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जेएन मेडिकल कॉलेज में हो सकती है प्लाज्मा थेरेपी की शुरुआत
Thu, 09 Jul 2020 09:09 PM IST
राजेश सिंह
न्यूूज डेस्क, अमर उजाला, अलीगढ़।
न्यूूज डेस्क, अमर उजाला, अलीगढ़।
Published by: राजेश सिंह
Updated Thu, 09 Jul 2020 09:09 PM IST
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दिल्ली के बाद बिहार में होगा प्लाज्मा थेरेपी का इस्तेमाल (फाइल फोटो)
- फोटो : PTI
अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय के जेएन मेडिकल कॉलेज में आने वाले समय में कोविड-19 के मरीजों के उपचार के लिए प्लाज्मा थेरेपी की शुरुआत हो सकती है। इसके लिए मेडिकल कॉलेज में इंडियन काउंसिल ऑफ मेडिकल रिसर्च से संपर्क किया है।
जेएन मेडिकल कॉलेज में प्लाज्मा थेरेपी की कोई सुविधा नहीं है। यहां पर कोविड-19 के मरीजों के लिए अलग से कोविड-19 वार्ड बनाया गया है। इसके अलावा मेडिकल कॉलेज में सबसे बड़ा काम कोविड-19 की जांच को लेकर किया जा रहा है। यहां पर दो मशीनों से अब तक 25 हजार से अधिक सैंपल की जांच की जा चुकी है। इसके साथ ही यहां गंभीर रूप से बीमार मरीजों के लिए वेंटिलेटर की सुविधा भी है, लेकिन प्लाज्मा थेरेपी अभी नहीं हो रही है। इसको लेकर मेडिकल कॉलेज आशावादी जरूर है।
क्या कहते हैं मेडिकल कॉलेज के प्रिंसिपल
मेडिकल कॉलेज के प्रिंसिपल प्रोफेसर शाहिद अली सिद्दीकी बताते हैं कि यह एक केमिकल ट्रायल है। अगर इंडियन काउंसिल ऑफ मेडिकल रिसर्च की तरफ से किसी प्रकार के कोई निर्देश आते हैं तो इसकी शुरुआत भविष्य में यहां पर हो सकती है।
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कैसे काम करती है प्लाजमा थेरेपी
जो लोग अपना प्लाज्मा डोनेट करते हैं, उनके प्लाज्मा को दूसरे मरीजों से ट्रांसफ्यूजन के माध्यम इंजेक्ट करके इलाज किया जाता है। इस तकनीक में एंटीबॉडी का इस्तेमाल होता है, जो किसी भी व्यक्ति के बॉडी में किसी वायरस या बैक्टीरिया के खिलाफ बनता है। इसी एंटीबॉडी को मरीज के शरीर में डाला जाता है। ऐसे में एक मेथड से जो व्यक्ति ठीक हुआ रहता है, ठीक वही मेथड दूसरे मरीज पर कार्य करता है और दूसरा मरीज भी ठीक होने लगता है।
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जेएन मेडिकल कॉलेज में प्लाज्मा थेरेपी की कोई सुविधा नहीं है। यहां पर कोविड-19 के मरीजों के लिए अलग से कोविड-19 वार्ड बनाया गया है। इसके अलावा मेडिकल कॉलेज में सबसे बड़ा काम कोविड-19 की जांच को लेकर किया जा रहा है। यहां पर दो मशीनों से अब तक 25 हजार से अधिक सैंपल की जांच की जा चुकी है। इसके साथ ही यहां गंभीर रूप से बीमार मरीजों के लिए वेंटिलेटर की सुविधा भी है, लेकिन प्लाज्मा थेरेपी अभी नहीं हो रही है। इसको लेकर मेडिकल कॉलेज आशावादी जरूर है।
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क्या कहते हैं मेडिकल कॉलेज के प्रिंसिपल
मेडिकल कॉलेज के प्रिंसिपल प्रोफेसर शाहिद अली सिद्दीकी बताते हैं कि यह एक केमिकल ट्रायल है। अगर इंडियन काउंसिल ऑफ मेडिकल रिसर्च की तरफ से किसी प्रकार के कोई निर्देश आते हैं तो इसकी शुरुआत भविष्य में यहां पर हो सकती है।
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कैसे काम करती है प्लाजमा थेरेपी
जो लोग अपना प्लाज्मा डोनेट करते हैं, उनके प्लाज्मा को दूसरे मरीजों से ट्रांसफ्यूजन के माध्यम इंजेक्ट करके इलाज किया जाता है। इस तकनीक में एंटीबॉडी का इस्तेमाल होता है, जो किसी भी व्यक्ति के बॉडी में किसी वायरस या बैक्टीरिया के खिलाफ बनता है। इसी एंटीबॉडी को मरीज के शरीर में डाला जाता है। ऐसे में एक मेथड से जो व्यक्ति ठीक हुआ रहता है, ठीक वही मेथड दूसरे मरीज पर कार्य करता है और दूसरा मरीज भी ठीक होने लगता है।