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रामलीला की धूम के बीच होगी कान्हा की लीला
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बृज मंडल में स्थित अलीगढ़ में रामलीला मंचन के साथ-साथ श्री कृष्ण लीला की तैयारियां जोरों पर हैं। शहर की प्रसिद्ध श्री कृष्ण लीला इस बार 50वें वर्ष में प्रवेश कर रही है। इसलिए स्वर्ण जयंती वर्ष पर महोत्सव धूमधाम से मनाए जाने की तैयारी है। इस बार पद्मश्री पंडित श्रीराम शर्मा आचार्य की मंडली 24 सितंबर से श्रीकृष्ण लीला का मंचन करेगी। आयोजन समिति का कहना है कि वर्षों से श्रीकृष्ण लीला मंचन की परंपरा का निर्वहन करते आए हैं। इस बार इसे और जीवंत व भव्य बनानेे का प्रयास होगा।
अलीगढ़ में श्री कृष्ण लीला की शुरुआत वर्ष 1971 में हुई थी। रामलीला कमेटी के कुछ पदाधिकारियों से विवाद होने के बाद कुछ लोग अलग हो गए थे। उन्होंने दशहरा के ही समय श्री कृष्ण लीला की शुरुआत की थी। आगरा रोड स्थित चिरंजीलाल कन्या इंटर कॉलेज के परिसर में श्री कृष्ण लीला की शुरुआत हुई।
चंदा जुटाना होता था मुश्किल
श्री कृष्ण लीला संस्थान के संस्थापक प्रेम प्रकाश माहेश्वरी बोहरे का कहना है कि उस समय चंदा जुटाना बड़ा मुश्किल होता था, क्योंकि रामलीला चल रही होती थी। ऐसे में लोग जब श्री कृष्ण लीला के मंचन की बात सुनते थे तो चौक जाते थे। उस समय चार आना, आठ आना चंदा मिलता था, जब लोग लीला देखने पहुंचे तो वाहवाही करते दिखे। इसके बाद यहां पर दर्शकों की भीड़ जुटनी शुरू हो गई। हर तरफ चर्चा होने लगी। गांवों से भी बड़ी संख्या में दर्शक श्री कृष्ण लीला देखने आने लगे।
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श्रीराम शर्मा आचार्य की मंडली ने दी नई पहचान
देश और दुनिया में श्री कृष्ण लीला को पहचान दिलाने वाले पद्मश्री श्रीराम शर्मा आचार्य ने अलीगढ़ में मंचन को भव्य स्वरूप दिया। भले ही आज वह इस दुनिया में नहीं हैं लेकिन उनके पुत्र पंडित कुंज बिहारी शर्मा मंडली की कमान संभाले हैं। इस बार वह कलाकारों के साथ आ रहे हैं।
चैतन्य महाप्रभु की लीला भी है विशेष आकर्षण
श्री कृष्ण लीला संस्थान की ओर से चैतन्य महाप्रभु की भी लीला होती है। रात में श्री कृष्ण लीला का मंचन होता है तो सुबह चैतन्य महाप्रभु की लीला होती है। सुबह करीब 6 बजे से लीला प्रारंभ हो जाती है। मंचन इतना भावपूर्ण होता है कि दर्शकों की आंखें छलक उठती हैं। भावविभोर होकर तमाम दर्शक नृत्य करने लगते हैं। भक्ति और आनंद का यह क्षण बस देखते ही बनता है।
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अलीगढ़ में श्री कृष्ण लीला की शुरुआत वर्ष 1971 में हुई थी। रामलीला कमेटी के कुछ पदाधिकारियों से विवाद होने के बाद कुछ लोग अलग हो गए थे। उन्होंने दशहरा के ही समय श्री कृष्ण लीला की शुरुआत की थी। आगरा रोड स्थित चिरंजीलाल कन्या इंटर कॉलेज के परिसर में श्री कृष्ण लीला की शुरुआत हुई।
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चंदा जुटाना होता था मुश्किल
श्री कृष्ण लीला संस्थान के संस्थापक प्रेम प्रकाश माहेश्वरी बोहरे का कहना है कि उस समय चंदा जुटाना बड़ा मुश्किल होता था, क्योंकि रामलीला चल रही होती थी। ऐसे में लोग जब श्री कृष्ण लीला के मंचन की बात सुनते थे तो चौक जाते थे। उस समय चार आना, आठ आना चंदा मिलता था, जब लोग लीला देखने पहुंचे तो वाहवाही करते दिखे। इसके बाद यहां पर दर्शकों की भीड़ जुटनी शुरू हो गई। हर तरफ चर्चा होने लगी। गांवों से भी बड़ी संख्या में दर्शक श्री कृष्ण लीला देखने आने लगे।
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श्रीराम शर्मा आचार्य की मंडली ने दी नई पहचान
देश और दुनिया में श्री कृष्ण लीला को पहचान दिलाने वाले पद्मश्री श्रीराम शर्मा आचार्य ने अलीगढ़ में मंचन को भव्य स्वरूप दिया। भले ही आज वह इस दुनिया में नहीं हैं लेकिन उनके पुत्र पंडित कुंज बिहारी शर्मा मंडली की कमान संभाले हैं। इस बार वह कलाकारों के साथ आ रहे हैं।
चैतन्य महाप्रभु की लीला भी है विशेष आकर्षण
श्री कृष्ण लीला संस्थान की ओर से चैतन्य महाप्रभु की भी लीला होती है। रात में श्री कृष्ण लीला का मंचन होता है तो सुबह चैतन्य महाप्रभु की लीला होती है। सुबह करीब 6 बजे से लीला प्रारंभ हो जाती है। मंचन इतना भावपूर्ण होता है कि दर्शकों की आंखें छलक उठती हैं। भावविभोर होकर तमाम दर्शक नृत्य करने लगते हैं। भक्ति और आनंद का यह क्षण बस देखते ही बनता है।