{"_id":"5a2af3264f1c1b95188b8ae7","slug":"politics-on-the-rann-shelters-bsp-bjp-face-to-face","type":"story","status":"publish","title_hn":"रैन बसेरों पर राजनीति, बसपा-भाजपा आमने-सामने ","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
रैन बसेरों पर राजनीति, बसपा-भाजपा आमने-सामने
ब्यूूराे, अमर उजाला, अलीगढ़।
Updated Sat, 09 Dec 2017 01:52 AM IST
विज्ञापन
रैन बसेरे का उद्घाटन करते विधायक संजीव राजा, विधायक अनिल पाराशर
- फोटो : Amar Ujala
निकाय चुनावों में दो-दो हाथ करने के बाद भाजपा व बसपा में गरीबों के रैन बसेरे पर भी राजनीति शुरू हो गई है। गुरुवार को मालगोदाम पर बने रैन बसेरे के उद्घाटन कार्यक्रम में शहर व कोल विधायक तो बुलाए गए, लेकिन नवनिर्वाचित मेयर मो. फुरकान को नहीं बुलाया गया।
बुलाना तो दूर उन्हें इसकी खबर तक नहीं दी गई। जिससे मेयर समर्थकों में अंदर ही अंदर आक्रोश भड़क रहा है। खुद मेयर फुरकान ने कहा कि उन्हें इस कार्यक्रम की इत्तिला तक नहीं दी गई।
हुआ यूं कि गुरुवार को मालगोदाम पर भी रैन बसेरा बनाया गया। इसका उद्घाटन शहर विधायक संजीव राजा व कोल विधायक अनिल पाराशर ने किया। कार्यक्रम में नवनिर्वाचित मेयर एवं बसपा नेता मो. फुरकान दिखाई नहीं दिए तो सुगबुगाहट शुरू हो गई।
विज्ञापन
हर कोई चर्चा करता नजर आया कि ऐसे कार्यक्रम में मेयर को होना चाहिए था। कुछ लोग दबी जुबान से यह भी कहते नजर आए कि 22 वर्षों तक मेयर पद पर जमे रहे भाजपाई हार को पचा नहीं पा रहे हैं। इसी वजह से नगर निगम कर्मचारियों के माध्यम से राजनीति कर रहे हैं।
सीधे सीधे रैन बसेरा प्रभारी सभापति यादव पर सवाल उठे। हालांकि सभापति यादव ने कुछ भी कहने से किनारा कर लिया। मेयर फुुरकान से बात की गई तो उन्हाेंने स्वीकारा कि उनको इसकी कोई जानकारी तक नहीं दी गई।
विज्ञापन
बुलाना तो दूर उन्हें इसकी खबर तक नहीं दी गई। जिससे मेयर समर्थकों में अंदर ही अंदर आक्रोश भड़क रहा है। खुद मेयर फुरकान ने कहा कि उन्हें इस कार्यक्रम की इत्तिला तक नहीं दी गई।
विज्ञापन
हुआ यूं कि गुरुवार को मालगोदाम पर भी रैन बसेरा बनाया गया। इसका उद्घाटन शहर विधायक संजीव राजा व कोल विधायक अनिल पाराशर ने किया। कार्यक्रम में नवनिर्वाचित मेयर एवं बसपा नेता मो. फुरकान दिखाई नहीं दिए तो सुगबुगाहट शुरू हो गई।
विज्ञापन
हर कोई चर्चा करता नजर आया कि ऐसे कार्यक्रम में मेयर को होना चाहिए था। कुछ लोग दबी जुबान से यह भी कहते नजर आए कि 22 वर्षों तक मेयर पद पर जमे रहे भाजपाई हार को पचा नहीं पा रहे हैं। इसी वजह से नगर निगम कर्मचारियों के माध्यम से राजनीति कर रहे हैं।
सीधे सीधे रैन बसेरा प्रभारी सभापति यादव पर सवाल उठे। हालांकि सभापति यादव ने कुछ भी कहने से किनारा कर लिया। मेयर फुुरकान से बात की गई तो उन्हाेंने स्वीकारा कि उनको इसकी कोई जानकारी तक नहीं दी गई।