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है बहुत अंधियार अब सूरज निकलना चाहिए: नीरज की कविता से पीएम मोदी ने विपक्ष पर साधा निशाना, पूरी कविता यह है
Fri, 07 Feb 2025 03:02 PM IST
चमन शर्मा
अमर उजाला नेटवर्क, अलीगढ़
अमर उजाला नेटवर्क, अलीगढ़
Published by: चमन शर्मा
Updated Fri, 07 Feb 2025 03:02 PM IST
सार
नरेंद्र मोदी ने जुलाई 2018 में मन की बात के 46वें संस्करण में भी कवि गोपाल दास नीरज को याद किया था। नीरज को श्रद्धांजलि देते हुए कहा था कि पिछले दिनों हमें नीरज जी छोड़ कर चले गए। उनकी कविता में हमें आशा की झलक दिखाई देती थी।
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पीएम मोदी ने संसद में पढ़ी नीरज की कविता
- फोटो : अमर उजाला
विस्तार
पीएम मोदी ने अलीगढ़ के रहने वाले पद्मभूषण गोपाल दास नीरज की पंक्ति'है बहुत अंधियार अब सूरज निकलना चाहिए..' के जरिये संसद में विपक्ष पर निशाना साधा। इसके जरिये उन्होंने आपातकाल के दौरान हुईं घटनाओं को भी रेखांकित किया। नीरज ने 1970 के आसपास यह पंक्तियां लिखी थीं जो बाद में आपातकाल के दौरान काफी लोकप्रिय हो गईं।
6 फरवरी को प्रधानमंत्री मोदी राज्यसभा में राष्ट्रपति के अभिभाषण धन्यवाद प्रस्ताव पर चर्चा का जवाब दे रहे थे। नीरज अलीगढ़ में जनकपुरी में रहते थे। उनका मकान अभी भी यहां पर है। उनके बेटे मिलन प्रभात गुंजन अब गुरुग्राम में आर्चिड पिटल्स सोसायटी में रहते हैं। फोन पर मिलन प्रभात गुंजन ने बताया कि है बहुत अंधियार.. कविता नीरज जी ने 1970 के आसपास लिखी थी। उस समय उनका एक संग्रह प्रकाशित हुआ था।
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6 फरवरी को प्रधानमंत्री मोदी राज्यसभा में राष्ट्रपति के अभिभाषण धन्यवाद प्रस्ताव पर चर्चा का जवाब दे रहे थे। नीरज अलीगढ़ में जनकपुरी में रहते थे। उनका मकान अभी भी यहां पर है। उनके बेटे मिलन प्रभात गुंजन अब गुरुग्राम में आर्चिड पिटल्स सोसायटी में रहते हैं। फोन पर मिलन प्रभात गुंजन ने बताया कि है बहुत अंधियार.. कविता नीरज जी ने 1970 के आसपास लिखी थी। उस समय उनका एक संग्रह प्रकाशित हुआ था।
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यह है कविता की पंक्तियां
है बहुत अंधियार अब सूरज निकलना चाहिए
जिस तरह से भी हो ये मौसम बदलना चाहिए
रोज़ जो चेहरे बदलते है लिबासों की तरह
अब जनाज़ा ज़ोर से उन का निकलना चाहिए
अब भी कुछ लोगो ने बेची है न अपनी आत्मा
ये पतन का सिलसिला कुछ और चलना चाहिए
फूल बन कर जो जिया है वो यहां मसला गया
ज़ीस्त को फ़ौलाद के सांचे में ढलना चाहिए
छीनता हो जब तुम्हारा हक़ कोई उस वक़्त तो
आंख से आंसू नहीं शोला निकलना चाहिए
दिल जवां सपने जवां मौसम जवां शब भी जवां
तुझ को मुझ से इस समय सूने में मिलना चाहिए
जिस तरह से भी हो ये मौसम बदलना चाहिए
रोज़ जो चेहरे बदलते है लिबासों की तरह
अब जनाज़ा ज़ोर से उन का निकलना चाहिए
अब भी कुछ लोगो ने बेची है न अपनी आत्मा
ये पतन का सिलसिला कुछ और चलना चाहिए
फूल बन कर जो जिया है वो यहां मसला गया
ज़ीस्त को फ़ौलाद के सांचे में ढलना चाहिए
छीनता हो जब तुम्हारा हक़ कोई उस वक़्त तो
आंख से आंसू नहीं शोला निकलना चाहिए
दिल जवां सपने जवां मौसम जवां शब भी जवां
तुझ को मुझ से इस समय सूने में मिलना चाहिए
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पीएम पहले भी मन की बात में कर चुके हैं नीरज का जिक्र
नरेंद्र मोदी ने जुलाई 2018 में मन की बात के 46वें संस्करण में भी कवि गोपाल दास नीरज को याद किया था। नीरज को श्रद्धांजलि देते हुए कहा था कि पिछले दिनों हमें नीरज जी छोड़ कर चले गए। उनकी कविता में हमें आशा की झलक दिखाई देती थी। उनकी कविता तथा गीत बेहद ही प्रेरणादायक हैं। वह युवाओं के मन में जोश भर देते हैं, जिससे काम करने की गति दोगुनी हो जाती है। नीरज जी की एक विशेषता रही थी, आशा, भरोसा, दृढसंकल्प, स्वयं पर विश्वास। मैं नीरज जी को आदरपूर्वक श्रद्धांजलि देता हूं।