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Aligarh News: नयावास में जाटव समाज के लोगों ने घरों पर लगाए पलायन के पोस्टर
Sun, 24 Aug 2025 01:41 AM IST
अलीगढ़ ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, अलीगढ़
संवाद न्यूज एजेंसी, अलीगढ़
Updated Sun, 24 Aug 2025 01:41 AM IST
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गांव नयावास में दो जातियों के लोगों के बीच काफी समय से चले आ रहे विवाद में जाटव समाज के लोगों ने शुक्रवार रात को पलायन के पोस्टर लगा दिए हैं। पुलिस का कहना है कि गांव में जाटव समाज के लोगों का बाहुल्य है और दूसरा पक्ष सविता समाज है। पोस्टर लगाकर दबाव बनाने की कोशिश की जा रही है।
इसकी सूचना पर पुलिस भी गांव में पहुंची और दोनों पक्षों के लोगों से बात की। पुलिस और ग्रामीणों के अनुसार गांव में जाटव समाज के 100 से अधिक मकान है। सविता समाज के लोगों के 15 मकान है। करीब 24 साल पहले सविता समाज के लोगों ने गांव के मुख्य रास्ते के पास एक मंदिर बनावाया था, इसके पास से एक कुएं की ओर जाने वाले रास्ते पर दोनों पक्षों के बीच विवाद है।
जाटव समाज के निरोत्तम सिंह, बाबूलाल और जयंती प्रसाद का आरोप है कि मंदिर के निर्माण में उन्होंने भी सहयोग दिया था। मंदिर के पास एक कुआं है, जिसे दूसरे पक्ष के एक व्यक्ति ने सांठगांठ कर उसे अपने खेत में दर्ज करा दिया। मंदिर से कुएं की ओर जाने वाले रास्ते पर दो माह पहले दीवार खड़ी कर दी थी, जबकि यहां गांव के सभी लोग शादी विवाह और अन्य आयोजन करते रहे हैं। पुलिस पर भी उन्होंने उत्पीड़न करने और दूसरे पक्ष से मिलीभगत का आरोप लगाया है।
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सविता समाज के मनोज कुमार का कहना है कि मंदिर उनकी गाटा संख्या 327 में है, जिसे वर्ष 2001 में निजी खर्चे पर बनाया गया था। यहां पर उनके बुजुर्गों की तीन समाधियां बनी हुई हैं। मंदिर से करीब 25- 30 मीटर दूरी पर अलग गाटा संख्या 3507 में कुआं बना हुआ है। विवाद चार पांच साल पहले तब शुरू हुआ, जब नगर पंचायत ने करीब 11 लाख की लागत से मंदिर परिसर में इंटरलॉकिंग कार्य कराने का टेंडर निकाला था, मंदिर में जगह कम देख उन्होंने जगह बढ़ाने के उद्देश्य से खेत का कुछ और हिस्सा मंदिर में मिला लिया। भराव की मिट्टी रोकने के लिए तीन-चार फीट की चहारदीवारी कर दी थी, जिसे जाटव पक्ष ने तोड़ दिया था। इस मामले में 22 लोगों के खिलाफ रिपोर्ट दर्ज कराई थी। राजस्व विभाग ने मंदिर उनकी निजी भूमि और कुआं नॉन जेड ए श्रेणी में बताया है।
-पूरे गांव में जाटव समाज का बाहुल्य है और सविता समाज के लोगों की संख्या कम है, ऐसे में उत्पीड़न से पलायन की बात बेमानी है। राजस्व विभाग द्वारा लगवाई दीवार तोड़ दिया था, जिसमें मुकदमा दर्ज है। अब इसी मामले में दबाव बनाने की कोशिश की जा रही है। थानाध्यक्ष ने गांव में दोनों पक्षों से जाकर बात की है। राजस्व विभाग को इस मामले में स्थिति स्पष्ट करनी है, जो भी निर्णय होगा, वही मान्य होगा। राजीव द्विवेदी, सीओ अतरौली
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इसकी सूचना पर पुलिस भी गांव में पहुंची और दोनों पक्षों के लोगों से बात की। पुलिस और ग्रामीणों के अनुसार गांव में जाटव समाज के 100 से अधिक मकान है। सविता समाज के लोगों के 15 मकान है। करीब 24 साल पहले सविता समाज के लोगों ने गांव के मुख्य रास्ते के पास एक मंदिर बनावाया था, इसके पास से एक कुएं की ओर जाने वाले रास्ते पर दोनों पक्षों के बीच विवाद है।
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जाटव समाज के निरोत्तम सिंह, बाबूलाल और जयंती प्रसाद का आरोप है कि मंदिर के निर्माण में उन्होंने भी सहयोग दिया था। मंदिर के पास एक कुआं है, जिसे दूसरे पक्ष के एक व्यक्ति ने सांठगांठ कर उसे अपने खेत में दर्ज करा दिया। मंदिर से कुएं की ओर जाने वाले रास्ते पर दो माह पहले दीवार खड़ी कर दी थी, जबकि यहां गांव के सभी लोग शादी विवाह और अन्य आयोजन करते रहे हैं। पुलिस पर भी उन्होंने उत्पीड़न करने और दूसरे पक्ष से मिलीभगत का आरोप लगाया है।
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सविता समाज के मनोज कुमार का कहना है कि मंदिर उनकी गाटा संख्या 327 में है, जिसे वर्ष 2001 में निजी खर्चे पर बनाया गया था। यहां पर उनके बुजुर्गों की तीन समाधियां बनी हुई हैं। मंदिर से करीब 25- 30 मीटर दूरी पर अलग गाटा संख्या 3507 में कुआं बना हुआ है। विवाद चार पांच साल पहले तब शुरू हुआ, जब नगर पंचायत ने करीब 11 लाख की लागत से मंदिर परिसर में इंटरलॉकिंग कार्य कराने का टेंडर निकाला था, मंदिर में जगह कम देख उन्होंने जगह बढ़ाने के उद्देश्य से खेत का कुछ और हिस्सा मंदिर में मिला लिया। भराव की मिट्टी रोकने के लिए तीन-चार फीट की चहारदीवारी कर दी थी, जिसे जाटव पक्ष ने तोड़ दिया था। इस मामले में 22 लोगों के खिलाफ रिपोर्ट दर्ज कराई थी। राजस्व विभाग ने मंदिर उनकी निजी भूमि और कुआं नॉन जेड ए श्रेणी में बताया है।
-पूरे गांव में जाटव समाज का बाहुल्य है और सविता समाज के लोगों की संख्या कम है, ऐसे में उत्पीड़न से पलायन की बात बेमानी है। राजस्व विभाग द्वारा लगवाई दीवार तोड़ दिया था, जिसमें मुकदमा दर्ज है। अब इसी मामले में दबाव बनाने की कोशिश की जा रही है। थानाध्यक्ष ने गांव में दोनों पक्षों से जाकर बात की है। राजस्व विभाग को इस मामले में स्थिति स्पष्ट करनी है, जो भी निर्णय होगा, वही मान्य होगा। राजीव द्विवेदी, सीओ अतरौली