अमर उजाला पड़ताल: जश्न के चंद घंटे बाद ही जिंदगी हार गए पौधे, कुछ सूखे तो कई जगह उखड़े पड़े हैं
पौधारोपण के बाद पौधा सूखा, कोई उखाड़ ले गया या पशु पौधे को खा गया, इसकी पड़ताल करने के लिए अमर उजाला की टीम उन जगहों पर गई, जहां अधिकारी और नेताओं ने पौधारोपण किया। वहां जब हाल देखा तो आंखें भर आईं, देखिए कैसे जिंदगी हार गए पौधे ...
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माहौल जश्न जैसा ही था। वन महोत्सव की तैयारियां भी पिछले कई रोज से चल रहीं थीं। कहीं अफसरों से पौधा लगवाकर महोत्सव की शुरूआत की जानी थी तो कहीं जनप्रतिनिधियों के हाथों। 20 जुलाई को तो पौधरोपण करते लोगों की तस्वीरें और वीडियो सोशल मीडिया पर छाए रहे। लेकिन यह क्या बाद में पौधों को देखने कोई पहुंचा ही नहीं। 21 जुलाई को जब अमर उजाला की टीम ने पौधरोपण वाले कुछ स्थानों पर जाकर पड़ताल की तो तस्वीरें वाकई परेशान करने वालीं थीं। कहीं पौधे उखड़े पड़े थे। कहीं गड्ढे के पास पड़े थे। तो कहीं सूख चुके थे।
नगर निगम ने मथुरा रोड पर आसना में करीब छह हजार पौधे और हाजीपुर चौहट्टा में आठ हजार पौधे रोपे थे। यहां पर महापौर प्रशांत सिंघल व शहर विधायक मुक्ता राजा की देखरेख में कार्यक्रम हुआ था। दूसरे दिन अधिकांश पौधे एक कोने में पड़े मिले। सैकड़ों सूख गए थे।
कलेक्ट्रेट के सामने नकवी पार्क में उद्यान विभाग द्वारा रोपे गए पौधे भी दम तोड़ते नजर आए। अतरौली, छर्रा, गभाना आदि स्थानों पर रोपे गए पौधे धूप व पानी के अभाव में मुरझा गए हैं। प्रदेश के गन्ना एवं चीनी मिल मंत्री लक्ष्मीनारायण चौधरी ने अफसरों के साथ कासिमपुर में पौधारोपण किया था, वहां पर वन विभाग के कर्मचारी इन पौधों की देखरेख करते मिले।
पौधरोपण कागजों पर नहीं, वास्तविकता में होना चाहिए। जब तक पौधों को ट्री गार्ड या सुरक्षित चहारदीवारी के अंदर नहीं लगाया जाएगा, तब तक पौधरोपण अभियान की यही स्थिति रहेगी। निजी भागीदारी व जिम्मेदारी तय करने से अच्छे परिणाम मिलेंगे।- सुबोध नंदन, पर्यावरणविद्
इस बार वार्षिक पौधों की प्रजाति के हिसाब से भूमि का चयन किया गया है, जो पौधा जैसी भूमि पर वृद्धि करता है उसी हिसाब से पौधरोपण किया गया है। वर्षाकाल में पौधरोपण करने के पीछे भी यही वजह है कि पानी के अभाव में पौधे सूखे नहीं। डेढ़ से दो माह तक बारिश के पानी से पौधे की जड़ बढ़नी शुरू हो जाती है। पौधरोपण के साथ ही संबंधित विभागों को उनकी देखरेख करने का जिम्मा सौंपा गया है। पौधों की जिओ टैगिंग भी की जा रही है।- रजनीकांत मित्तल, प्रभागीय वन अधिकारी।
ये है पौधरोपण का दावा
वन विभाग ने 832844, पर्यावरण विभाग ने 221000, ग्राम्य विकास ने 2217521, राजस्व विभाग ने 165000, पंचायतीराज ने 200000, आवास विकास विभाग ने 8000, औद्योगिक विकास ने 10000, नगर विकास ने 31000, लोक निर्माण ने 17000, सिंचाई/जल शक्ति विभाग ने 18000, कृषि विभाग ने 425000, पशुपालन विभाग ने 9000, सहकारिता विभाग ने 8680, उद्योग विभाग ने 13000, विद्युत/ऊर्जा विभाग ने 6720, शिक्षा विभाग (अ) माध्यमिक शिक्षा ने 12000, (ब) बेसिक शिक्षा विभाग ने 20000, (स) प्राविधिक शिक्षा विभाग ने 7000, (द) उच्च शिक्षा विभाग ने 26000, श्रम विभाग ने 4300, स्वास्थ्य विभाग ने 13000, परिवहन विभाग ने 5550, रेलवे ने 14000, रक्षा विभाग ले 5000, उद्यान विभाग ने 243000, पुलिस/गृह विभाग ने 11800 समेत कुल 44,28,290 पौधे रोपने का दावा किया गया है।
जिले में इस तरह वर्षवार हुआ पौधरोपण
वर्ष, कुल पौधारोपण
- 2020-21, 30.33 लाख
- 2021-22, 36.7 लाख
- 2022- 23, 45.98 लाख
- 2023-24, 46.46 लाख
- 2024-25 44.28 लाख