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बिन बारिश के मौसम में पौधारोपण, कैसे जिंदा बचेंगे पौधे
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रिंकू शर्मा, अलीगढ़।
जिले में वातावरण को हरा- भरा बनाने के लिए रोपे गए लाखों पौधों की सिंचाई के लिए पर्याप्त संसाधन उपलब्ध नहीं है। गर्मी के मौसम में पौधे रोपना और अब इन पौधों के पेड़ बनने तक देखरेख करना चुनौतीपूर्ण होगा। वन महोत्सव के तहत जिले में हमेशा बारिश होने के बाद ही पौधारोपण होता रहा है।
ऐसा पहली बार हुआ है, जब भीषण गर्मी के दौरान पौधारोपण की शुरुआत की गई है। पिछले तीन दिन में लाखों की संख्या में पौधे रोपे गए हैं। बिन बारिश भीषण गर्मी में इन पौधों के संरक्षण को लेकर कितनी गंभीरता बरती जाएगी, यह भविष्य ही बताएगा। फिलहाल वन विभाग ने अपने पौधारोपण को मिले लक्ष्य को पूरा होने का दावा किया है।
मौसम नहीं है अनुकूल
वन विभाग के अफसरों के अनुसार पौधारोपण के लिए यह मौसम अनुकूल नहीं है। बारिश के बाद पौधरोपण होने से पौधों को पर्याप्त नमी मिल जाती है। छोटे पौधों की यदि समय से सिंचाई न की जाए तो न केवल उनका विकास रुक जाता है बल्कि पौधे के मरने की संभावना भी अधिक होती है।
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भगवान भरोसे छोड़ दिए पौधे
वन विभाग ने कुछ पौधे की सिंचाई की व्यवस्था कर ली है लेकिन जंगल में लगे लाखों पौधों को यूं ही भगवान भरोसे छोड़ दिया है। इन हालातों में रोपित किए गए कोमल पौधे भीषण गर्मी के मौसम में शायद ही जिंदा रह पाएं। वन क्षेत्र बढ़ाने के लिए शासन स्तर से खाली जमीन में पौधारोपण कराया गया है। सड़क के किनारे तो पौधे लगवाए गए हैं।
हरित पट्टी भी विकसित करने की योजना है। इन दिनों गर्मी के मौसम में पौधों की सिंचाई कर पाना चुनौती है। विभागीय अफसरों का कहना है कि जो भी संसाधन हैं उनके अनुसार टैंकर से पौधों की सिंचाई की जा रही है। अधिकांश पौधों को पानी के लिए इंतजाम नहीं किए है। यही हाल रहा तो लगाए गए इन लाखों पौधों को बचाना मुश्किल हो जाएगा।
- सामान्य पौधरोपण में सिंचाई के लिए आस- पास के नहर, रजवाह, सरकारी नलकूप एवं निजी बोरिंग के माध्यम से सिंचाई के लिए कहा गया है। वहीं सड़क व हरी पत्तियों के पौधों की सिंचाई के लिए टैंकर की व्यवस्था की गई है। जिससे कि इन पौधों की सिंचाई होती रहे। जरूरत पड़ने पर और भी टैंकर मंगाए जाएंगे। सभी पौधों की देखरेख के साथ ही उनकी जीओ टेगिंग भी की गई है।
- दिवाकर वशिष्ठ, प्रभागीय वनाधिकारी अलीगढ़
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जिले में वातावरण को हरा- भरा बनाने के लिए रोपे गए लाखों पौधों की सिंचाई के लिए पर्याप्त संसाधन उपलब्ध नहीं है। गर्मी के मौसम में पौधे रोपना और अब इन पौधों के पेड़ बनने तक देखरेख करना चुनौतीपूर्ण होगा। वन महोत्सव के तहत जिले में हमेशा बारिश होने के बाद ही पौधारोपण होता रहा है।
ऐसा पहली बार हुआ है, जब भीषण गर्मी के दौरान पौधारोपण की शुरुआत की गई है। पिछले तीन दिन में लाखों की संख्या में पौधे रोपे गए हैं। बिन बारिश भीषण गर्मी में इन पौधों के संरक्षण को लेकर कितनी गंभीरता बरती जाएगी, यह भविष्य ही बताएगा। फिलहाल वन विभाग ने अपने पौधारोपण को मिले लक्ष्य को पूरा होने का दावा किया है।
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मौसम नहीं है अनुकूल
वन विभाग के अफसरों के अनुसार पौधारोपण के लिए यह मौसम अनुकूल नहीं है। बारिश के बाद पौधरोपण होने से पौधों को पर्याप्त नमी मिल जाती है। छोटे पौधों की यदि समय से सिंचाई न की जाए तो न केवल उनका विकास रुक जाता है बल्कि पौधे के मरने की संभावना भी अधिक होती है।
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भगवान भरोसे छोड़ दिए पौधे
वन विभाग ने कुछ पौधे की सिंचाई की व्यवस्था कर ली है लेकिन जंगल में लगे लाखों पौधों को यूं ही भगवान भरोसे छोड़ दिया है। इन हालातों में रोपित किए गए कोमल पौधे भीषण गर्मी के मौसम में शायद ही जिंदा रह पाएं। वन क्षेत्र बढ़ाने के लिए शासन स्तर से खाली जमीन में पौधारोपण कराया गया है। सड़क के किनारे तो पौधे लगवाए गए हैं।
हरित पट्टी भी विकसित करने की योजना है। इन दिनों गर्मी के मौसम में पौधों की सिंचाई कर पाना चुनौती है। विभागीय अफसरों का कहना है कि जो भी संसाधन हैं उनके अनुसार टैंकर से पौधों की सिंचाई की जा रही है। अधिकांश पौधों को पानी के लिए इंतजाम नहीं किए है। यही हाल रहा तो लगाए गए इन लाखों पौधों को बचाना मुश्किल हो जाएगा।
- सामान्य पौधरोपण में सिंचाई के लिए आस- पास के नहर, रजवाह, सरकारी नलकूप एवं निजी बोरिंग के माध्यम से सिंचाई के लिए कहा गया है। वहीं सड़क व हरी पत्तियों के पौधों की सिंचाई के लिए टैंकर की व्यवस्था की गई है। जिससे कि इन पौधों की सिंचाई होती रहे। जरूरत पड़ने पर और भी टैंकर मंगाए जाएंगे। सभी पौधों की देखरेख के साथ ही उनकी जीओ टेगिंग भी की गई है।
- दिवाकर वशिष्ठ, प्रभागीय वनाधिकारी अलीगढ़