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...तो बिना गलती प्रो. तारिक एवं अहमद अली हो गए अयोग्य

Thu, 07 Apr 2016 02:07 AM IST
ब्यूराे/अमर उजाला,अलीगढ़
ब्यूराे/अमर उजाला,अलीगढ़ Updated Thu, 07 Apr 2016 02:07 AM IST
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Pro without fault . Tariq and Ahmed Ali were unfit
अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय
नए वीसी के चयन के लिए दो अप्रैल को आयोजित एएमयू एग्जीक्यूटिव काउंसिल की विशेष बैठक में मतदान करने के कारण पद के प्रबल दावेदार माने जा रहे जेएन मेडिकल कॉलेज के प्राचार्य प्रो. तारिक मंसूर एवं सह कुलपति सैयद अहमद अली को अयोग्य घोषित कर दिया गया। अब यह सवाल उठने लगा है कि क्या बिना गलती दोनों दावेदारों को अयोग्य घोषित किया गया।
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 मानव संसाधन विकास मंत्रालय की गाइड लाइन थी तो ईसी की बैठक में सदस्यों को उससे अवगत क्यों नहीं कराया गया। कुलपति को यह तय करना चाहिए कि यूनिवर्सिटी की बदनामी एवं पैनल रद्द होने के पीछे वास्तविक जिम्मेदार कौन है। एएमयू के ईसी सदस्य डॉ. मो. इलियास खान का कहना है कि इसके लिए सर्वाधिक जिम्मेदार रजिस्ट्रार सचिवालय है, जिसने मंत्रालय की गाइड लाइन से ईसी को अवगत नहीं कराया
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। डॉ. इलियास सदन से तथ्य छुपाने के मामले में वीसी पद के दावेदार डॉ. हसनैन को भी लपेटे में ले रहे हैं। उनका आरोप है कि जब उनको गाइड लाइन की जानकारी थी और उन्होंने मतदान में हिस्सा नहीं लिया तो पूरी जानकारी ईसी सदस्यों को क्यों नहीं दी। अगर जानकारी मिल जाती तो प्रो. तारिक मंसूर और अहमद अली भी अपने को वोटिंग से अलग कर सकते थे।
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  डॉ. इलियास का कहना है कि 2 अप्रैल को रात्रि दो बजे मंत्रालय के एक अधिकारी के माध्यम से उन्हें 12 मार्च 2015 की गाइड लाइन प्राप्त हुई। यदि यह गाइड लाइन उन्हें पहले प्राप्त हो गई होती तो यह दुर्दिन नहीं देखने पड़ते। कुछ ईसी सदस्य भी कह रहे हैं कि विश्वविद्यालय प्रशासन द्वारा जब गाइड लाइन की जानकारी नहीं दी गई तो मतदान में हिस्सा लेने वाले दावेदारों को कैसे अयोग्य ठहराया जा सकता है।

 कई लोग तो इस पूरे प्रकरण पर लीगल ओपिनियन ले रहे हैं, ताकि इंतजामिया को घेरा जा सके। एएमयू कोर्ट की बैठक स्थगित किए जाने, दो दावेदारों  को   अयोग्य करार दिए जाने तथा     नया पैनल बनाने के फैसले से यूजीसी को अवगत करा दिया    गया है। चर्चा तो यह भी इस   संबंध में मंत्रालय को अलग से भी एक पत्र लिखा गया है। हालांकि इसकी अधिकारिक पुष्टि अभी कोई नहीं कर रहा है। रजिस्ट्रार से कोशिश के बावजूद बातचीत नहीं हो सकी।


उल्लेखनीय है कि 2 अप्रैल को एएमयू ईसी की विशेष बैठक आयोजित की गई थी, जिसमें एएमयू के नए कुलपति के लिए पांच नामों का पैनल बनाया गया था। इस बैठक में मानव संसाधन विकास मंत्रालय के उच्च शिक्षा विभाग द्वारा 12 मार्च 2015 के गाइड लाइन का खुला उल्लंघन किया गया। गाइड लाइन में     साफ-साफ लिखा गया है कि कुलपति पद की दावेदारी करने वाले ईसी के सदस्य या कुलपति सर्च कमेटी द्वारा चयनित वीसी नियुक्ति से संबंधित ईसी    की बैठक में शामिल नहीं  हो सकते। शामिल होने की    स्थिति में अयोग्य घोषित कर दिया जाएगा।
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