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अलीगढ़ : हरदुआगंज तापीय परियोजना में बचा सिर्फ चार दिन का कोयला
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हरदुआगंज तापीय परियोजना में कोयले का सिर्फ चार दिन का स्टॉक उपलब्ध है। कोयले की कमी के कारण 110 मेगावाट की एक यूनिट बंद हो चुकी है। हालांकि, अफसरों ने दावा किया है कि पांच रैक कोयला जल्द आने वाला है। इससे स्थिति में सुधार होने की उम्मीद है। नियमित आपूर्ति सुनिश्चित होने के बाद ही 110 मेगावाट की बंद यूनिट में उत्पादन शुरू हो सकेगा। फिलहाल परियोजना में क्षमता से करीब 200 मेगावाट कम बिजली उत्पादन हो रहा है।
हरदुआगंज तापीय परियोजना में कोयला की कमी की वजह से 110 मेगावाट की यूनिट छह अप्रैल 2022 को बंद हो गई थी। परियोजना की सबसे बड़ी 660 मेगावाट की यूनिट के साथ ही 250-250 मेगावाट की दो यूनिटों में बिजली का उत्पादन हो रहा है। यहां पर कुल 1270 मेगावाट का उत्पादन होता है। कोयला संकट के कारण क्षमता से करीब दो सौ मेगावाट कम बिजली उत्पादन (करीब 1070 मेगावाट) हो रहा है। 660 मेगावाट की यूनिट को पूरी क्षमता से चलाने के लिए प्रति दिन करीब नौ हजार मीट्रिक टन कोयले की जरूरत पड़ती है। सभी यूनिटों को चलाने के लिए प्रति दिन 22 हजार मीट्रिक टन से अधिक कोयले की जरूरत है।
हरदुआगंज तापीय परियोजना के जीएम एसके सिंह ने बताया कि अभी कोयले का चार दिन का स्टॉक उपलब्ध है। चार-पांच रैक कोयला और आ रहा है। एक रैक में 3800 से 4000 मीट्रिक टन कोयला होता है। उन्होंने बताया कि 110 मेगावाट की एक यूनिट को छोड़कर अन्य सभी यूनिट पूरी क्षमता से चल रहे हैं। नियमित आपूर्ति के बाद 110 मेगावाट की यूनिट भी चालू करा देंगे। अप्रैल में अब तक दो लाख मीट्रिक टन कोयला आ चुका है।
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शहर एवं ग्रामीण क्षेत्रों में हो रही अघोषित कटौती
कोयला संकट की वजह से उत्पादन में गिरावट से बिजली संकट शुरू हो गया है। जनपद में उसका असर भी दिखने लगा है। शहर, कस्बों एवं ग्रामीण क्षेत्रों में अघोषित कटौती होने लगी है।
पहले मंडल एवं जिला मुख्यालय को 24 घंटे, तहसील को 22 घंटे एवं गांवों को 18 घंटे बिजली आपूर्ति दी जा रही थी। कोयला संकट गहराने के बाद कटौती शुरू हो गई है। अधिकारी भी स्वीकार रहे हैं कि वर्तमान समय में शहरी क्षेत्र में साढ़े 23 घंटे की आपूर्ति हो रही है जबकि अलग-अलग क्षेत्र में टुकड़ों में एक से लेकर दो घंटे तक की कटौती हो रही है। कस्बों एवं गांवों में भी एक से तीन घंटे या उससे अधिक की अघोषित कटौती हो रही है। रेलवे रोड के व्यवसायी डॉ. संजय सिंघल एवं अचलताल के अजय गुप्ता लिथो कहते हैं कि अलग-अलग समय में टुकड़ों में आपूर्ति बाधित हो रही है। पहले की तुलना में बिजली की समस्या बढ़ गई है।
क्या कहते हैं अधिकारी....
शहरी क्षेत्र में 24 घंटे में साढ़े 23 घंटे आपूर्ति हो रही है। शहरी क्षेत्र में करीब 3200 ट्रांसफार्मर हैं, जिनका मरम्मत का कार्य चल रहा है। स्थानीय गड़बड़ी की वजह से कभी-कभी ब्रेक डाउन लेना पड़ रहा है। कोयला संकट का खास असर नहीं है।
- एसके जैन, अधीक्षण अभियंता, शहरी क्षेत्र
कस्बा एवं ग्रामीण क्षेत्रों में बिजली की आपूर्ति हो रही है। कोयला संकट की वजह से अभी आपूर्ति बाधित नहीं हो रहा है। ग्रामीण क्षेत्रों में साढ़े 17 घंटे और कस्बों में साढ़े 21 घंटे की आपूर्ति हो रही है। स्थानीय फाल्ट की वजह से कभी-कभी दिक्कत होती है।
- ई. राघवेंद्र, अधीक्षण अभियंता, ग्रामीण क्षेत्र
ग्रामीण क्षेत्रों में ये है बिजली आपूर्ति की स्थिति
- चंडौस कस्बा एवं देहात में 18 घंटे विद्युत आपूर्ति हो रही है। अंडर ग्राउंड केबल खराब होने के कारण कस्बा चंडौस में पिछले 15 घंटे से आपूर्ति बंद है। भीषण गर्मी में लोग परेशान हैं। कस्बा व देहात में 18 घंटे आपूर्ति दी जा रही है।
--
- जट्टारी कस्बे में करीब 18 घंटे बिजली की आपूर्ति मिल रही है। देहात के फाजलपुर गंगापुर दुर्गा आदि गांव में 14 घंटे ही बिजली की आपूर्ति हो रही है। कस्बे में रात्रि में विद्युत आपूर्ति बाधित होने से लोगों की नींद खराब हो रही है।
- अतरौली शहर में 20 से 21 घंटे और देहात में 17 से 18 घंटे बिजली आपूर्ति हो रही है। किसी तरह की गड़बड़ी आने पर आधा घंटा या एक घंटे तक की कटौती हो रही है।
- गभाना कस्बे में 20 से 21 घंटे की बिजली आपूर्ति हो रही है। देहात फीडर पर 17-18 घंटे आपूर्ति हो रही है। लाइन में कमी आने पर आपूर्ति बाधित होती है।
- अकराबाद, गोपी व नगला बुद्धा फीडर को 18 घंटे बिजली आपूर्ति दी जा रही है। इसी के साथ कस्बा पिलखना को 20 घंटे की आपूर्ति मिल रही है।
- विजयगढ़ के ग्रामीण फीडर पर 18 घंटे बिजली आपूर्ति दी जा रही है। नगर पंचायत टाउन को 20 घंटे आपूर्ति दी जा रही है। रात्रि में एक घंटे या दो घंटे की कटौती हो रही है। उसकी आपूर्ति दिन में होती है।
- बरला कस्बा और गांव में 18 घंटे बिजली की आपूर्ति हो रही है। गाजीपुर बिजलीघर एवं अरनी बिजलीघर पर भी करीब 18 घंटे आपूर्ति दी जा रही है। नलकूप पर 10 घंटे आपूर्ति हो रही है।
- गोंडा कस्बा स्थित विद्युत उपकेंद्र से जुडे़ देहात के गांव और कस्बे में करीब छह घंटे से अधिक की कटौती हो रही है। विभागीय रोस्टर के अनुसार सप्लाई की जा रही है, लाइनलॉस और फॉल्ट के कारण विद्युत कटौती अलग से की जा रही है। कटौती से आमजन गर्मी में व्याकुल है।
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हरदुआगंज तापीय परियोजना में कोयला की कमी की वजह से 110 मेगावाट की यूनिट छह अप्रैल 2022 को बंद हो गई थी। परियोजना की सबसे बड़ी 660 मेगावाट की यूनिट के साथ ही 250-250 मेगावाट की दो यूनिटों में बिजली का उत्पादन हो रहा है। यहां पर कुल 1270 मेगावाट का उत्पादन होता है। कोयला संकट के कारण क्षमता से करीब दो सौ मेगावाट कम बिजली उत्पादन (करीब 1070 मेगावाट) हो रहा है। 660 मेगावाट की यूनिट को पूरी क्षमता से चलाने के लिए प्रति दिन करीब नौ हजार मीट्रिक टन कोयले की जरूरत पड़ती है। सभी यूनिटों को चलाने के लिए प्रति दिन 22 हजार मीट्रिक टन से अधिक कोयले की जरूरत है।
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हरदुआगंज तापीय परियोजना के जीएम एसके सिंह ने बताया कि अभी कोयले का चार दिन का स्टॉक उपलब्ध है। चार-पांच रैक कोयला और आ रहा है। एक रैक में 3800 से 4000 मीट्रिक टन कोयला होता है। उन्होंने बताया कि 110 मेगावाट की एक यूनिट को छोड़कर अन्य सभी यूनिट पूरी क्षमता से चल रहे हैं। नियमित आपूर्ति के बाद 110 मेगावाट की यूनिट भी चालू करा देंगे। अप्रैल में अब तक दो लाख मीट्रिक टन कोयला आ चुका है।
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शहर एवं ग्रामीण क्षेत्रों में हो रही अघोषित कटौती
कोयला संकट की वजह से उत्पादन में गिरावट से बिजली संकट शुरू हो गया है। जनपद में उसका असर भी दिखने लगा है। शहर, कस्बों एवं ग्रामीण क्षेत्रों में अघोषित कटौती होने लगी है।
पहले मंडल एवं जिला मुख्यालय को 24 घंटे, तहसील को 22 घंटे एवं गांवों को 18 घंटे बिजली आपूर्ति दी जा रही थी। कोयला संकट गहराने के बाद कटौती शुरू हो गई है। अधिकारी भी स्वीकार रहे हैं कि वर्तमान समय में शहरी क्षेत्र में साढ़े 23 घंटे की आपूर्ति हो रही है जबकि अलग-अलग क्षेत्र में टुकड़ों में एक से लेकर दो घंटे तक की कटौती हो रही है। कस्बों एवं गांवों में भी एक से तीन घंटे या उससे अधिक की अघोषित कटौती हो रही है। रेलवे रोड के व्यवसायी डॉ. संजय सिंघल एवं अचलताल के अजय गुप्ता लिथो कहते हैं कि अलग-अलग समय में टुकड़ों में आपूर्ति बाधित हो रही है। पहले की तुलना में बिजली की समस्या बढ़ गई है।
क्या कहते हैं अधिकारी....
शहरी क्षेत्र में 24 घंटे में साढ़े 23 घंटे आपूर्ति हो रही है। शहरी क्षेत्र में करीब 3200 ट्रांसफार्मर हैं, जिनका मरम्मत का कार्य चल रहा है। स्थानीय गड़बड़ी की वजह से कभी-कभी ब्रेक डाउन लेना पड़ रहा है। कोयला संकट का खास असर नहीं है।
- एसके जैन, अधीक्षण अभियंता, शहरी क्षेत्र
कस्बा एवं ग्रामीण क्षेत्रों में बिजली की आपूर्ति हो रही है। कोयला संकट की वजह से अभी आपूर्ति बाधित नहीं हो रहा है। ग्रामीण क्षेत्रों में साढ़े 17 घंटे और कस्बों में साढ़े 21 घंटे की आपूर्ति हो रही है। स्थानीय फाल्ट की वजह से कभी-कभी दिक्कत होती है।
- ई. राघवेंद्र, अधीक्षण अभियंता, ग्रामीण क्षेत्र
ग्रामीण क्षेत्रों में ये है बिजली आपूर्ति की स्थिति
- चंडौस कस्बा एवं देहात में 18 घंटे विद्युत आपूर्ति हो रही है। अंडर ग्राउंड केबल खराब होने के कारण कस्बा चंडौस में पिछले 15 घंटे से आपूर्ति बंद है। भीषण गर्मी में लोग परेशान हैं। कस्बा व देहात में 18 घंटे आपूर्ति दी जा रही है।
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- जट्टारी कस्बे में करीब 18 घंटे बिजली की आपूर्ति मिल रही है। देहात के फाजलपुर गंगापुर दुर्गा आदि गांव में 14 घंटे ही बिजली की आपूर्ति हो रही है। कस्बे में रात्रि में विद्युत आपूर्ति बाधित होने से लोगों की नींद खराब हो रही है।
- अतरौली शहर में 20 से 21 घंटे और देहात में 17 से 18 घंटे बिजली आपूर्ति हो रही है। किसी तरह की गड़बड़ी आने पर आधा घंटा या एक घंटे तक की कटौती हो रही है।
- गभाना कस्बे में 20 से 21 घंटे की बिजली आपूर्ति हो रही है। देहात फीडर पर 17-18 घंटे आपूर्ति हो रही है। लाइन में कमी आने पर आपूर्ति बाधित होती है।
- अकराबाद, गोपी व नगला बुद्धा फीडर को 18 घंटे बिजली आपूर्ति दी जा रही है। इसी के साथ कस्बा पिलखना को 20 घंटे की आपूर्ति मिल रही है।
- विजयगढ़ के ग्रामीण फीडर पर 18 घंटे बिजली आपूर्ति दी जा रही है। नगर पंचायत टाउन को 20 घंटे आपूर्ति दी जा रही है। रात्रि में एक घंटे या दो घंटे की कटौती हो रही है। उसकी आपूर्ति दिन में होती है।
- बरला कस्बा और गांव में 18 घंटे बिजली की आपूर्ति हो रही है। गाजीपुर बिजलीघर एवं अरनी बिजलीघर पर भी करीब 18 घंटे आपूर्ति दी जा रही है। नलकूप पर 10 घंटे आपूर्ति हो रही है।
- गोंडा कस्बा स्थित विद्युत उपकेंद्र से जुडे़ देहात के गांव और कस्बे में करीब छह घंटे से अधिक की कटौती हो रही है। विभागीय रोस्टर के अनुसार सप्लाई की जा रही है, लाइनलॉस और फॉल्ट के कारण विद्युत कटौती अलग से की जा रही है। कटौती से आमजन गर्मी में व्याकुल है।