AMU: ऑस्ट्रेलिया -अफ्रीका के दुर्लभ पेड़ों को एएमयू में उगाया, 15 साल बाद दोनों पर आ रहे फूल
न दोनों देशों के पेड़ों पर 15 साल बाद फूल आ रहे हैं, जो इनके सफलता पूर्वक स्थानीय वातावरण में सहजता हासिल कर लेने का संकेत है।
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अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय (एएमयू) के लैंड एंड गार्डन विभाग ने एक बड़ी सफलता हासिल की है। विश्वविद्यालय के गुलिस्तान-ए सैयद परिसर में ऑस्ट्रेलिया और अफ्रीका में पाए जाने वाले दो बेहद चुनौतीपूर्ण और दुर्लभ पेड़ों को सफलतापूर्वक उगाया और संरक्षित किया गया है। कड़ी मेहनत का नतीजा है कि इन दोनों देशों के पेड़ों पर 15 साल बाद फूल आ रहे हैं, जो इनके सफलता पूर्वक स्थानीय वातावरण में सहजता हासिल कर लेने का संकेत है। यह उपलब्धि इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि अलीगढ़ के वातावरण में इन पेड़ों का अस्तित्व बनाए रखना अत्यंत कठिन माना जाता है।
एएमयू के लैंड एंड गार्डन विभाग की टीम को जिन दो पेड़ों को एएमयू में विकसित करने में सफलता मिली है, उनमें से एक ऑस्ट्रेलिया का ब्रेकिक आइटोन रोपेसिस्ट है। इस पेड़ को अब 15 साल का समय हो चुका है और यह सफलतापूर्वक विकसित हो रहा है। शोधकर्ता अब मार्च में इस पर फल आने का इंतजार कर रहे हैं। दूसरा पेड़ अफ्रीका का बाउ बाउ ट्री है। यह पेड़ भी एएमयू के वातावरण में पूरी तरह से ढल गया है और इस पर शानदार फल आए हैं।
विश्वविद्यालय के प्रयासों से अब इन विदेशी पेड़ों ने अलीगढ़ की मिट्टी को अपनाया है, जो लैंड एंड गार्डन विभाग और संरक्षण के क्षेत्र में एक महत्वपूर्ण कदम है। लैंड एंड गार्डन के प्रभारी और वनस्पति विज्ञानी प्रो. शहजाद अनवर कहते हैं कि बाउ बाउ ट्री पर आए फलों के बीज तैयार किए जा रहे हैं। इन बीजों का उपयोग करके न केवल एएमयू परिसर में बल्कि अन्य स्थानों पर भी इनके पौधे तैयार किए जाएंगे और लगाए जाएंगे, जिससे इन दुर्लभ प्रजातियों का प्रसार और संरक्षण सुनिश्चित हो सके।
कटिंग से पैदा करने का प्रयास विफल रहा
ऑस्ट्रेलिया के ब्रेकिक आइटोन रोपेसिस्ट को बोटल ट्री भी कहते हैं। यह भारत में बहुत दुर्लभ है। इसको एएमयू के गुलिस्तान-ए-सैयद में 15 वर्ष पहले लगाया गया। कड़ी मेहनत के बाद अब इस पर फूल आने की तैयारी है। इसको कटिंग से पैदा करने का प्रयास किया लेकिन विफल रहे। अब मार्च में इसके बीज आ सकते हैं। बीज से इसको तैयार करेंगे। अब कहा जा सकता है कि यह कामयाब तरीके से धरती में जम चुका है। यह मालवेसी परिवार से है।
15 साल पहले एएमयू में लगाया, अब फूल आया
प्रो. अनवर कहते हैं कि बाउ बाउ ट्री मेगाडास्कर में पाया जाता है। इसके तने में पानी इकट्ठा होता है। वहां की जनजातियां इसके तने में से पानी निकाल कर पीती हैं। यह दो से तीन हजार साल तक जीवित रहता है। इसका सिर्फ तना ही मोटा होगा। ऊपर बहुत ज्यादा ग्रोथ नहीं होगी। एएमयू में इसको 15 साल पहले लगाया गया अब इसने सान बाद इस पर फूल आया है।