नहर में थूकने पर सजा : सिंचाई विभाग आज भी मुगल बादशाह अकबर के जमाने से चल रहा, कानून हैं अंग्रेजों वाले
शायद आपको पता न हो, लेकिन जल निकास अधिनियम-1873 के तहत नहर, रजबहा और माइनर में थूकना तक अपराध की श्रेणी में हैं। इसका बाकायदा मुकदमा दर्ज किया जा सकता है।
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केंद्र और प्रदेश की भाजपा सरकार ने गुलामी की निशानियां हटाने के लिए कई शहरों और कस्बों के पुराने नाम बदल दिए, लेकिन सिंचाई विभाग में आज भी मुगलकाल की तारीखों का इस्तेमाल जारी है। विभाग के फसली वर्ष की गिनती मुगल सम्राट अकबर के जमाने की तारीखों से हो रही है। यही नहीं 153 वर्ष पुराने अंग्रेजों के जमाने के कानून आज तक इस विभाग में लागू हैं।
इस वक्त खरीफ के सीजन का फसली वर्ष 1434 चल रहा है। जिसकी शुरुआत मुगल काल में अकबर के वित्तमंत्री राजा टोडरमल द्वारा की गई थी। इसका इस्तेमाल किसानों से नियमित लगान वसूलने और कृषि कार्यों की निगरानी के लिए किया जाता था। यह ग्रेगोरियन कैलेंडर ( जनवरी से शुरू होने वाला वर्ष) से 592 वर्ष पीछे चलता है। उदाहरण के लिए वर्ष 2026 से 592 वर्ष घटाने पर फसली वर्ष 1434 आता है।
गौर हो कि सन् 1862 में ब्रिटिश काल में लागू हुई भारतीय दंड संहिता (आईपीसी) 162 साल बाद, वर्ष 2024 में भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस) में बदल चुकी है, लेकिन इस विभाग में आज भी 153 वर्ष पुराने अंग्रेजों द्वारा बनाए गए कानून लागू हैं। उत्तरी भारत नहर और जल निकास अधिनियम-1873 और कैनाल एक्ट-1873 के तहत मामले दर्ज हो रहे हैं, सुनवाई कर जुर्माना भी लगाया जा रहा है। अलीगढ़ में वर्तमान में इन दोनों एक्ट के लगभग 129 मामलों की सुनवाई चल रही है।
नहर में थूकना भी अपराध
शायद आपको पता न हो, लेकिन जल निकास अधिनियम-1873 के तहत नहर, रजबहा और माइनर में थूकना तक अपराध की श्रेणी में हैं। इसका बाकायदा मुकदमा दर्ज किया जा सकता है। इसके अलावा नहरों को प्रदूषित करने, कचरा डालने, कुलावा लगाने, कट लगाने, बंधा बनाने या सरकारी जमीन पर बुर्जी बिटौरे बनाने से संबंधित मामलों की सुनवाई उक्त अधिनियम में होती है। दोषी पाए जाने पर छह महीने की कैद, 5,000 से लेकर 50,000 तक जुर्माना, या दोनों हो सकते हैं। शुरुआती दौर में जुर्माने की रकम 100 रुपये थी।
ऐसे होती है सुनवाई
- उत्तरी भारत नहर और जल निकास अधिनियम-1873 के अंतर्गत स्पेशल जूडिशियल मजिस्ट्रेट (उप राजस्व अधिकारी) प्रथम एवं द्वितीय की दो अदालतों में वर्तमान में लगभग 120 मामलों की सुनवाई हो रही है।
- सींचपाल शिकायत दर्ज करते हैं, जिलेदार जांचकर साक्ष्य जुटाते हैं। एई बताते हैं कि मुकदमा हो या नहीं, एक्सईएन मुकदमे की स्वीकृति देते हैं। स्पेशल जूडिशियल मजिस्ट्रेट की अदालत में सुनवाई होती है।
- यदि जुर्माना लगाया जाता है, तो उसे भू-राजस्व (लैंड रेवेन्यू) की तरह वसूल किया जाता है। संबंधित आरोपी अपने वकील के माध्यम से अपना पक्ष रखते हैं।
कैनाल एक्ट-1873 में चल रहे नौ मामले
सिंचाई विभाग में कैनाल एक्ट-1873 भी हैं। इसके तहत सरकारी नलकूपों के आसपास बुर्जी बिटौरे बनाने और जमीन पर कब्जा करने के मामलों की सुनवाई होती है। अलीगढ़ के नलकूप खंड प्रथम में 520 और खंड द्वितीय में 343 सरकारी नलकूप हैं। स्पेशल जूडिशियल मजिस्ट्रेट की अदालत में ऐसे नौ मामलों की सुनवाई हो रही है।