शेखा झील का नाम बदला तो अनशन
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शेखाझील को बर्ड सेंचुरी बनाये जाने के बाद उसके नए नामकरण को लेकर उपजा विवाद थम नहीं रहा, शेखाझील क्षेत्र विकास समिति के समूचे क्षेत्र के प्रतिनिधि ग्रामीणों ने मंगलवार दोपहर शेखा गांव में चौपाल का आयोजन किया। सभी अलग अलग गांव के ग्रामीणों के विचार जाने, कार्यक्रम में महिलाओं ने भी बढ़ चढ़कर हिस्सा लिया तथा शेखाझील पक्षी विहार के नाम की वकालत करते हुए अपनी सहमति जताई।
समिति के संयोजक संतोष सिंह ने कहा कि जिस प्रकार भरतपुर का घाना पक्षी विहार तथा एटा का पटना पक्षी विहार अपने क्षेत्र के नाम से जाना जाता है, ठीक उसी प्रकार जलाली क्षेत्र की शेखाझील को भी शेखाझील पक्षी विहार के रूप में ही पहचाना जाना चाहिए, जोकि वास्तव में इस क्षेत्र की अमूल्य धरोहर है, और जिसकी सुरक्षा और देखभाल के लिए क्षेत्रवासी भी सदैव तत्पर रहते हैं, हालांकि वह भारत के पहले पक्षी वैज्ञानिक डॉ सालिम अली का सम्मान करते हैं, जिसके लिए वह विभाग से चाहते हैं कि झील में बने हुए या नए बनाए जाने वाले पक्षी अनुसंधान केंद्र का नाम को डा.ॅ सालिम अली के नाम पर रख लिया जाए।
चौपाल में गांव शेखा के रामप्रसाद, गणेशपाल सिंह, भवनखेडा के मास्टर भोला सिंह, अलहदादपुर के राकेश सिंह तथा शेखा की चंद्रवती, दानवती ने कहा कि झील के नाम से छेड़छाड़ को बर्दाश्त नहीं करेंगे चाहे इसके लिए आमरण अनशन ही क्यों न करना पडे़। इस दौरान वर्तमान प्रधान रणवीर सिंह, प्रदीप सिंह, धर्मपाल सिंह, सुरेश पाल सिंह, महीपाल सिंह, मुकेश, विनोद, पुष्पा देवी, ममता, रुकमा, मंजू देवी, नीतू तथा चंचल सहित एदलपुर, नगरियाभूड, अलहदादपुर, जिरौली हीरासिंह, दौलतपुर, दुम्हैरा, बहादुरगढी तथा नंदलालपुर गांव के लोग मौजूद रहे।