गभाना टोल प्लाजा निर्माण एवं वसूली को लेकर सरकार बनाम गाजियाबाद अलीगढ़ एक्सप्रेस वे प्राइवेट लिमिटेड के मामले में सुनवाई करते हुए जिलाधिकारी की अदालत ने फैसला कर दिया है। फैसले के अनुसार गाजियाबाद अलीगढ़ एक्सप्रेस वे प्राइवेट लिमिटेड को इस प्रकरण में स्टांप शुल्क के बकाया के रूप में 45.68 करोड़ रुपये का भुगतान करना होगा। वर्ष 2010 से चल रहे इस प्रकरण में 18 फीसदी सालाना ब्याज और 45 लाख रुपये का भारीभरकम जुर्माना भी शामिल है।
प्रकरण के अनुसार वर्ष 2010 में नेशनल हाईवे अथारिटी ने गाजियाबाद अलीगढ़ एक्सप्रेस वे प्राइवेट लिमिटेड (बसंत विहार) से सौ रुपये के स्टांप पर करार किया था, जिसके अनुसार कंपनी को फोरलेन निर्माण करने और 24 साल तक मरम्मत व वसूली का काम सौंपा गया था। इस काम में सरकारी राजस्व के तहत स्टांप शुल्क देयता बन रही थी, जिसको अदा नहीं किया गया। वर्ष 2016 में जांच पड़ताल शुरू हुई तो तत्कालीन एआईजी स्टांप ने जांच में मामला सही पाया। जांच में पता चला कि उक्त करार की कीमत लगभग 1141 करोड़ रुपये बैठ रही है। जिस पर दो फीसदी स्टांप शुल्क और दो फीसदी विकास शुल्क लगाया जाना है, जो लगभग 45 करोड़ रुपये होता है। इस मामले में जिलाधिकारी की अदालत से राजस्व विभाग को वसूली के निर्देश दिए गए हैं।