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जिसका जो लिखा है कोई मिटा नहीं सकता के जज्बे संग कोरोना से जंग

Thu, 30 Apr 2020 01:30 AM IST
Aligarh Bureau अलीगढ़ ब्यूरो
Updated Thu, 30 Apr 2020 01:30 AM IST
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Policemen honestly doing their duty in worst situation.
जावेद खाँ, इंस्पेक्टर सासनीगेट - फोटो : CITY OFFICE
अभिषेक शर्मा
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जिसके विषय में जब, जहां, जैसे लिखा है कोई मिटा नहीं सकता। कुछ इस तरह के जज्बे के साथ इन दिनों हमारे शहर की पुलिस के कोरोना योद्धा काम कर रहे हैं। आज यहां हम बात कर रहे हैं शहर के सर्वाधिक कोरोना प्रभावित हॉटस्पॉट/रेड जोन घोषित सर्किल प्रथम के उन पुलिस अधिकारियों की जो लॉकडाउन का पालन कराने के लिए दिन रात एक किए हुए हैं। यही वह इलाका है, जहां कम्युनिटि संक्रमण फैला है। ऐसे में यह कोरोना योद्धा समाज, स्टाफ और परिवार के बीच सामंजस्य बैठाकर बस एक ही धुन में काम किए जा रहे हैं। प्रयास है कि कैसे भी लोग सुरक्षित रहें और घरों में रहें। ताकि कोरोना वायरस जितने पांव पसार चुका है, अब उससे ज्यादा लोगों तक न पहुंच सके।
घर में बिस्तर पर पत्नी की देखभाल, बाहर पब्लिक से सोशल डिस्टेंसिंग का सवाल
सीओ प्रथम विशाल पांडेय जिस तरह की व्यक्तिगत समस्या से जूझते हुए काम कर रहे हैं, उसे सुनकर उनका स्टाफ व अधिकारी खुद मॉटीवेट हो रहे हैं। उनकी पत्नी सरवाइकल की बीमारी से ग्रसित हैं और पिछले कुछ समय से अचानक बिस्तर पर हैं। हालांकि घर में दो छोटी बेटियां भी हैं। मगर विशाल खुद अपनी पत्नी की देख भाल के साथ-साथ ड्यूटी भी निभा रहे हैं। सुबह छह से दस बजे तक सोशल डिस्टेंसिंग का पालन कराने के लिए फील्ड में रहते हैं। इस दौरान उन्होंने अपने पास से एक थर्मल स्क्रीनिंग थर्मामीटर भी खरीद रखा है। वह फील्ड में भ्रमण के दौरान अपने स्टाफ की चेकिंग करते रहते हैं। घर पहुंचने पर अपनी साफ-सफाई के बाद पत्नी की जरूरतों को पूरा कर फिर ऑफिस ड्यूटी निभाने निकलते हैं और देर शाम तक भ्रमण में लॉकडाउन पालन कराने में निकलते हैं। इस बीच घर से किसी समस्या पर बेटियों का फोन आए तो उसे फोन पर निपटाने या जरूरत पर वापस घर पहुंचकर उसे दूर करने का प्रयास करते हैं। डॉक्टरों ने पत्नी का दूसरा ऑपरेशन होने की सलाह दी है। इलाज चूंकि लखनऊ से चल रहा है। इसलिए लॉकडाउन में वो हो पाना संभव नहीं हो रहा। इस सबके बीच उन्हें उस समय बेहद बुरा लगता है और मेहनत पर पानी फिरता दिखता है, जब कहीं सोशल डिस्टेंसिंग तोड़कर और लॉकडाउन तोड़ पब्लिक बाहर दिखती है। उनकी एक ही अपील है कि घर में रहकर अपने साथ अपना और अपने लोगों का बचाव करें।
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57 साल की उम्र में भी बाबा ने खड़े नहीं किए हाथ, पुलिस-परिवार दे रहा साथ
ऊपरकोट कोतवाली इंस्पेक्टर रविंद्र सिंह उम्र के 57 साल में पहुंच गए हैं। जिला पुलिस उन्हें उनकी उम्र व अनुभवों के कारण बाबा के नाम से पुकारती है। कोरोना महामारी के दौर में केंद्र व राज्य सरकारों ने युवाओं को जिम्मेदार पदों पर आगे खड़ाकर काम लेने का संदेश दे रखा है। बावजूद इसके उन्होंने अपने हाथ खड़े नहीं किए। दिसंबर से चल रहे सीएए-एनआरसी के विरोध प्रदर्शन के दौर से वह लगातार ड्यूटी पर मुस्तैद हैं। कभी इस उम्र में भी थकावट महसूस नहीं की। उनका पुलिस स्टाफ व साथ रहने वाली पत्नी व लॉकडाउन में फंसकर उनके साथ रह रहीं भाभी उनका साथ दे रही हैं। लॉकडाउन के कारण दिनचर्या भी बदल गई है। सुबह पांच बजे जागकर छह बजे फील्ड में निकलना पड़ रहा है। 70 फीसदी स्टाफ ऐसा है, जिसे पिछले चार माह से छुट्टी नहीं मिली। पहले सीएए-एनआरसी के बवाल की वजह से छुट्टी रद्द थीं। अब छुट्टी मिल भी रही हैं तो स्टाफ लॉकडाउन में बाहर जा नहीं पा रहा। 10 फीसदी स्टाफ ही ऐसा है जो अपने परिवार के साथ है। सभी का ध्यान रखते हुए अभिभावक की भूमिका निभाते हुए काम किए जा रहे हैं।
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बेटे की चोट और मां की बीमारी भुलाकर चार माह से जूझ रहे धीरेंद्र
देहली गेट इंस्पेक्टर धीरेंद्र मोहन की मेहनत किसी से छिपी नहीं है। पहले शाहजमाल में चला महिलाओं का धरना प्रदर्शन संभाला और अब कोरोना महामारी के दौर में शहर में सबसे पहले उनके थाना क्षेत्र के उस्मानापड़ा, नीवरी अलहदादपुर व जंगलगढ़ी में कोरोना पॉजिटिव केस सामने आए। जब शाहजमाल धरना चल रहा था तो मां बुरी तरह बीमार थीं और लंबे समय तक दिल्ली के अस्पताल में भरती रहीं। उस समय भी बीच-बीच में कभी रात को तो कभी दिन में यहां से दिल्ली जाकर मां को देख आते थे। होली के बाद मां को अस्पताल से छुट्टी मिली तो उन्हें भाई के पास गांव भेज दिया। लॉकडाउन लगने से ऐन पहले होली पर 12 साल के बेटे का एक्सीडेंट हो गया। परिवार उनके साथ नहीं रहता। इसलिए बस फोन पर बेटे व मां का हाल चाल लेते रहते हैं और अपनी ड्यूटी किए जा रहे रहे हैं। उधर परिवार को उनकी चिंता सताए जा रही है और वह परिवार की चिंता छोड़ कोरोना मरीजों को खोजने के अभियान में जुटे हुए हैं। उन्हें दर्द सताता है तो सिर्फ एक, जब अपने क्षेत्र में कोरोना मरीज के अंदेशे पर लोगों की सैंपलिंग कराने स्वास्थ्य टीम के साथ पहुंचते हैं तो लोग सैंपलिंग कराने के बजाय उल्टे सीधे सवाल करने लगते हैं। मजबूरी में लोगों को धमका कर सैंपलिंग करानी पड़ती है। वह अपने साथ अपने स्टाफ का भी पूरा ध्यान रख रहे हैं। साफ सफाई, सैनिटाइजिंग, मास्क, ग्लब्स आदि की व्यवस्था एसएसपी स्तर से कराई गई है, जिसका हर स्टाफ को प्रयोग कराते हैं।

खुद और पत्नी दोनों कोरोना योद्धा, बच्चे घर में अकेले
इंस्पेक्टर सासनी गेट जावेद खान खुद पुलिस सेवा में होने के नाते घर से बाहर रहते हैं और पत्नी अलीगढ़ जिले में ही स्वास्थ्य विभाग में क्वालिटी ट्रेनर होने के नाते घर से बाहर रहती हैं। दोनों कोरोना योद्धा के रूप में सेवाएं दे रहे हैं और घर में छोटी बेटी व बेटा अकेले रह जाते हैं। वैसे तो पत्नी की ड्यूटी 10 से 5 रहती है। मगर इन दिनों न तो बच्चे स्कूल जा रहे और पत्नी की ड्यूटी के समय का भी कोई पता नहीं रहता। इसलिए बच्चों की चिंता सताए रहती है। मौजूदा माहौल में खुद का, परिवार का, पुलिस स्टाफ का और समाज का ध्यान रखते हुए काम किया जा रहा है। इन दिनों थाने से दिन में घर भी जाना नहीं हो पा रहा है। वह कहते हैं कि लॉकडाउन का पालन कराने में लोगों को समझाने में कड़ी मशक्कत करनी पड़ती है। बावजूद इसके जब कहीं से सोशल डिस्टेंसिंग और लॉकडाउन टूटने की खबरें आती हैं तो बेहद कष्ट होता है। दूसरी चिंता इस बात की ज्यादा सताए जा रही है कि जिस तरह से देहली गेट, कोतवाली व सासनी गेट में कम्युनिटि संक्रमण फैला है। अगर लोग इतनी सख्ती के बाद भी लॉकडाउन का पालन करने में लापरवाही बरतने से बाज नहीं आए तो दिक्कत हो जाएगी।

धीरेंद्र शर्मा, इंस्पेक्टर देहलीगेट

धीरेंद्र शर्मा, इंस्पेक्टर देहलीगेट- फोटो : CITY OFFICE

रविंद्र कुमार सिंह,  इंस्पैक्टर कोतवाली।

रविंद्र कुमार सिंह, इंस्पैक्टर कोतवाली।- फोटो : CITY OFFICE

विशाल पांडे,  सीओ प्रथम।

विशाल पांडे, सीओ प्रथम।- फोटो : CITY OFFICE

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