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पूर्व विधायक हाजी जमीरउल्लाह बसपा से निष्कासित
न्यूूज डेस्क, अमर उजाला, अलीगढ़।
Updated Sun, 07 Oct 2018 01:31 AM IST
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जमीरउल्लाह
- फोटो : Dig Vishal
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लगातार दो बार सपा के टिकट से विधायक रहे हाजी जमीरउल्लाह को बसपा ने शनिवार को निष्कासित कर दिया है। दस महीने पहले ही दिसंबर 2017 में वह बसपा में शामिल हुए थे। बसपा जिलाध्यक्ष तिलकराज यादव ने बताया कि बसपा सुप्रीमो मायावती के निर्देश पर पार्टी विरोधी गतिविधियों में शामिल रहने, अनुशासनहीनता के आरोपों के चलते उनको निष्कासित किया गया है। दूसरी ओर जमीरउल्लाह ने कहा कि वे बहन जी के फैसले का स्वागत करते हैं और अब आजाद महसूस कर रहे हैं।
जमीरउल्लाह को वर्ष 2007 में पहली बार समाजवादी पार्टी ने शहर विधान सभा से टिकट दिया था और वह जीत कर विधायक बने। विस चुनाव वर्ष 2012 में उनको कोल विधानसभा से सपा का टिकट मिला और वह दोबारा जीत गए। वर्ष 2017 के विस चुनाव में पार्टी की कमान अपने हाथ में लेने वाले अखिलेश यादव ने उनका कोल विधानसभा से टिकट काट दिया।
इस चुनाव में जमीरउल्लाह निर्दलीय चुनाव लड़े और सपा से बाहर हो गए। इसी साल दिसंबर में जमीरउल्लाह बसपा में शामिल हुए। ऊपरकोट में इसका बहुत बड़ा जलसा हुआ। अभी दस महीने ही गुजरे थे कि अब वो बसपा से भी हटा दिए गए हैं। राजनीतिक गलियारों में ये भी चर्चा है कि शिवपाल सिंह यादव के करीबी रहे जमीरउल्लाह अब जल्द ही समाजवादी सेक्युलर मोर्चा का झंडा थाम सकते हैं। हालांकि खुद जमीरउल्लाह या सेक्यूलर मोर्चा के मंडल अध्यक्ष डा. रक्षपाल सिंह ने इस बारे में स्पष्ट रूप से कुछ नहीं कहा है।
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शिवपाल के साथ जाने की अटकलें कीं खारिज
बसपा से निकाष्सन के बाद जब पूर्व विधायक से पूछा गया कि क्या वो शिवपाल सिंह यादव के समाजवादी सेक्यूलर मोर्चा में शामिल होंगे..? तो उनका कहना था कि वे अपने सभी साथियों से रायशुमारी करने के बाद ही कोई फैसला करेंगे। फिलहाल उनके सामने सभी विकल्प खुले हैं। लेकिन फैसला सभी के साथ करेंगे। ये फैसला भी जनता के बीच होगा।
निष्कासन की वजहें
1-बसपा हाईकमान के निर्देशों के बगैर लगातार शासन व प्रशासन के खिलाफ बयानबाजी करना।
2-कांग्रेस के जिलाध्यक्ष के साथ लगातार एनकाउंटर के मामले में बयानबाजी करना।
3-एटा शहर मुफ्ती की हत्या के मामले में उनके परिजनों का पक्ष सुनने के बाद नौशाद मुस्तकीम पक्ष से हटना।
4-शिवपाल सिंह यादव के समाजवादी सेक्यूलर मोर्चा के गठन के बाद उसमें शामिल होने के अटकलें।
पार्टी की ओर से इस संबंध में जानकारी मिली है। मैं बहन मायावती की दिल से इज्जत करता हूं। उनके फैसले का स्वागत करता हूं। अब मैं खुद को आजाद महसूस कर रहा हूं। कोई भी दल या नेता मुझे दिल से निकाल दे कोई फर्क नहीं पड़ता, मैं जनता के दिल में रहना चाहता हूं।
-हाजी जमीरउल्लाह, बसपा से निष्कासित नेता।
अगर जमीरउल्लाह हमारे साथ शिवपाल सिंह के मोर्चे में शामिल होते हैं तो निश्चित रूप से हमारी नवगठित पार्टी को बड़ी ताकत मिलेगी। उनकी जनता में बहुत अच्छी पकड़ है।
-डा. रक्षपाल सिंह, अलीगढ़ मंडल अध्यक्ष, समाजवादी सेक्यूलर मोर्चा।
बसपा सुप्रीमो मायावती के आदेश पर पूर्व विधायक हाजी जमीरउल्लाह को अनुशासनहीनता एवं पार्टी विरोधी गतिविधियों के चलते पार्टी से निष्कासित कर दिया गया है। उनको कई बार चेतावनी भी दी गई थी लेकिन उनकी कार्यशैली में कोई बदलाव नहीं हुआ था।
-तिलकराज यादव, बसपा जिलाध्यक्ष।
वर्ष 2017 के विधानसभा के चुनाव जब पूर्व विधायक हाजी जमीरउल्लाह ने खुद ही सपा से किनारा कर लिया था। वे पार्टी के खिलाफ चुनाव भी लड़े थे। ऐसे में अब जमीरउल्लाह का सपा से कोई लेनादेना नहीं है।
-अशोक यादव, सपा जिलाध्यक्ष।
बसपा ने उन पर निष्कासन की कार्रवाई क्यों की..? ये पार्टी का अंदरूनी मामला है। इस बाबत मैं कुछ नहीं कह सकता।
-बिजेंद्र सिंह, कांग्रेस जिलाध्यक्ष।
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जमीरउल्लाह को वर्ष 2007 में पहली बार समाजवादी पार्टी ने शहर विधान सभा से टिकट दिया था और वह जीत कर विधायक बने। विस चुनाव वर्ष 2012 में उनको कोल विधानसभा से सपा का टिकट मिला और वह दोबारा जीत गए। वर्ष 2017 के विस चुनाव में पार्टी की कमान अपने हाथ में लेने वाले अखिलेश यादव ने उनका कोल विधानसभा से टिकट काट दिया।
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इस चुनाव में जमीरउल्लाह निर्दलीय चुनाव लड़े और सपा से बाहर हो गए। इसी साल दिसंबर में जमीरउल्लाह बसपा में शामिल हुए। ऊपरकोट में इसका बहुत बड़ा जलसा हुआ। अभी दस महीने ही गुजरे थे कि अब वो बसपा से भी हटा दिए गए हैं। राजनीतिक गलियारों में ये भी चर्चा है कि शिवपाल सिंह यादव के करीबी रहे जमीरउल्लाह अब जल्द ही समाजवादी सेक्युलर मोर्चा का झंडा थाम सकते हैं। हालांकि खुद जमीरउल्लाह या सेक्यूलर मोर्चा के मंडल अध्यक्ष डा. रक्षपाल सिंह ने इस बारे में स्पष्ट रूप से कुछ नहीं कहा है।
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शिवपाल के साथ जाने की अटकलें कीं खारिज
बसपा से निकाष्सन के बाद जब पूर्व विधायक से पूछा गया कि क्या वो शिवपाल सिंह यादव के समाजवादी सेक्यूलर मोर्चा में शामिल होंगे..? तो उनका कहना था कि वे अपने सभी साथियों से रायशुमारी करने के बाद ही कोई फैसला करेंगे। फिलहाल उनके सामने सभी विकल्प खुले हैं। लेकिन फैसला सभी के साथ करेंगे। ये फैसला भी जनता के बीच होगा।
निष्कासन की वजहें
1-बसपा हाईकमान के निर्देशों के बगैर लगातार शासन व प्रशासन के खिलाफ बयानबाजी करना।
2-कांग्रेस के जिलाध्यक्ष के साथ लगातार एनकाउंटर के मामले में बयानबाजी करना।
3-एटा शहर मुफ्ती की हत्या के मामले में उनके परिजनों का पक्ष सुनने के बाद नौशाद मुस्तकीम पक्ष से हटना।
4-शिवपाल सिंह यादव के समाजवादी सेक्यूलर मोर्चा के गठन के बाद उसमें शामिल होने के अटकलें।
पार्टी की ओर से इस संबंध में जानकारी मिली है। मैं बहन मायावती की दिल से इज्जत करता हूं। उनके फैसले का स्वागत करता हूं। अब मैं खुद को आजाद महसूस कर रहा हूं। कोई भी दल या नेता मुझे दिल से निकाल दे कोई फर्क नहीं पड़ता, मैं जनता के दिल में रहना चाहता हूं।
-हाजी जमीरउल्लाह, बसपा से निष्कासित नेता।
अगर जमीरउल्लाह हमारे साथ शिवपाल सिंह के मोर्चे में शामिल होते हैं तो निश्चित रूप से हमारी नवगठित पार्टी को बड़ी ताकत मिलेगी। उनकी जनता में बहुत अच्छी पकड़ है।
-डा. रक्षपाल सिंह, अलीगढ़ मंडल अध्यक्ष, समाजवादी सेक्यूलर मोर्चा।
बसपा सुप्रीमो मायावती के आदेश पर पूर्व विधायक हाजी जमीरउल्लाह को अनुशासनहीनता एवं पार्टी विरोधी गतिविधियों के चलते पार्टी से निष्कासित कर दिया गया है। उनको कई बार चेतावनी भी दी गई थी लेकिन उनकी कार्यशैली में कोई बदलाव नहीं हुआ था।
-तिलकराज यादव, बसपा जिलाध्यक्ष।
वर्ष 2017 के विधानसभा के चुनाव जब पूर्व विधायक हाजी जमीरउल्लाह ने खुद ही सपा से किनारा कर लिया था। वे पार्टी के खिलाफ चुनाव भी लड़े थे। ऐसे में अब जमीरउल्लाह का सपा से कोई लेनादेना नहीं है।
-अशोक यादव, सपा जिलाध्यक्ष।
बसपा ने उन पर निष्कासन की कार्रवाई क्यों की..? ये पार्टी का अंदरूनी मामला है। इस बाबत मैं कुछ नहीं कह सकता।
-बिजेंद्र सिंह, कांग्रेस जिलाध्यक्ष।