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खेती बाड़ी: अच्छी पैदावार के लिए समय से करें खेतों की तैयारी, जुलाई में पूरी कर लें धान की रोपाई

Fri, 09 Jun 2023 03:04 AM IST
चमन शर्मा रिंकू शर्मा, अमर उजाला, अलीगढ़
रिंकू शर्मा, अमर उजाला, अलीगढ़ Published by: चमन शर्मा Updated Fri, 09 Jun 2023 03:04 AM IST
सार

खेती में फसल चक्र आवश्यक रूप से अपनाएं, ताकि उत्पादन में निरंतरता बनी रहे। खाली खेतों की गर्मी की जुताई अवश्य की जाए, जिससे सूरज की रोशनी से खरपतवार के बीज एवं हानिकारक कीट पतंगे लाखा, प्यूपा जो भूमि के अंदर छिपे रहते है नष्ट होते हैं।

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Prepare the fields in time for good yield
खेती - फोटो : Social Media

विस्तार

अलीगढ़ के जिला कृषि अधिकारी अभिनंदन सिंह ने जिले के कृषकों को आगामी खरीफ वर्ष 2023 में खेतों की तैयारी के लिए सुझाव दिए हैं। उन्होंने कहा कि अच्छे उत्पादन के लिए समय से खेतों की तैयारी करें। खेती में समय का अधिक महत्व है। खरीफ सीजन की मुख्य फसल धान की रोपाई किसानों को हर हाल में जुलाई में पूरी कर लेनी चाहिए। इसके बाद इसमें देर होने लगती है। 

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धान की खेती में यूरिया (नाइट्रोजन) की पहली तिहाई मात्रा का प्रयोग रोपाई के 58 दिन बाद करें। जब पौधे अच्छी तरह से जड़ पकड़ चुके हों। जहां रोपाई की जा चुकी हो, उन खेतों में रोपाई के एक सप्ताह बाद खेत में घूमकर देख लें कि कहीं पर पौधे मर न गए हों। जिन स्थानों पर पौधे मर गए हों, उन स्थानों पर नए पौधे जरूर लगा दें। धान की नर्सरी यदि 20-25 दिन की हो गई हो तो तैयार खेतों में धान की रोपाई शुरू करें। पंक्ति से पंक्ति की दूरी 20 सेमी तथा पौध से पौध की दूरी 10 सेमी रखें तो उत्पादन अच्छा होगा। प्रति हेक्टेयर 100 किलोग्राम नाइट्रोजन, 60 किलोग्राम फॉस्फोरस, 40 किलोग्राम पोटाश और 25 किलोग्राम जिंक सल्फेट डालें। 
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जिला कृषि अधिकारी के अनुसार खेती में फसल चक्र आवश्यक रूप से अपनाएं, ताकि उत्पादन में निरंतरता बनी रहे। खाली खेतों की गर्मी की जुताई अवश्य की जाए, जिससे सूरज की रोशनी से खरपतवार के बीज एवं हानिकारक कीट पतंगे लाखा, प्यूपा जो भूमि के अंदर छिपे रहते है नष्ट होते हैं। गहरी जुताई से जो कीट ऊपर आ जाते हैं को पक्षियों द्वारा भक्षण कर नष्ट किया जाता है। धान रोपाई से पूर्व खेतों में ढ़ेंचा हरी खाद के रूप में आवश्यक रूप से बोया जाए, ताकि धान के उत्पादन में बढ़ोत्तरी की जा सके। 
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धान नर्सरी हेतु ऐसे स्थान का चयन करें जहां छाया बनी रहती हो एवं फफूंदी जनित रोगों के बचाव हेतु बायोपेस्टीसाइड से बीज शोधन आवश्यक रूप से करें। मृदा में सूक्ष्म पोषक तत्वों की कमी को दूर करने के लिए जनपद के समस्त राजकीय कृषि बीज भंडारों पर जिप्सम की आपूर्ति की गयी है जो कृषकों को 75 प्रतिशत अनुदान पर वितरित की जाएगी। जिससे मृदा में सुधार होगा और उत्पादन में बढ़ोतरी होगी।
 

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