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अलीगढ़ : पुलिस मुठभेड़ के दोषी को 36 साल बाद सजा
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एडीजे-9 सुनील सिंह की अदालत से 36 वर्ष पुराना पुलिस मुठभेड़ का मुकदमा निस्तारित करते हुए एक व्यक्ति को सजा सुनाई गई है। दोषी को 3 वर्ष की सजा व 4500 रुपये जुर्माने से दंडित किया है।
एडीजीसी जेपी राजपूत के अनुसार घटना 10/11 जुलाई 1986 की देर रात की है। सिविल लाइंस थाने के दरोगा शिव सिंह पुलिस टीम के साथ गश्त पर थे। वे जैसे ही शमशाद मार्केट से किला रोड पर पहुंचे तो बदमाशों की टोली दिखाई दी। इस दौरान रोकटोक पर उधर से फायरिंग की गई। पुलिस की ओर से भी सरकारी हथियारों से जवाबी फायरिंग की गई। इस घटना में मौके से सादाबाद के सतीश व महेश, सिकंदराराऊ के जसपाल व शहबाजपुर विजयगढ़ के शंकरपाल को दबोचा गया, जबकि जरारा खैर के रामप्रसाद व लोधा जॉफरी के बद्री भाग गए। मुकदमे के आधार पर सभी के खिलाफ चार्जशीट दायर की गई। पुलिस के एक दर्जन गवाह बनाए गए।
इस मामले में 6 मार्च 2006 को पत्रावली पर सत्र परीक्षण के लिए आरोप तय हुए। मगर कई आरोपियों की पत्रावली अलग अलग कर दी गई। एक आरोपी शंकरपाल के खिलाफ जारी ट्रायल के दौरान मामले में कई गवाह तलाशने के प्रयास हुए। जिसमें कुछ की देहांत की सूचना मिली तो कुछ के सेवानिवृत्त के बाद सही पते पुलिस नहीं खोज पाई। पहले गवाह वादी की गवाही हुई और एक अन्य गवाह उस समय सिपाही रहे, बाद में दरोगा होकर सेवानिवृत्त हुए दिनेश की गवाही हुई। इसके आधार पर शंकरपाल को तीन वर्ष की सजा व 4500 रुपये जुर्माने से दंडित किया गया है।
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एडीजीसी जेपी राजपूत के अनुसार घटना 10/11 जुलाई 1986 की देर रात की है। सिविल लाइंस थाने के दरोगा शिव सिंह पुलिस टीम के साथ गश्त पर थे। वे जैसे ही शमशाद मार्केट से किला रोड पर पहुंचे तो बदमाशों की टोली दिखाई दी। इस दौरान रोकटोक पर उधर से फायरिंग की गई। पुलिस की ओर से भी सरकारी हथियारों से जवाबी फायरिंग की गई। इस घटना में मौके से सादाबाद के सतीश व महेश, सिकंदराराऊ के जसपाल व शहबाजपुर विजयगढ़ के शंकरपाल को दबोचा गया, जबकि जरारा खैर के रामप्रसाद व लोधा जॉफरी के बद्री भाग गए। मुकदमे के आधार पर सभी के खिलाफ चार्जशीट दायर की गई। पुलिस के एक दर्जन गवाह बनाए गए।
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इस मामले में 6 मार्च 2006 को पत्रावली पर सत्र परीक्षण के लिए आरोप तय हुए। मगर कई आरोपियों की पत्रावली अलग अलग कर दी गई। एक आरोपी शंकरपाल के खिलाफ जारी ट्रायल के दौरान मामले में कई गवाह तलाशने के प्रयास हुए। जिसमें कुछ की देहांत की सूचना मिली तो कुछ के सेवानिवृत्त के बाद सही पते पुलिस नहीं खोज पाई। पहले गवाह वादी की गवाही हुई और एक अन्य गवाह उस समय सिपाही रहे, बाद में दरोगा होकर सेवानिवृत्त हुए दिनेश की गवाही हुई। इसके आधार पर शंकरपाल को तीन वर्ष की सजा व 4500 रुपये जुर्माने से दंडित किया गया है।
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