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आजादी से पहले मंचन था मूक मगर मुखर हुआ करती थी रामलीला
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विमल अग्रवाल।
- फोटो : CITY OFFICE
रिंकू शर्मा
पश्चिमी उत्तर प्रदेश की प्रसिद्ध सरयू पार रामलीला की तैयारियां पूरी हो गई हैं। स्वतंत्रता से पूर्व लगभग सौ साल पहले इस रामलीला का श्रीगणेश हुआ था। उस समय माइक लाइट साउंड आदि की व्यवस्था नहीं थी। इसलिए कलाकार मूक अभिनय करते थे, मगर उनका भावपूर्ण अभिनय इतना मुखर होता था कि उसे देखकर दर्शक गदगद हो जाते थे। इस बार श्री रामलीला महोत्सव 19 सितंबर से सात अक्तूबर तक चलेगा।
यह है इतिहास
श्री रामलीला गौशाला कमेटी और महोत्सव के अध्यक्ष विमल अग्रवाल के अनुसार 1963 में जन्म से पहले अचल ताल पर रामलीला होती थी। पिता स्व. बालकिशन अग्रवाल रामलीला कमेटी के अध्यक्ष रहे। समाजसेवी और पत्रकार महेश सुहृद ने भी अध्यक्ष पद की कमान संभाली, जो भी अध्यक्ष बना उसने धीरे-धीरे रामलीला महोत्सव में नवाचार किया। विमल अग्रवाल ने बताया कि महोत्सव में शुरुआती दौर में दर्शकों का सैलाब उमड़ता था। गांवों से बड़ी संख्या में दर्शक आया करते थे। 70 के दशक में स्थिति यह थी कि दर्शकों को संभालना मुश्किल पड़ जाता था। कलाकारों के मंचन पर पूरा परिसर जय श्री राम के जयघोष से गूंज उठता था।
10 साल से महिला पात्र कर रहीं मंचन
यहां रामलीला में करीब 10 वर्षों से महिला कलाकार भी मंचन कर रही हैं। मंच पर उनका अभिनय देखते ही बनता है। राम वन गमन, सीता हरण आदि लीलाओं का मंचन देख दर्शक भाव से भर उठते हैं। वहीं, अचल सरोवर में नौका डालकर प्रभु श्री राम को नौका पार कराया जाता था। वनवास का यह दृश्य देखकर दर्शकों की अश्रुधारा बह निकलती है। अब रामलीला हाईटेक हो गई है और महोत्सव की भव्यता और बढ़ गई है। इस बार श्री आदर्श रामलीला मंडल मथुरा की कमेटी रामलीला का मंचन करेगी।
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सरयू पार लीला पर असमंजस की स्थिति
महोत्सव के अध्यक्ष विमल अग्रवाल ने बताया कि स्मार्ट सिटी के तहत चल रहे काम के चलते इस बार सरयू पार लीला असमंजस में है। हालांकि उन्होंने प्रशासन, नगर निगम, नगर आयुक्त को इस बारे में पत्र लिखा है।
मुख्यमंत्री योगी को भी बुलावा
विमल अग्रवाल के अनुसार दशहरा पर इस बार मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को बुलाने की तैयारी चल रही है। हालांकि इस दिन सीएम की व्यस्तता रहती है। मगर, कमेटी ने तय किया है कि सीएम को आमंत्रित किया जाए, जिससे दशहरा मेला की भव्यता और बढ़ सके।
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पश्चिमी उत्तर प्रदेश की प्रसिद्ध सरयू पार रामलीला की तैयारियां पूरी हो गई हैं। स्वतंत्रता से पूर्व लगभग सौ साल पहले इस रामलीला का श्रीगणेश हुआ था। उस समय माइक लाइट साउंड आदि की व्यवस्था नहीं थी। इसलिए कलाकार मूक अभिनय करते थे, मगर उनका भावपूर्ण अभिनय इतना मुखर होता था कि उसे देखकर दर्शक गदगद हो जाते थे। इस बार श्री रामलीला महोत्सव 19 सितंबर से सात अक्तूबर तक चलेगा।
यह है इतिहास
श्री रामलीला गौशाला कमेटी और महोत्सव के अध्यक्ष विमल अग्रवाल के अनुसार 1963 में जन्म से पहले अचल ताल पर रामलीला होती थी। पिता स्व. बालकिशन अग्रवाल रामलीला कमेटी के अध्यक्ष रहे। समाजसेवी और पत्रकार महेश सुहृद ने भी अध्यक्ष पद की कमान संभाली, जो भी अध्यक्ष बना उसने धीरे-धीरे रामलीला महोत्सव में नवाचार किया। विमल अग्रवाल ने बताया कि महोत्सव में शुरुआती दौर में दर्शकों का सैलाब उमड़ता था। गांवों से बड़ी संख्या में दर्शक आया करते थे। 70 के दशक में स्थिति यह थी कि दर्शकों को संभालना मुश्किल पड़ जाता था। कलाकारों के मंचन पर पूरा परिसर जय श्री राम के जयघोष से गूंज उठता था।
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10 साल से महिला पात्र कर रहीं मंचन
यहां रामलीला में करीब 10 वर्षों से महिला कलाकार भी मंचन कर रही हैं। मंच पर उनका अभिनय देखते ही बनता है। राम वन गमन, सीता हरण आदि लीलाओं का मंचन देख दर्शक भाव से भर उठते हैं। वहीं, अचल सरोवर में नौका डालकर प्रभु श्री राम को नौका पार कराया जाता था। वनवास का यह दृश्य देखकर दर्शकों की अश्रुधारा बह निकलती है। अब रामलीला हाईटेक हो गई है और महोत्सव की भव्यता और बढ़ गई है। इस बार श्री आदर्श रामलीला मंडल मथुरा की कमेटी रामलीला का मंचन करेगी।
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सरयू पार लीला पर असमंजस की स्थिति
महोत्सव के अध्यक्ष विमल अग्रवाल ने बताया कि स्मार्ट सिटी के तहत चल रहे काम के चलते इस बार सरयू पार लीला असमंजस में है। हालांकि उन्होंने प्रशासन, नगर निगम, नगर आयुक्त को इस बारे में पत्र लिखा है।
मुख्यमंत्री योगी को भी बुलावा
विमल अग्रवाल के अनुसार दशहरा पर इस बार मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को बुलाने की तैयारी चल रही है। हालांकि इस दिन सीएम की व्यस्तता रहती है। मगर, कमेटी ने तय किया है कि सीएम को आमंत्रित किया जाए, जिससे दशहरा मेला की भव्यता और बढ़ सके।

अचलताल स्थित रामलीला ग्राउंड में रामलीला की तैयारियां शुरू। - फोटो : CITY OFFICE