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जिला अस्पताल में नेत्र रोग एवं ईएनटी ओपीडी शुरू करने की तैयारी
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मलखान सिंह जिला अस्पताल में नेत्र रोग एवं ईएनटी की ओपीडी शुरू करने की तैयारी चल रही है। शासन का निर्देश मिलने के बाद मुख्य चिकित्सा अधिकारी एवं मुख्य चिकित्सा अधीक्षक सक्रिय हो गए हैं। जल्द ही ओपीडी शुरू होने की उम्मीद है।
ब्लैक फंगस (म्यूकोरमाइकोसिस) के बढ़ते मामले को देखते हुए शासन स्तर से जिला अस्पताल में नेत्र रोग एवं ईएनटी की ओपीडी शुरू करने का निर्देश दिया गया है। उद्देश्य यह है कि ब्लैक फंगस के रोगियों की शुरुआती समय में ही पहचान हो जाए। कोरोना कर्फ्यू एवं कोविड अस्पताल बनने के बाद से जिला अस्पताल में सामान्य ओपीडी बंद है।
उत्तर प्रदेश चिकित्सा, स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण विभाग के अपर मुख्य सचिव अमित मोहन प्रसाद ने इससे संबंधित आदेश जारी कर दिया है। मुख्य चिकित्सा अधिकारी एवं मुख्य चिकित्सा अधीक्षक को प्रात: 10 से 12 बजे तक कोविड प्रोटोकॉल के तहत ओपीडी चलाने को निर्देशित किया गया है।
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मुख्य चिकित्सा अधिकारी डॉ. बीपी सिंह कल्याणी ने बताया कि वह जल्द ही मलखान सिंह जिला अस्पताल के सीएमएस से बात कर ओपीडी शुरू कराएंगे। सीएमएस डॉ. रामकिशन ने बताया कि हमारे पास दो नेत्र रोग एवं दो ईएनटी के चिकित्सक हैं। जल्द ही शासन की मंशा के अनुरूप ओपीडी शुरू कर देंगे।
गांधी नेत्र चिकित्सालय से बेहतर समन्वय बनाने पर विचार
ब्लैक फंगस के मरीजों की पहचान में गांधी नेत्र चिकित्सालय मददगार साबित हो सकता है। यहां पर अभी ओपीडी चल रही हैं। सीएमओ डॉ. बीपी सिंह कल्याणी ने बताया कि वह गांधी नेत्र चिकित्सालय से बात कर बेहतर समन्वय बनाने का प्रयास करेंगे।
गांधी नेत्र चिकित्सालय के मधुप लहरी ने बताया कि सोमवार एवं मंगलवार को ओपीडी में 100 से 125 मरीज पहुंचते हैं। अन्य दिनों में 60-70 मरीज आते हैं। कोरोना कर्फ्यू के कारण दूसरे जिले के मरीज काफी कम पहुंच रहे हैं। अस्पताल के नेत्र रोग विशेषज्ञ डॉ. अमित गुप्ता ने बताया कि ब्लैक फंगस के संदिग्ध मरीज यहां भी आते हैं, जिन्हें उपचार के लिए जेएन मेडिकल कॉलेज या दिल्ली भेज दिया जाता है।
ब्लैक फंगस के मरीजों को उपचार देने के लिए टीम की जरूरत होती है, जिसमें ईएनटी, न्यूरो व प्लास्टिक सर्जन आदि विभाग के डॉक्टरों की जरूरत पड़ती है। डॉ. अमित ने बताया कि ब्लैड फंगस की पहचान शुरूआती समय में हो जाए तो व्यक्ति का जीवन एवं आंख की रौशन बचाई जा सकती है। सीएमओ डॉ. बीपी सिंह कल्याणी ने बताया कि गांधी नेत्र चिकित्सालय से बात कर बेहतर समन्वय बनाने का प्रयास करेंगे ताकि ब्लैक फंगस के मरीजों की समय रहते पहचान और उपचार हो सके।
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ब्लैक फंगस (म्यूकोरमाइकोसिस) के बढ़ते मामले को देखते हुए शासन स्तर से जिला अस्पताल में नेत्र रोग एवं ईएनटी की ओपीडी शुरू करने का निर्देश दिया गया है। उद्देश्य यह है कि ब्लैक फंगस के रोगियों की शुरुआती समय में ही पहचान हो जाए। कोरोना कर्फ्यू एवं कोविड अस्पताल बनने के बाद से जिला अस्पताल में सामान्य ओपीडी बंद है।
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उत्तर प्रदेश चिकित्सा, स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण विभाग के अपर मुख्य सचिव अमित मोहन प्रसाद ने इससे संबंधित आदेश जारी कर दिया है। मुख्य चिकित्सा अधिकारी एवं मुख्य चिकित्सा अधीक्षक को प्रात: 10 से 12 बजे तक कोविड प्रोटोकॉल के तहत ओपीडी चलाने को निर्देशित किया गया है।
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मुख्य चिकित्सा अधिकारी डॉ. बीपी सिंह कल्याणी ने बताया कि वह जल्द ही मलखान सिंह जिला अस्पताल के सीएमएस से बात कर ओपीडी शुरू कराएंगे। सीएमएस डॉ. रामकिशन ने बताया कि हमारे पास दो नेत्र रोग एवं दो ईएनटी के चिकित्सक हैं। जल्द ही शासन की मंशा के अनुरूप ओपीडी शुरू कर देंगे।
गांधी नेत्र चिकित्सालय से बेहतर समन्वय बनाने पर विचार
ब्लैक फंगस के मरीजों की पहचान में गांधी नेत्र चिकित्सालय मददगार साबित हो सकता है। यहां पर अभी ओपीडी चल रही हैं। सीएमओ डॉ. बीपी सिंह कल्याणी ने बताया कि वह गांधी नेत्र चिकित्सालय से बात कर बेहतर समन्वय बनाने का प्रयास करेंगे।
गांधी नेत्र चिकित्सालय के मधुप लहरी ने बताया कि सोमवार एवं मंगलवार को ओपीडी में 100 से 125 मरीज पहुंचते हैं। अन्य दिनों में 60-70 मरीज आते हैं। कोरोना कर्फ्यू के कारण दूसरे जिले के मरीज काफी कम पहुंच रहे हैं। अस्पताल के नेत्र रोग विशेषज्ञ डॉ. अमित गुप्ता ने बताया कि ब्लैक फंगस के संदिग्ध मरीज यहां भी आते हैं, जिन्हें उपचार के लिए जेएन मेडिकल कॉलेज या दिल्ली भेज दिया जाता है।
ब्लैक फंगस के मरीजों को उपचार देने के लिए टीम की जरूरत होती है, जिसमें ईएनटी, न्यूरो व प्लास्टिक सर्जन आदि विभाग के डॉक्टरों की जरूरत पड़ती है। डॉ. अमित ने बताया कि ब्लैड फंगस की पहचान शुरूआती समय में हो जाए तो व्यक्ति का जीवन एवं आंख की रौशन बचाई जा सकती है। सीएमओ डॉ. बीपी सिंह कल्याणी ने बताया कि गांधी नेत्र चिकित्सालय से बात कर बेहतर समन्वय बनाने का प्रयास करेंगे ताकि ब्लैक फंगस के मरीजों की समय रहते पहचान और उपचार हो सके।