{"_id":"5f4d56208ebc3e41026f465e","slug":"pranab-mukherjee-was-proud-of-amu-celebrations-city-office-news-ali2426157155","type":"story","status":"publish","title_hn":"एएमयू के समारोह की शान रहते थे प्रणब मुखर्जी","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
एएमयू के समारोह की शान रहते थे प्रणब मुखर्जी
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
भारत के पूर्व राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी का अलीगढ़ मुस्लिम यूनिवर्सिटी से भी गहरा नाता रहा। उनके निधन से अलीग बिरादरी में भी शोक की लहर है । राष्ट्रपति के रूप में एक बार, पूर्व राष्ट्रपति के रूप में एक बार और चार बार अन्य अवसरों पर प्रणब मुखर्जी ने एएमयू की मेजबानी स्वीकार की। वह अंतिम बार सन 2017 में एएमयू आए थे।
एएमयू के इतिहास मामलों के जानकार डॉ. राहत अबरार कहते हैं प्रणब मुखर्जी एएमयू के भव्य समारोह में मेहमान बन कर आते और बहुत खुश होते। वह अक्सर कहते थे कि एक महान परंपरा का हिस्सा बनकर उन्हें बहुत खुशी हो रही है। डॉ. अबरार कहते हैं कि 10 मार्च 2007 को प्रणब मुखर्जी यहां के वार्षिक दीक्षांत समारोह में मुख्य अतिथि के रुप में आए। उस समय कुलपति रहे नसीम अहमद ने उनका स्वागत किया और ऐतिहासिक बग्गी की सवारी के साथ वह एथलेटिक ग्राउंड समारोह स्थल तक पहुंचे। इसके बाद जुलाई 2013 में उन्होंने पश्चिम बंगाल में अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय के मुर्शिदाबाद केंद्र की आधारशिला रखी और उस समारोह के मुख्य अतिथि रहे। इसी वर्ष 27 दिसंबर 2013 में विश्वविद्यालय में 37 वी इंडिया सोशल साइंस कांग्रेस का आयोजन किया गया। ऐतिहासिक कैनेडी हॉल में हुए समारोह में प्रणब मुखर्जी ने एक बार फिर से मुख्य अतिथि के रुप में शिरकत की। इस कार्यक्रम में उन्होंने पानी के अंधाधुंध दोहन को लेकर चिंता जताई।
सन 2014 में प्रणब मुखर्जी एक बार फिर से मुर्शिदाबाद पहुंचे और केंद्र का उद्घाटन भी किया। इसके बाद यहां बीएड की कक्षाएं शुरू होने के समारोह की अध्यक्षता की। 17 अक्टूबर 2017 को एएमयू के संस्थापक सर सैयद अहमद खान की 200वीं जयंती थी। पूर्व राष्ट्रपति के रूप में प्रणब मुखर्जी विश्वविद्यालय के मेहमान बने। डॉ. अबरार कहते हैं उनके निधन से पूरी अलीग बिरादरी शोक में है। उनकी आत्मा की शांति के लिए प्रार्थना करती है।
विज्ञापन
मुर्शिदाबाद में प्रणब मुखर्जी का संबोधन राहत अबरार ने लिखा था
जुलाई 2013 में प्रणब मुखर्जी ने पश्चिम बंगाल में मुर्शिदाबाद केंद्र की आधारशिला रखी। उस समय एएमयू के जनसंपर्क अधिकारी डॉ. राहत अबरार भी मुर्शिदाबाद गए थे। डॉ. राहत अबरार ने ही प्रणब मुखर्जी का संबोधन तैयार किया था। डॉ. अबरार कहते हैं उन्होंने संबोधन में अलीगढ़ और मुर्शिदाबाद के गहरे संबंधों को रेखांकित किया था। प्रणब मुखर्जी कार्यक्रम में जब अपना संबोधन कर चुके तो उन्होंने तत्कालीन कुलपति प्रोफेसर पीके अब्दुल अजीज से पूछा कि यह संबोधन किसने तैयार किया है? इसके बाद कुलपति प्रोफेसर अजीज ने डॉ. राहत अबरार को बुलवाया और प्रणब मुखर्जी को बताया कि यह संबोधन इन्होंने तैयार किया है। संबोधन से बेहद प्रभावित प्रणब मुखर्जी ने डॉ. राहत अबरार को गले लगा लिया और कहा कि मेरा जन्म भी मुर्शिदाबाद में ही हुआ है, लेकिन जितनी बारीकी से मुर्शिदाबाद और अलीगढ़ के संबंधों को इस संबोधन में शामिल किया है उसकी जानकारी शायद उनको भी नहीं थी।
प्रणब मुखर्जी के एएमयू के संबंध में किए गए संबोधन
अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय भारतीय राष्ट्रवाद का एक श्रेष्ठ उदाहरण है। यहां पर विभिन्न धर्म, भाषा, पृष्ठभूमि, संस्कृति के छात्र एक साथ रहते हैं, पढ़ते हैं और कार्य करते हैं। ( 17 अक्टूबर 2017 संस्थापक सर सैयद की 200 भी जयंती) बड़ी हैरानी की बात है पृथ्वी के बहुत बड़े हिस्से पर पानी उपलब्ध है जो कि उसके भूभाग से कई गुना ज्यादा है। लेकिन मात्र एक फीसदी पानी पीने लायक है । भूजल लगातार प्रदूषित हो रहा है। पानी का अंधाधुंध दोहन भविष्य के लिए मानव जाति को चिंतित कर रहा है। उन्हें पूरा विश्वास है अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय के वैज्ञानिक और छात्र इस दिशा में निश्चित रूप से ऐसा कुछ करेंगे कि हम इस संकट से निजात पा लेंगे । (27 दिसंबर 2013, 37 वीं इंडिया सोशल साइंस कांग्रेस)
आखिरी बार जब वीसी लॉज में ठहरे थे
पूर्व राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी के निधन पर एएमयू कुलपति प्रोफेसर तारिक मंसूर ने गहरा शोक व्यक्त किया कहा है। उन्होंने कहा कि भारत रत्न प्रणब मुखर्जी का राजनीतिक जीवन 40 वर्षो से भी ज्यादा लंबा रहा है। उनके निधन से देश ने एक योग्य संसदीय ज्ञाता को खो दिया है। मुखर्जी ने 2017 में अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्याल में आयोजित सर सैयद द्विशतीय जन्म समारोह में मुख्य अतिथि के रूप में भाग लिया था। उस समय वह वॉइस चांसलर लॉज में ठहरे थे। प्रोफेसर तारिक मंसूर ने विश्वविद्यालय की कमान प्रणब मुखर्जी के ही राष्ट्रपति कार्यकाल में संभाली थी। एएमयू बिरादरी उनके निधन पर दुखी है। मेरी संवेदनायें उनके परिवार के साथ हैं। यह मेरी निजी क्षति है क्योंकि प्रणव मुखर्जी से गहरे निजी संबंध थे ।
विज्ञापन
एएमयू के इतिहास मामलों के जानकार डॉ. राहत अबरार कहते हैं प्रणब मुखर्जी एएमयू के भव्य समारोह में मेहमान बन कर आते और बहुत खुश होते। वह अक्सर कहते थे कि एक महान परंपरा का हिस्सा बनकर उन्हें बहुत खुशी हो रही है। डॉ. अबरार कहते हैं कि 10 मार्च 2007 को प्रणब मुखर्जी यहां के वार्षिक दीक्षांत समारोह में मुख्य अतिथि के रुप में आए। उस समय कुलपति रहे नसीम अहमद ने उनका स्वागत किया और ऐतिहासिक बग्गी की सवारी के साथ वह एथलेटिक ग्राउंड समारोह स्थल तक पहुंचे। इसके बाद जुलाई 2013 में उन्होंने पश्चिम बंगाल में अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय के मुर्शिदाबाद केंद्र की आधारशिला रखी और उस समारोह के मुख्य अतिथि रहे। इसी वर्ष 27 दिसंबर 2013 में विश्वविद्यालय में 37 वी इंडिया सोशल साइंस कांग्रेस का आयोजन किया गया। ऐतिहासिक कैनेडी हॉल में हुए समारोह में प्रणब मुखर्जी ने एक बार फिर से मुख्य अतिथि के रुप में शिरकत की। इस कार्यक्रम में उन्होंने पानी के अंधाधुंध दोहन को लेकर चिंता जताई।
विज्ञापन
सन 2014 में प्रणब मुखर्जी एक बार फिर से मुर्शिदाबाद पहुंचे और केंद्र का उद्घाटन भी किया। इसके बाद यहां बीएड की कक्षाएं शुरू होने के समारोह की अध्यक्षता की। 17 अक्टूबर 2017 को एएमयू के संस्थापक सर सैयद अहमद खान की 200वीं जयंती थी। पूर्व राष्ट्रपति के रूप में प्रणब मुखर्जी विश्वविद्यालय के मेहमान बने। डॉ. अबरार कहते हैं उनके निधन से पूरी अलीग बिरादरी शोक में है। उनकी आत्मा की शांति के लिए प्रार्थना करती है।
विज्ञापन
मुर्शिदाबाद में प्रणब मुखर्जी का संबोधन राहत अबरार ने लिखा था
जुलाई 2013 में प्रणब मुखर्जी ने पश्चिम बंगाल में मुर्शिदाबाद केंद्र की आधारशिला रखी। उस समय एएमयू के जनसंपर्क अधिकारी डॉ. राहत अबरार भी मुर्शिदाबाद गए थे। डॉ. राहत अबरार ने ही प्रणब मुखर्जी का संबोधन तैयार किया था। डॉ. अबरार कहते हैं उन्होंने संबोधन में अलीगढ़ और मुर्शिदाबाद के गहरे संबंधों को रेखांकित किया था। प्रणब मुखर्जी कार्यक्रम में जब अपना संबोधन कर चुके तो उन्होंने तत्कालीन कुलपति प्रोफेसर पीके अब्दुल अजीज से पूछा कि यह संबोधन किसने तैयार किया है? इसके बाद कुलपति प्रोफेसर अजीज ने डॉ. राहत अबरार को बुलवाया और प्रणब मुखर्जी को बताया कि यह संबोधन इन्होंने तैयार किया है। संबोधन से बेहद प्रभावित प्रणब मुखर्जी ने डॉ. राहत अबरार को गले लगा लिया और कहा कि मेरा जन्म भी मुर्शिदाबाद में ही हुआ है, लेकिन जितनी बारीकी से मुर्शिदाबाद और अलीगढ़ के संबंधों को इस संबोधन में शामिल किया है उसकी जानकारी शायद उनको भी नहीं थी।
प्रणब मुखर्जी के एएमयू के संबंध में किए गए संबोधन
अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय भारतीय राष्ट्रवाद का एक श्रेष्ठ उदाहरण है। यहां पर विभिन्न धर्म, भाषा, पृष्ठभूमि, संस्कृति के छात्र एक साथ रहते हैं, पढ़ते हैं और कार्य करते हैं। ( 17 अक्टूबर 2017 संस्थापक सर सैयद की 200 भी जयंती) बड़ी हैरानी की बात है पृथ्वी के बहुत बड़े हिस्से पर पानी उपलब्ध है जो कि उसके भूभाग से कई गुना ज्यादा है। लेकिन मात्र एक फीसदी पानी पीने लायक है । भूजल लगातार प्रदूषित हो रहा है। पानी का अंधाधुंध दोहन भविष्य के लिए मानव जाति को चिंतित कर रहा है। उन्हें पूरा विश्वास है अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय के वैज्ञानिक और छात्र इस दिशा में निश्चित रूप से ऐसा कुछ करेंगे कि हम इस संकट से निजात पा लेंगे । (27 दिसंबर 2013, 37 वीं इंडिया सोशल साइंस कांग्रेस)
आखिरी बार जब वीसी लॉज में ठहरे थे
पूर्व राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी के निधन पर एएमयू कुलपति प्रोफेसर तारिक मंसूर ने गहरा शोक व्यक्त किया कहा है। उन्होंने कहा कि भारत रत्न प्रणब मुखर्जी का राजनीतिक जीवन 40 वर्षो से भी ज्यादा लंबा रहा है। उनके निधन से देश ने एक योग्य संसदीय ज्ञाता को खो दिया है। मुखर्जी ने 2017 में अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्याल में आयोजित सर सैयद द्विशतीय जन्म समारोह में मुख्य अतिथि के रूप में भाग लिया था। उस समय वह वॉइस चांसलर लॉज में ठहरे थे। प्रोफेसर तारिक मंसूर ने विश्वविद्यालय की कमान प्रणब मुखर्जी के ही राष्ट्रपति कार्यकाल में संभाली थी। एएमयू बिरादरी उनके निधन पर दुखी है। मेरी संवेदनायें उनके परिवार के साथ हैं। यह मेरी निजी क्षति है क्योंकि प्रणव मुखर्जी से गहरे निजी संबंध थे ।