह है। जो कुल जमीन लगभग छह बीघा है। इसी जगह पर मधुर नगर कालोनी वालों ने 30 प्लाट बना दिए। जिनकी कीमत लगभग चार करोड़ रुपये आंकी गई है। यहां बने प्लाट की बाउंड्री और दूसरे निर्माण कार्य जेसीबी मशीनों से ढहा दिए गए हैं।
एडीए द्वारा चिन्हित अवैध कालोनियां जहां होना था ध्वस्तीकरण
पिंक सिटी, वैष्णवी एन्क्लेव, मधुर सिटी, चंद्र सिटी, आरएफ बाउंड्रीवाल के पास प्रदीप तोमर की कालोनी, सतीश, याकूब व भूपेंद्र की असदपुर कयाम के पास की कालोनी, इंजीनियर्स कालोनी, टीचर्स कालोनी, साबरी गार्डन, शंकर विहार, सुदर्शन नगर, गरीब नवाज कालोनी।
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अवैध कालोनियों की सूची बनाई गई थी उनमें क्वार्सी इलाके की मधुर सिटी समेत करीब एक दर्जन कालोनियां शामिल थीं। इन सभी को ध्वस्तीकरण के नोटिस जारी किए गए थे। कार्रवाई होने से पहले शासन का अवैध कालोनियों के नियमितीकरण का आदेश आने के कारण कार्रवाई स्थगित कर दी गई। अब शासन के आदेश का इंतजार है।
- डीएस भदौरिया, एडीए सचिव
मधुर सिटी मामले में मंगलवार को की गई पैमाइश में पता चला कि कालोनाइजर ने रामघाट रोड से एटा चुंगी तक के मार्ग में पड़ने वाले सुखरावली बार्डर से नगला देवी तक की चक रोड पर नाले की दोनों ओर अवैध रूप से कब्जा कर 30 प्लाट काट दिये थे। इन सभी को जेसीबी की मद्द से ध्वस्त करा दिया गया है। इस मामले में कालोनाइजर नहीं बल्कि मधुर सिटी प्रोेजेक्ट के नाम से क्वारसी थाने में एफआईआर मंगलवार सायं दर्ज करा दी गई है। प्रोजेक्ट के नाम से एफआईआर इस वजह से करानी पड़ी कि कही खतौनी में कालोनाइजर के बजाय किसी और का नाम न हो।
- जोगिंदर सिंह, एसडीएम कोल
सियासी दबाव या कुछ और...
मधुर सिटी प्रकरण में हुई एफआईआर मात्र प्रोजेक्ट के नाम से होने को लेकर तमाम सवाल उठ रहे हैं। इस बात की भी जबर्दस्त चर्चा है कि कालोनाइजर पर किसी सियासी कद्दावर का वरदहस्त है। तभी पुलिस और प्रशासन लगातार दो दिन तक चली पैमाइश और रिकार्ड देखने के बावजूद अब तक कालोनाइजर का नाम तक नहीं जान सकी। या फिर जानने के बाद भी कद्दावर के दबाव में कालोनाइजर के नाम का खुलासा नहीं करना चाहती। सवाल उठ रहा है कि अगर यह भी पता नहीं था कि कालोनाइजर कौन है तो वे किसकी जमीन की पैमाइश कर रहे थे।
तहसील कर्मियों की संलिप्तता की होगी जांच : मधुर सिटी प्रकरण में चक रोड पर कब्जे का मामला प्रकाश में आने पर तहसील कोल के कुछ पूर्व एवं वर्तमान कर्मचारियों की संलिप्तता की जांच होगी। इस मामले में कालोनाइजर ने देर सायं ज्वाइंट मजिस्ट्रेट एवं एसडीएम कोल से मुलाकात की और अपने कागजात प्रस्तुत किये। ज्वाइंट मजिस्ट्रेट ने बताया कि उसके सभी तर्क खारिज कर दिये गए।
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यह था मामला
सोमवार की सुबह जिलाधिकारी चंद्रभूषण सिंह की जनसुनवाई में एक बुजुर्ग अपनी जमीन पर दबंगों द्वारा कब्जा कर लेने की शिकायत लेकर पहुंचे थे। ये जमीन भी असदपुर कयाम की है। जिलाधिकारी के निर्देश पर तहसील की एक टीम बुजुर्ग की जमीन को कब्जा मुक्त कराने पहुंची तो वहां पहले से मौजूद मधुर नगर कालोनी को बसाने वाले लोगों ने पैमाइश नहीं होने दी। टीम के लौटने के बाद जिलाधिकारी को पूरी स्थिति से अवगत कराया गया तो उन्होंने सख्त कार्रवाई करने का निर्देश दिया। एसडीएम कोल ने बताया कि शाम को वो खुद एक टीम लेकर मौके पर पहुंचे। मौके पर बुजुर्ग की जमीन की पैमाइश कराई गई। इसी दौरान पूरे कागजात जांचने पर पता चला कि वहां के खसरा संख्या 9, 11 और 174 में 5790 वर्गमीटर सरकारी चकरोड की जगह है। जो कुल जमीन लगभग छह बीघा है। इसी जगह पर मधुर नगर कालोनी वालों ने 30 प्लाट बना दिए। जिनकी कीमत लगभग चार करोड़ रुपये आंकी गई है। यहां बने प्लाट की बाउंड्री और दूसरे निर्माण कार्य जेसीबी मशीनों से ढहा दिए गए हैं।
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एडीए द्वारा चिन्हित अवैध कालोनियां जहां होना था ध्वस्तीकरण
पिंक सिटी, वैष्णवी एन्क्लेव, मधुर सिटी, चंद्र सिटी, आरएफ बाउंड्रीवाल के पास प्रदीप तोमर की कालोनी, सतीश, याकूब व भूपेंद्र की असदपुर कयाम के पास की कालोनी, इंजीनियर्स कालोनी, टीचर्स कालोनी, साबरी गार्डन, शंकर विहार, सुदर्शन नगर, गरीब नवाज कालोनी।
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अवैध कालोनियों की सूची बनाई गई थी उनमें क्वार्सी इलाके की मधुर सिटी समेत करीब एक दर्जन कालोनियां शामिल थीं। इन सभी को ध्वस्तीकरण के नोटिस जारी किए गए थे। कार्रवाई होने से पहले शासन का अवैध कालोनियों के नियमितीकरण का आदेश आने के कारण कार्रवाई स्थगित कर दी गई। अब शासन के आदेश का इंतजार है।
- डीएस भदौरिया, एडीए सचिव
मधुर सिटी मामले में मंगलवार को की गई पैमाइश में पता चला कि कालोनाइजर ने रामघाट रोड से एटा चुंगी तक के मार्ग में पड़ने वाले सुखरावली बार्डर से नगला देवी तक की चक रोड पर नाले की दोनों ओर अवैध रूप से कब्जा कर 30 प्लाट काट दिये थे। इन सभी को जेसीबी की मद्द से ध्वस्त करा दिया गया है। इस मामले में कालोनाइजर नहीं बल्कि मधुर सिटी प्रोेजेक्ट के नाम से क्वारसी थाने में एफआईआर मंगलवार सायं दर्ज करा दी गई है। प्रोजेक्ट के नाम से एफआईआर इस वजह से करानी पड़ी कि कही खतौनी में कालोनाइजर के बजाय किसी और का नाम न हो।
- जोगिंदर सिंह, एसडीएम कोल
सियासी दबाव या कुछ और...
मधुर सिटी प्रकरण में हुई एफआईआर मात्र प्रोजेक्ट के नाम से होने को लेकर तमाम सवाल उठ रहे हैं। इस बात की भी जबर्दस्त चर्चा है कि कालोनाइजर पर किसी सियासी कद्दावर का वरदहस्त है। तभी पुलिस और प्रशासन लगातार दो दिन तक चली पैमाइश और रिकार्ड देखने के बावजूद अब तक कालोनाइजर का नाम तक नहीं जान सकी। या फिर जानने के बाद भी कद्दावर के दबाव में कालोनाइजर के नाम का खुलासा नहीं करना चाहती। सवाल उठ रहा है कि अगर यह भी पता नहीं था कि कालोनाइजर कौन है तो वे किसकी जमीन की पैमाइश कर रहे थे।
तहसील कर्मियों की संलिप्तता की होगी जांच : मधुर सिटी प्रकरण में चक रोड पर कब्जे का मामला प्रकाश में आने पर तहसील कोल के कुछ पूर्व एवं वर्तमान कर्मचारियों की संलिप्तता की जांच होगी। इस मामले में कालोनाइजर ने देर सायं ज्वाइंट मजिस्ट्रेट एवं एसडीएम कोल से मुलाकात की और अपने कागजात प्रस्तुत किये। ज्वाइंट मजिस्ट्रेट ने बताया कि उसके सभी तर्क खारिज कर दिये गए।