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Aligarh News: जन औषधि केंद्र से नहीं मिलने पर महंगी दवाएं खरीद रहे मरीज

Sun, 14 Sep 2025 02:16 AM IST
Aligarh Bureau अलीगढ़ ब्यूरो
Updated Sun, 14 Sep 2025 02:16 AM IST
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Patients are buying expensive medicines when they are not getting them from Jan Aushadhi Kendra
बागला जिला अस्पताल प्रांगण ​स्थित प्रधानमंत्री जन औष​धि केंद्र। संवाद - फोटो : samvad
जन औषधि केंद्रों पर सभी दवाएं न मिलने से मरीजों को मायूस लौटना पड़ रहा है। उन्हें मेडिकल स्टोरों से महंगी दवाएं खरीदनी पड़ रही है। इधर, जन औषधि केंद्रों के संचालकों का कहना है कि सरकारी अस्पतालों के चिकित्सक भी जेनेरिक दवाएं नहीं लिख रहे हैं। जिससे उनकी दुकानदारी न के बराबर है।
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जिले में वर्ष 2016 में पीएम जन औषधि केंद्र योजना के तहत 16 केंद्र खोले गए थे। करीब चार साल बाद इनमें से छह केंद्र बंद हो गए। इन केंद्र संचालकों के लाइसेंस भी निरस्त कर दिए गए। इसके बाद फिर से केंद्रों को खोलने की कवायद की गई। वर्तमान में जिले में 18 जन औषधि केंद्र पंजीकृत हैं। इनमें से सहपऊ का औषधि केंद्र अस्थाई रूप से बंद है। केंद्र संचालकों का कहना है कि जिले में गाजियाबाद वेयर हाउस से दवाएं आती हैं, नजदीक में दवाओं का वेयर हाउस नहीं है। इस कारण दवा ऑर्डर करने पर महज कुछ ही दवाएं मिलती हैं। दवाओं का ऑर्डर पांच से 10 दिन में हाथरस पहुंच पाता है।
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केंद्र संचालकों का कहना है कि शुरूआत में तो चिकित्सक खूब जेनेरिक दवाएं लिखते थे, लेकिन अब यह दवाएं बहुत कम लिखीं जा रहीं हैं। प्राइवेट डॉक्टर तो लिखते ही नहीं, सरकारी अस्पताल के पर्चे पर भी यह सस्ती दवाएं अपनी जगह नहीं बना पा रहीं हैं।
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दुकान का किराया निकालना मुश्किल
केंद्र संचालकों की मानें तो दुकान का किराया चार से पांच हजार रुपये महीना होता है। पूरे माह में प्रतिदिन औसतन दो से तीन हजार रुपये की दवा ही बिक पाती है। इस कारण महज 200 से 300 रुपये तक का कमीशन बन पाता है। महीने में 25 दिन केंद्र खुलने पर पांच हजार रुपये का मुनाफा निकल पाता है। इस कारण किराया भी निकालना मुश्किल पड़ जाता है।
-----बयान
दवाओं का स्टॉक आने में बहुत समय लग जाता है। कुछ चिकित्सक तो केंद्र पर मिलने वाली दवाओं को लिखते हैं, बाकी नहीं लिखते हैं। अक्सर बीपी, शुगर जैसी दवाओं का स्टॉक गाजियाबाद से नहीं मिल पाता है। इस कारण मरीज लौट जाते हैं।
कपिल, केंद्र संचालक जिला अस्पताल।
अब दुकान पर अधिक बिक्री नहीं होती। चिकित्सक जेनेरिक दवा लिखते नहीं हैं। गाजियाबाद स्टोर से दवाएं भी देरी से मिल पाती हैं, तब तक ग्राहक लौट जाते हैं। फिलहाल अस्थाई रूप से केंद्र बंद कर दिया है।

-राकेश उपाध्याय, केंद्र संचालक।


ऐसे जनऔषधि केंद्र और खोले जाने चाहिए। दवाएं न मिलने से निराशा होती है, मजबूरी में मेडिकल स्टोर से महंगी दवा खरीदनी पड़ती है।
-संजू, कांशाीराम कॉलोनी।
इन जनऔषधि केंद्रों पर अक्सर चिकित्सक द्वारा लिखी दवाएं नहीं मिल पाती हैं। उसी सॉल्ट से मिलती-जुलती दूसरी दवा लेनी पड़ती है।
-श्याम बिहारी, मुरसान।


प्रधानमंत्री जनऔषधि केंद्र योजना के तहत जिले में फिलहाल 18 केंद्र संचालित हैं। अभी फिलहाल में किसी भी केंद्र के बंद होने की जानकारी नहीं है। छह दुकानों के संचालकों ने लाइसेंस सरेंडर किए थे। दवाओं की उपलब्धता पर बहुत जोर दिया जा रहा है।
-राजकुमार शर्मा, औषधि निरीक्षक हाथरस।
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