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करेंसी बदलने में खेल..कारखानेदारों की खुलेगी पोल
अभिषेक शर्मा
Updated Fri, 18 Nov 2016 01:58 AM IST
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नोटबंदी के बाद बैंकों के बाहर लगी कतारों में फैक्ट्री श्रमिकों की संख्या देख सभी का माथा ठनकने लगा है। यह बात भी छन-छनकर बाहर आने लगी है कि फैक्ट्री स्वामी अपने श्रमिकों को नोट एक्सचेंज के काम पर लगाए हुए हैं। इसे लेकर प्रशासनिक मशीनरी सख्त हो गई है और अब खुफिया एजेंसियों को इन कारखानेदारों के पीछे लगा दिया गया है।
सबसे पहले श्रम विभाग की मदद से ऐसे श्रमिकों का मिलान कराया जा रहा है, जो पिछले एक सप्ताह में नोट बदलने बैंकों में पहुंचे हैं। इसके लिए डाटा जुटाया जा रहा है और फिर फैक्ट्री स्वामियों पर शिकंजा कसा जाएगा।
पिछले एक सप्ताह में बैंकों में लगी भीड़ में से एक बात सामने आई कि फैक्ट्री मजदूर काफी संख्या में लाइनों में नोट बदलने के लिए लग रहे हैं। इनमें कुछ अपनी आईडी के साथ तो कुछ किसी अन्य की आईडी के साथ हैं। कुछ ऐसे भी हैं जो एक दिन में दो या तीन बैंकों से 4500 रुपये एक्सचेंज करके ला रहे हैं।
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इसके चलते आम जरूरतमंद आदमी को रुपया नहीं मिल पा रहा है। यह भी खुलासा हुआ कि ऐसा शहर के फैक्ट्री मालिक अपने श्रमिकों को मजदूरी का रुपया देकर उनसे करा रहे हैं। इसे लेकर दो दिन पहले डीएम-एसएसपी ने बैंकों के दौरे में सख्ती के संकेत दिए थे।
इसी वजह से खुफिया एजेंसियों के माध्यम से श्रम विभाग से मजदूरों का डाटा फैक्ट्री वार एकत्रित किया गया है। इस डाटा के माध्यम से बैंकों में पहुंची आईडी का मिलान किया जा रहा है। इसमें देखा जा रहा है कि सबसे अधिक किस फैक्ट्री के श्रमिक, कितनी बार नोट बदलकर लाए हैं। इसके बाद फैक्ट्री स्वामी जांच के दायरे में लिए जाएंगे।
महाजाम के पीछे साजिश की टोह में एजेंसियां
मुख्य डाकघर से लेकर महानगर के कई ठिकानों पर बुधवार को नारी शक्ति के महाजाम पर भी संदेह के बादल मंडराने लगे हैं। सोशल मीडिया पर बुधवार रात जारी एक कमेंट के बाद पुलिस प्रशासनिक के इशारे पर एजेंसियां इस महाजाम की हकीकत जानने में जुट गई हैं।
सोशल मीडिया पर इस कमेंट में महाजाम में आई कुछ महिलाओं के हवाले से कहा गया था कि उन्हें कुछ सियासी कारिंदों ने यह कहा था कि आपका कर्जा माफ कराना है। इसलिए आपको तस्वीर महल पर एकत्रित होना है। वहां दिन भर बैठने पर आपको खाना पीना भी मिलेगा और आपका कर्जा भी माफ कराया जाएगा।
अगर कर्जा माफ नहीं हो सका तो आपको इतनी रकम दिलाई जाएगी कि आप अपने कर्ज का भुगतान भी कर सकें। इस कमेंट के बाद खुफिया एजेंसियां अब उन महिलाओं से एक-एक कर संपर्क में जुट गई हैं। सवाल किया जा रहा है कि अगर सियासी कारिंदे नोट बंदी के बाद मची हायतौबा के माहौल में इस तरह की हरकत कर सकते हैं तो वह शहर में अन्य तरह की किसी वारदात को भी अंजाम दिला सकते हैं।
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सबसे पहले श्रम विभाग की मदद से ऐसे श्रमिकों का मिलान कराया जा रहा है, जो पिछले एक सप्ताह में नोट बदलने बैंकों में पहुंचे हैं। इसके लिए डाटा जुटाया जा रहा है और फिर फैक्ट्री स्वामियों पर शिकंजा कसा जाएगा।
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पिछले एक सप्ताह में बैंकों में लगी भीड़ में से एक बात सामने आई कि फैक्ट्री मजदूर काफी संख्या में लाइनों में नोट बदलने के लिए लग रहे हैं। इनमें कुछ अपनी आईडी के साथ तो कुछ किसी अन्य की आईडी के साथ हैं। कुछ ऐसे भी हैं जो एक दिन में दो या तीन बैंकों से 4500 रुपये एक्सचेंज करके ला रहे हैं।
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इसके चलते आम जरूरतमंद आदमी को रुपया नहीं मिल पा रहा है। यह भी खुलासा हुआ कि ऐसा शहर के फैक्ट्री मालिक अपने श्रमिकों को मजदूरी का रुपया देकर उनसे करा रहे हैं। इसे लेकर दो दिन पहले डीएम-एसएसपी ने बैंकों के दौरे में सख्ती के संकेत दिए थे।
इसी वजह से खुफिया एजेंसियों के माध्यम से श्रम विभाग से मजदूरों का डाटा फैक्ट्री वार एकत्रित किया गया है। इस डाटा के माध्यम से बैंकों में पहुंची आईडी का मिलान किया जा रहा है। इसमें देखा जा रहा है कि सबसे अधिक किस फैक्ट्री के श्रमिक, कितनी बार नोट बदलकर लाए हैं। इसके बाद फैक्ट्री स्वामी जांच के दायरे में लिए जाएंगे।
महाजाम के पीछे साजिश की टोह में एजेंसियां
मुख्य डाकघर से लेकर महानगर के कई ठिकानों पर बुधवार को नारी शक्ति के महाजाम पर भी संदेह के बादल मंडराने लगे हैं। सोशल मीडिया पर बुधवार रात जारी एक कमेंट के बाद पुलिस प्रशासनिक के इशारे पर एजेंसियां इस महाजाम की हकीकत जानने में जुट गई हैं।
सोशल मीडिया पर इस कमेंट में महाजाम में आई कुछ महिलाओं के हवाले से कहा गया था कि उन्हें कुछ सियासी कारिंदों ने यह कहा था कि आपका कर्जा माफ कराना है। इसलिए आपको तस्वीर महल पर एकत्रित होना है। वहां दिन भर बैठने पर आपको खाना पीना भी मिलेगा और आपका कर्जा भी माफ कराया जाएगा।
अगर कर्जा माफ नहीं हो सका तो आपको इतनी रकम दिलाई जाएगी कि आप अपने कर्ज का भुगतान भी कर सकें। इस कमेंट के बाद खुफिया एजेंसियां अब उन महिलाओं से एक-एक कर संपर्क में जुट गई हैं। सवाल किया जा रहा है कि अगर सियासी कारिंदे नोट बंदी के बाद मची हायतौबा के माहौल में इस तरह की हरकत कर सकते हैं तो वह शहर में अन्य तरह की किसी वारदात को भी अंजाम दिला सकते हैं।