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Aligarh News: श्रीराम मंदिर को बेटे के बलिदान पर गर्व, शव नहीं मिलने का अफसोस
Fri, 12 Jan 2024 12:30 AM IST
अलीगढ़ ब्यूरो
अमर उजाला नेटवर्क, अलीगढ़
अमर उजाला नेटवर्क, अलीगढ़
Published by: अलीगढ़ ब्यूरो
Updated Fri, 12 Jan 2024 12:30 AM IST
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बलिदानी भगवान सिंह की लगी प्रतिमा
- फोटो : संवाद
गोंडा ब्लॉक के गांव अतुर्रा नगला बलराम निवासी भगवान सिंह श्रीराम मंदिर के लिए हुई कार सेवा के दौरान गोली लगने से बलिदान हो गए थे। वह दिन 2 नवंबर 1990 का दिन था, परिवार को उनके अंतिम दर्शन तक नहीं हो सके थे। उनकी 92 वर्षीय माता शीश कौर ने बताया कि श्रीराम मंदिर आंदोलन में बेटा भगवान सिंह अयोध्या में बलिदान हो गया था। बेटे के बलिदान पर गर्व है लेकिन अफसोस है कि उसके अंतिम दर्शन नहीं हुए। अब उसका सपना 34 वर्ष बाद पूरा हो रहा है, उस समय उसकी उम्र महज 24 वर्ष थी।
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शीश कौर कहतीं हैं कि उनका बेटा श्रीराम के चरणों में समर्पित हो गया था। वह शव प्राप्त करने के लिए तत्कालीन अधिकारियों के दर दर पर भटकती रहीं, लेकिन शव का आज तक पता नहीं चल सका। श्रीराम मंदिर बनने पर वह और उनका परिवार बेहद खुश है। उनकी मांग सिर्फ इतनी सी है कि श्रीराम मंदिर पर भगवान सिंह का नाम भी शिलापट्टिका पर लिखा जाए।
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जिन कारसेवकों की जान गई, उन सबका नाम इसमें लिखा जाए। उन्हें भी श्रीराम के दर्शन करने के लिए अयोध्या जाने का सौभाग्य मिले। खेती करने वाले जवाहर सिंह के तीन बेटों में भगवान सिंह सबसे छोटे थे। भगवान सिंह ने 1988 तक सादाबाद में संघ प्रचारक के रूप में कार्य किया। संघ की शाखा व शिविरों में कार्य करते रहे। विवाह के लिए मना कर जीवन देश को समर्पित कर दिया। मां ने कहा कि बेटे ने श्री राम के चरणों में जान का समर्पण कर उन्हें धन्य कर दिया।
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गांव का मुख्य मार्ग भगवान सिंह के नाम पर हो
परिवार में उनके भाई नेपाल सिंह, भतीजे अशोक कुमार व पवन कुमार ने बताया कि परिवार ने भगवान सिंह की प्रतिमा की स्थापना की। जिसका लोकार्पण प्रदेश के तत्कालीन लोक निर्माण मंत्री कलराज मिश्र द्वारा 2 नवंबर 1997 को किया गया था। लेकिन इसके बाद किसी ने लौट कर नहीं देखा कि स्मारक स्थल पर गंदगी का अंबार रहता है। उन्होंने कहा कि एक इगलास मार्ग पर ग्राम मुरवार से गांव को जाने वाले मार्ग का नाम भगवान सिंह के नाम पर रखा जाए। जर्जर मार्ग का पुन: निर्माण कराया जाए।