फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Aligarh News ›   Raja Mahendra Pratap singh

32 साल तक दुनिया की खाक छानते रहे 'राजा'

Mon, 16 Sep 2019 01:06 AM IST
Aligarh Bureau अलीगढ़ ब्यूरो
Updated Mon, 16 Sep 2019 01:06 AM IST
विज्ञापन
Raja Mahendra Pratap singh
डॉ. अनूप शर्मा। - फोटो : CITY OFFICE
कौशल कुमार ओझा
विज्ञापन

राजा महेंद्र प्रताप सिंह ने हिंदुस्तान को अंग्रेजी शासन से मुक्ति दिलाने के लिए 31 साल 8 महीने तक दुनिया की खाक छानते रहे। उनके ‘प्रताप’ का अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है कि उनका नाम नोबल शांति पुरस्कार के लिए प्रस्तावित किया गया था। यंग इंडिया में महात्मा गांधी ने ‘राजा’ को महान देशभक्त बताया था। शिक्षा की अलख जगाने के लिए उन्होंने शैक्षणिक संस्थानों को जमीन दी थी।
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने राजा महेंद्र प्रताप सिंह (जन्म 1889/मृत्यु 1979) के नाम पर अलीगढ़ में राज्य विश्वविद्यालय स्थापित करने की घोषणा की है। उसके बाद एक बार फिर राजा महेंद्र प्रताप सिंह के ‘प्रताप’ की चर्चा शुरू हो गई है। 20 साल पहले (1999) ‘भारतीय स्वतंत्रता आंदोलन में राजा महेंद्र प्रताप की भूमिका’ विषय पर पीएचडी करने वाले विद्या सदन इंटर कॉलेज चौधाना, खैर के प्रधानाचार्य डॉ. अनूप शर्मा ने बताया कि अफगानिस्तान में अंतरिम सरकार बनाने वाले राजा महेंद्र प्रताप सिंह का नाम 1932 में नोबल शांति पुरस्कार के लिए नामित किया गया था। राजा महेंद्र प्रताप सिंह ने अपनी संपत्ति शिक्षा का अलख जगाने के लिए दान कर दिया था और वृंदावन में तकनीकी कॉलेज की स्थापना की। वह कहते हैं कि भारत में ब्रिटिश निर्दयता की कहानी वे पूरी दुनिया में पहुंचाना चाहते थे।
विज्ञापन

डॉ. अनूप शर्मा कहते हैं कि 20 दिसंबर 1914 को वे बुद्ध की तरह बीवी-बच्चों को छोड़कर घर से निकले थे। पहले जर्मनी एवं उसके बाद अफगानिस्तान पहुंचे। अफगानिस्तान में 1 दिसंबर 1915 को अंतरिम सरकार की स्थापना कर स्वयं राष्ट्रपति एवं मो. बरकतुल्ला को प्रधानमंत्री बनाया। अंग्रेजी शासन से मुक्ति दिलाने के लिए 31 वर्ष 8 महीने तक दुनिया की खाक छानते रहे। अफगानिस्तान एवं जर्मनी से संधि किया ताकि अंग्रेजों पर हमला बोला जाए। डॉ. अनूप शर्मा कहते हैं कि राजा महेंद्र प्रताप के साथ अन्याय हुआ है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने उनके नाम पर विश्वविद्यालय स्थापित करने की घोषणा कर सच्ची श्रद्धांजलि अर्पित की है। उनके ऊपर शोध होना चाहिए।
विज्ञापन
विज्ञापन

भाईचारे के लिए बन गए ‘पीटर पीर प्रताप’
डॉ. अनूप शर्मा कहते हैं कि राजा महेंद्र प्रताप सिंह ने हिंदू, मुस्लिम एवं ईसाई के बीच भाईचारा के लिए अपना नाम बदलकर ‘पीटर पीर प्रताप’ रख लिया था। उन्होंने सर्वधर्म प्रार्थना (ओम देव प्रेम अल्लाह जिहोवा सब जगह तू ही तू है...) भी तैयार किया था। कालीचरण नामक दलित व्यक्ति को पुजारी बनाया था। राजा महेंद्र प्रताप ने महात्मा गांधी से पहले छूआछूत के खिलाफ अभियान चलाया था और अल्मोड़ा में दलितों के साथ भोजन किया था।
विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed