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पं. दीनदयाल चिकित्सालय में नौ डॉक्टरों के जिम्मे ढाई हजार मरीज
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दीनदयाल उपाध्याय संयुक्त चिकित्सालय के ओपीडी में दिखाने के लिए उमड़ी मरीजों की भीड़।
- फोटो : CITY OFFICE
पंडित दीन दयाल संयुक्त चिकित्सालय में एक सप्ताह से करीब 2500 मरीजों का इलाज मुख्य चिकित्सा अधीक्षक (सीएमएस) सहित नौ डाक्टर कर रहे हैं। यही डाक्टर ओपीडी में मरीजों को देख रहे हैं और जरूरत पड़ने पर आपरेशन भी करते हैं। यह स्थिति यहां के आठ डाक्टरों को दूसरे जिलों में तबादला होने के कारण हुई है। अब यह डाक्टर अपना तबादला रुकवाने के लिए राज नेताओं के यहां जुगाड़ लगा रहे हैं। जबकि इनके स्थान पर दूसरे जिलों से इस अस्पताल में डाक्टरों की तैनाती नहीं की गई है।
दीन दयाल संयुक्त चिकित्सालय में डाक्टरों के 32 पद स्वीकृत हैं। दस दिन पहले तक यहां सीएमएस के अलावा 16 डाक्टर तैनात थे, इनमें से आठ डाक्टरों का तबादला दूसरे जिलों के लिए कर दिया गया। इसी के बाद से आठ डाक्टर अवकाश पर चले गए हैं। जिनके कारण ओपीडी में डाक्टर नहीं हैं, जिन मरीजों की आपरेशन की तारीख तय हो गई थी, उनके आपरेशन टालने पड़ रहे हैं। सुबह साढ़े सात बजे से सीएमएस सहित नौ डाक्टर शाम चार बजे तक मरीजों को देख रहे हैं।
जिन डाक्टरों का तबादला दूसरे जिलों में कर दिया गया है। इनमें नेत्र रोग विशेषज्ञ अमित सिंह, ग्यास खान, दंत रोग विशेषज्ञ श्वेता रानी, ह्रदय रोग विशेषज्ञ एसके सिंघल, रेडियोलॉजिस्ट जगमोहन शर्मा, ऑर्थो एसके उपाध्याय, महिला रोग विशेषज्ञ वंदना पाण्डेय, मेडिकल ऑफिसर व स्त्री रोग विशेषज्ञ रश्मि चौधरी हैं।
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सीएमएस अपने स्तर से मरीजों के उपचार के काफी प्रयास कर रहे हैं। लेकिन मरीजों की बढ़ती संख्या और डाक्टरों की कमी के कारण अव्यवस्था होना स्वभाविक है। ऐसे में औसतन 200 मरीज बिना इलाज के वापस जा रहे हैं। उन्हीं से काफी मरीज निजी अस्पतालों में जाकर महंगे इलाज कराने को मजबूर हैैं। इतना ही नहीं अस्पताल में जो भी चिकित्सक तैनात हैैं। उनमें भी कई की ड्यूटी सरकार के अभियानों में लगा दी जाती है।
इन दिनों भीषण गर्मी में सबसे अधिक मरीज आंख, सर्दी, जुकाम, वायरल फ ीवर, पेट दर्द एवं दस्त के आ रहे हैं। ऐसे मरीजों की संख्या लगातार बढ़ती जा रही है। मौजूदा हालात में दो फिजीशियन पर पूरा अस्पताल टिका हुआ है । वही डॉक्टर ओपीडी भी देखे और वार्डों में भर्ती मरीजों को देख रहे है । जिसका असर मरीजों पर पड़ रहा। स्थिति यह है कि कम डाक्टर होने के कारण ओपीडी में ठीक से मरीज नहीं देखे जा रहे हैं और न ही वार्डोँ में भर्ती मरीजों का इलाज हो पा रहा है।
मरीज बोले
- तीन दि से लगातार ओपीडी में दिखाने के लिए आ रही हॅू लेकिन डॉक्टर न होने की वजह वापस लौटना पड़ रहा है। कृष्ण प्यारी, हरदुआगंज
-सरकारी अस्पताल सिर्फ दिखावे के लिए बनाया गया है जब भी आती तो वार्ड ब्याय बोलता है डॉक्टर वार्ड में गये है, कई बाद तक डॉक्टर वार्ड से वापस ही नहीं आते हैं। मीरा देवी, डिवाई
- हम डॉक्टर को दिखाने आये तो पता चला कि आज डॉक्टर ही नही आए और बिना इलाज के वापस लौटना पड़ रहा है। काजल, मिथिलापुरी
- डॉक्टरों के तबादले के बाद परेशानी बढ़ी है। आठ डॉक्टरों का तबादला कर दिया गया है। इनके बदले में अभी एक भी डॉक्टर नही मिले हैं। इसके बाद भी मरीजों का इलाज किया जा रहा है। डॉ अनुपम भास्कर सीएमएस डीडीयू अस्पताल
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दीन दयाल संयुक्त चिकित्सालय में डाक्टरों के 32 पद स्वीकृत हैं। दस दिन पहले तक यहां सीएमएस के अलावा 16 डाक्टर तैनात थे, इनमें से आठ डाक्टरों का तबादला दूसरे जिलों के लिए कर दिया गया। इसी के बाद से आठ डाक्टर अवकाश पर चले गए हैं। जिनके कारण ओपीडी में डाक्टर नहीं हैं, जिन मरीजों की आपरेशन की तारीख तय हो गई थी, उनके आपरेशन टालने पड़ रहे हैं। सुबह साढ़े सात बजे से सीएमएस सहित नौ डाक्टर शाम चार बजे तक मरीजों को देख रहे हैं।
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जिन डाक्टरों का तबादला दूसरे जिलों में कर दिया गया है। इनमें नेत्र रोग विशेषज्ञ अमित सिंह, ग्यास खान, दंत रोग विशेषज्ञ श्वेता रानी, ह्रदय रोग विशेषज्ञ एसके सिंघल, रेडियोलॉजिस्ट जगमोहन शर्मा, ऑर्थो एसके उपाध्याय, महिला रोग विशेषज्ञ वंदना पाण्डेय, मेडिकल ऑफिसर व स्त्री रोग विशेषज्ञ रश्मि चौधरी हैं।
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सीएमएस अपने स्तर से मरीजों के उपचार के काफी प्रयास कर रहे हैं। लेकिन मरीजों की बढ़ती संख्या और डाक्टरों की कमी के कारण अव्यवस्था होना स्वभाविक है। ऐसे में औसतन 200 मरीज बिना इलाज के वापस जा रहे हैं। उन्हीं से काफी मरीज निजी अस्पतालों में जाकर महंगे इलाज कराने को मजबूर हैैं। इतना ही नहीं अस्पताल में जो भी चिकित्सक तैनात हैैं। उनमें भी कई की ड्यूटी सरकार के अभियानों में लगा दी जाती है।
इन दिनों भीषण गर्मी में सबसे अधिक मरीज आंख, सर्दी, जुकाम, वायरल फ ीवर, पेट दर्द एवं दस्त के आ रहे हैं। ऐसे मरीजों की संख्या लगातार बढ़ती जा रही है। मौजूदा हालात में दो फिजीशियन पर पूरा अस्पताल टिका हुआ है । वही डॉक्टर ओपीडी भी देखे और वार्डों में भर्ती मरीजों को देख रहे है । जिसका असर मरीजों पर पड़ रहा। स्थिति यह है कि कम डाक्टर होने के कारण ओपीडी में ठीक से मरीज नहीं देखे जा रहे हैं और न ही वार्डोँ में भर्ती मरीजों का इलाज हो पा रहा है।
मरीज बोले
- तीन दि से लगातार ओपीडी में दिखाने के लिए आ रही हॅू लेकिन डॉक्टर न होने की वजह वापस लौटना पड़ रहा है। कृष्ण प्यारी, हरदुआगंज
-सरकारी अस्पताल सिर्फ दिखावे के लिए बनाया गया है जब भी आती तो वार्ड ब्याय बोलता है डॉक्टर वार्ड में गये है, कई बाद तक डॉक्टर वार्ड से वापस ही नहीं आते हैं। मीरा देवी, डिवाई
- हम डॉक्टर को दिखाने आये तो पता चला कि आज डॉक्टर ही नही आए और बिना इलाज के वापस लौटना पड़ रहा है। काजल, मिथिलापुरी
- डॉक्टरों के तबादले के बाद परेशानी बढ़ी है। आठ डॉक्टरों का तबादला कर दिया गया है। इनके बदले में अभी एक भी डॉक्टर नही मिले हैं। इसके बाद भी मरीजों का इलाज किया जा रहा है। डॉ अनुपम भास्कर सीएमएस डीडीयू अस्पताल