400 करोड़ की ठगी: मास्टरमाइंड जुनैद के पांच गुर्गों के खाते खंगाल रही पुलिस, सभी ने मिलकर बना रखा था सिंडिकेट
जुनैद ने एएमयू से कॉमर्स विषय में पीएचडी की थी। इसके बाद उसने साइना फाइनेंशियल एडवाइजर के नाम से दफ्तर खोला था। वह यूनिवर्सिटी के भोले-भाले कर्मचारियों और आम लोगों को साइना इन्वेस्टमेंट, साइना हॉलिडेज और सेहला फार्मा जैसी लुभावनी और फर्जी योजनाओं में पैसे निवेश करने पर भारी मुनाफे का झांसा देता था।
विस्तार
अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय (एएमयू) के कर्मचारियों और लोगों से 400 करोड़ रुपये की ठगी करने वाले आरोपी जुनैद अहमद के मामले में पुलिस अब उसके नेटवर्क को पूरी तरह ध्वस्त करने में जुट गई है। शुक्रवार को अनूपशहर रोड से गिरफ्तार किए गए मुख्य आरोपी जुनैद से पूछताछ और तफ्तीश के आधार पर पुलिस ने उसके पांच प्रमुख सहयोगियों की तलाश तेज कर दी है।
यह भी पढ़ें ... जुनैद की कहानी: एएमयू से की पीएचडी, खोली म्यूचुअल फंड कंपनी, घाटा होने के बाद शुरू कर दी ठगी
जांच में यह खुलासा हुआ है कि जुनैद ने इसके लिए एक सिंडिकेट बना रखा था। ठगी के इस बड़े नेटवर्क में सुहेल अहमद, उकैस, दीपक कुमार, मोहम्मद बिलाल और जेबा परवीन जैसे कई सहयोगी शामिल थे। शुरुआती जांच में सामने आया है कि ठगी की रकम सीधे मुख्य आरोपी जुनैद के खाते में ट्रांसफर होने के बजाय इन कर्मचारियों और सहयोगियों के खातों में मंगवाई जाती थी।
जुनैद को जेल भेजा जा चुका है। अन्य पहलुओं को बारीकी से खंगाला जा रहा है। पुलिस यह पता लगाने का प्रयास कर रही है कि रकम को कहां-कहां और किन संपत्तियों में निवेश किया गया है। सहयोगियों की गिरफ्तारी के बाद और भी खुलासे होने की उम्मीद है। - सर्वम सिंह, सीओ तृतीय
यह भी पढ़ें ... UP: एएमयू से पीएचडी कर ठगने लगा प्रोफेसर-डॉक्टर व हाई प्रोफाइल को, दबोचा, ऐसे करता था ठगी
तीन साल तक फर्जी कंपनियों के नाम पर चला खेल
एमराल्ड गुलिस्तां अपार्टमेंट, अनूपशहर रोड, निवासी जुनैद ने एएमयू से वर्ष 2019 में कॉमर्स विषय में पीएचडी की थी। इसके बाद उसने मैरिस रोड स्थित लैंडमार्क मॉल में वर्ष 2022 में साइना फाइनेंशियल एडवाइजर के नाम से दफ्तर खोला था। वह यूनिवर्सिटी के भोले-भाले कर्मचारियों और आम लोगों को साइना इन्वेस्टमेंट, साइना हॉलिडेज और सेहला फार्मा जैसी लुभावनी और फर्जी योजनाओं में पैसे निवेश करने पर भारी मुनाफे का झांसा देता था। तीन साल तक वह लोगों का विश्वास जीतकर ठगी का कारोबार चलाता रहा। वर्ष 2025 में जब निवेशकों को शक हुआ और मामले की भनक पुलिस तक पहुंची, तब जाकर इस बड़े घोटाले का पर्दाफाश हुआ।