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हे राजन! जन्म, मृत्य प्रमाणपत्र पर संकट..
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जन्म मृत्यु प्रमाण पत्रों के गट्ठर के साथ विनीत गुप्ता।
- फोटो : CITY OFFICE
आशीष निगम, अलीगढ़।
हानि-लाभ, जीवन मरण, यश अपयश विधि हाथ..। रामचरित मानस की ये चौपाई इन दिनों शासन और सिस्टम पर बिल्कुल सटीक बैठती है क्योंकि जन्म और मृत्यु प्रमाण पत्र बनवाने का नया सिस्टम बैठ गया है। इस कारण प्रमाण पत्र बीते 11 दिन से नहीं बन रहे हैं। कारण ये कि शासन ने बीती 31 जनवरी को ई-नगर सेवा नाम का पुराना सिस्टम बंद कर दिया है और पहली फरवरी से सीआरएस नाम से सिविल रजिस्ट्रेशन सिस्टम लागू कर दिया है। नया सिस्टम किसी को समझ में नहीं आ रहा है। इसके लागू होने के बाद से बाबू से अफसर तक कोई भी आवेदन की पूरी प्रक्रिया स्पष्ट नहीं कर रहा है। आलम ये है कि बड़े अधिकारी भी स्पष्ट रूप से नये शासनादेश के तहत निर्देश नहीं दे रहे हैं, न ही इसको जनता को समझा पा रहे हैं। ये भी नहीं बता पा रहे हैं इसमें बनने वाला चालान कहां से और किसके नाम से बनेगा..? स्कूलों में दाखिले के गला काट दौर में ये परेशानी और बड़ी होती जा रही है। वर्तमान में पूरे जिले में तकरीबन पांच हजार लोग इसी उलझन से जूझ रहे हैं।
कॉमन सर्विस सेंटर (सीएससी) की साइट पर सीआरएस पोर्टल खुल तक नहीं रहा है। इससे प्रमाण पत्र आवेदन तक ऑनलाइन नहीं हो पा रहे हैं। लोकवाणी केंद्र, जनसेवा केंद्रों में भी यही स्थिति है। कहीं भी नये सिस्टम से प्रमाण पत्र नहीं बन रहे हैं। नगर निगम में आए दिन इसको लेकर बहस हो रही है तो जनता पार्षदों के कपड़े फाड़ने पर आमादा है। नियमानुसार, नगरीय क्षेत्र के यह प्रमाण पत्र नगर पालिका से व ग्रामीण क्षेत्र के विकास खंड कार्यालय से जारी होते हैं।
पुराना सिस्टम
-31 जनवरी 2020 तक अर्बन लोकल बॉडीज का ई नगर सेवा नाम का साफ्टवेयर जन्म मृत्यु प्रमाण जारी करता था। इस आनलाइन सिस्टम को अखिलेश यादव सरकार ने वर्ष 2014 में लागू किया था। बीती 31 जनवरी को इसको बंद कर दिया गया।
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-इस सिस्टम में निकाय अधिकारी ही पूरी प्रक्रिया संचालित कराते थे। कोई भी तरह का कोई चालान जमा करने का प्रावधान नहीं था। ये सिस्टम सभी की आदत में आ गया था। अचानक बंद कर दिया गया।
नया सिस्टम
-पहली फरवरी 2020 से योगी सरकार ने सिविल रजिस्ट्रेशन सिस्टम सीआरएस लागू कर दिया है। ये भी आनलाइन सिस्टम है। इसमें कुछ परिवर्तन किया गया है। जिसकी वजह से अधिकारी से बाबू तक अभी इस सिस्टम पर काम नहीं कर रहे हैं।
-नये सिस्टम में बैंक शाखा में 10 रुपये का चालान जमा कर आवेदन के साथ देना है। लेकिन चालान किसके नाम से किस खाते के नाम से बनेगा। इसकी सही जानकारी कोई नहीं दे रहा है, जिससे चालान नहीं बन पा रहे हैं।
-नये सिस्टम में एक वर्ष की अवधि के प्रमाण पत्र सीएमओ के स्तर से और इसके बाद की अवधि के प्रमाण पत्र नगर मजिस्ट्रेट के स्तर से जारी किए जाएंगे। नगर मजिस्ट्रेट कार्यालय में कोई भी इस पर काम नहीं कर रहा है।
पुरानी व्यवस्था के अनुसार अगर जन्म या मृत्यु प्रमाण पत्र तीन माह से पुराना होता है तो वह हमारे कार्यालय में आता है। सत्यता जांच के बाद उसको संबंधित नगर निगम कार्यालय में भेजा जाता है। नई व्यवस्था का शासनादेश देखने के बाद ही नये निर्देश दिए जाएंगे।
-विनीत कुमार, सिटी मजिस्ट्रेट।
21 दिन के बाद प्रमाण पत्र ऑनलाइन कराने के लिए शपथ पत्र के साथ दिए गए ऑफ लाइन प्रार्थना पत्र पर हस्ताक्षर किए जा रहे हैं ताकि प्रमाण पत्र जारी हो सकें। सभी जरूरी निर्देश दिए गए हैं। प्रमाण पत्र जारी होने में कोई परेशानी नहीं हो।
-पंकज कुमार, एसडीएम अतरौली।
पहली फरवरी को सिविल रजिस्ट्रेशन सिस्टम लागू होने के बाद से जन्म मृत्यु का एक भी प्रमाण पत्र जारी नहीं हुआ है। कोई प्रक्रिया नहीं हो रही है। जिससे हजारों लोग परेशान है। अफसर भी कोई स्पष्ट जवाब नहीं दे रहे हैं।
-नवीन गुप्ता, शिवम लोकवाणी केंद्र, सेंटर प्वाइंट।
नगर निगम से लेकर लोकवाणी केंद्र तक हर जगह लोग मायूस लौट रहे हैं। अफसर नई प्रक्रिया के तहत कोई कार्रवाई नहीं कर रहे हैं। पूछने पर भी सही जवाब नहीं दे रहे हैं। स्कूलों में दाखिला करने के लिए लोग परेशान होकर घूम रहे हैं।
-अफजाल हमीद, पार्षद पति केलानगर, वार्ड 38।
न तो सीएससी पोर्टल से प्रमाण पत्र ऑनलाइन हो रहे और न ही नगर पालिका व विकास खंड कार्यालय से प्रमाण पत्र जारी हो रहे हैं। इससे परेशानी हो रही है। लोगों को राहत देने के लिए व्यवस्था अतिशीघ्र दुरुस्त होनी चाहिए।
-लोकेश वार्ष्णेय, सीएचसी केंद्र प्रभारी अतरौली।
मेरे नाती का स्कूल में दाखिला होना है। पिछले दस दिन से जन्म प्रमाण पत्र जारी करवाने के लिए घूम रहा हूं। प्रमाण पत्र बनना तो दूर ऑनलाइन आवेदन तक नहीं हो पा रहा है। प्रशासन को जल्द ही व्यवस्था दुरुस्त करानी चाहिए।
-राधाचरण, मढ़ौली।
जन्म व मृत्यु प्रमाण पत्र जारी नहीं होने से लोगों को परेशानी है। इन प्रमाण पत्रों के नहीं होने से लोगों के काम रुके पड़े हैं। शहर से लेकर देहात तक हर जगह यही समस्या सामने आ रही है। प्रशासन को जल्द ही जरूरी कदम उठाने चाहिए।
-दीपक, महगंवा।
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हानि-लाभ, जीवन मरण, यश अपयश विधि हाथ..। रामचरित मानस की ये चौपाई इन दिनों शासन और सिस्टम पर बिल्कुल सटीक बैठती है क्योंकि जन्म और मृत्यु प्रमाण पत्र बनवाने का नया सिस्टम बैठ गया है। इस कारण प्रमाण पत्र बीते 11 दिन से नहीं बन रहे हैं। कारण ये कि शासन ने बीती 31 जनवरी को ई-नगर सेवा नाम का पुराना सिस्टम बंद कर दिया है और पहली फरवरी से सीआरएस नाम से सिविल रजिस्ट्रेशन सिस्टम लागू कर दिया है। नया सिस्टम किसी को समझ में नहीं आ रहा है। इसके लागू होने के बाद से बाबू से अफसर तक कोई भी आवेदन की पूरी प्रक्रिया स्पष्ट नहीं कर रहा है। आलम ये है कि बड़े अधिकारी भी स्पष्ट रूप से नये शासनादेश के तहत निर्देश नहीं दे रहे हैं, न ही इसको जनता को समझा पा रहे हैं। ये भी नहीं बता पा रहे हैं इसमें बनने वाला चालान कहां से और किसके नाम से बनेगा..? स्कूलों में दाखिले के गला काट दौर में ये परेशानी और बड़ी होती जा रही है। वर्तमान में पूरे जिले में तकरीबन पांच हजार लोग इसी उलझन से जूझ रहे हैं।
कॉमन सर्विस सेंटर (सीएससी) की साइट पर सीआरएस पोर्टल खुल तक नहीं रहा है। इससे प्रमाण पत्र आवेदन तक ऑनलाइन नहीं हो पा रहे हैं। लोकवाणी केंद्र, जनसेवा केंद्रों में भी यही स्थिति है। कहीं भी नये सिस्टम से प्रमाण पत्र नहीं बन रहे हैं। नगर निगम में आए दिन इसको लेकर बहस हो रही है तो जनता पार्षदों के कपड़े फाड़ने पर आमादा है। नियमानुसार, नगरीय क्षेत्र के यह प्रमाण पत्र नगर पालिका से व ग्रामीण क्षेत्र के विकास खंड कार्यालय से जारी होते हैं।
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पुराना सिस्टम
-31 जनवरी 2020 तक अर्बन लोकल बॉडीज का ई नगर सेवा नाम का साफ्टवेयर जन्म मृत्यु प्रमाण जारी करता था। इस आनलाइन सिस्टम को अखिलेश यादव सरकार ने वर्ष 2014 में लागू किया था। बीती 31 जनवरी को इसको बंद कर दिया गया।
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-इस सिस्टम में निकाय अधिकारी ही पूरी प्रक्रिया संचालित कराते थे। कोई भी तरह का कोई चालान जमा करने का प्रावधान नहीं था। ये सिस्टम सभी की आदत में आ गया था। अचानक बंद कर दिया गया।
नया सिस्टम
-पहली फरवरी 2020 से योगी सरकार ने सिविल रजिस्ट्रेशन सिस्टम सीआरएस लागू कर दिया है। ये भी आनलाइन सिस्टम है। इसमें कुछ परिवर्तन किया गया है। जिसकी वजह से अधिकारी से बाबू तक अभी इस सिस्टम पर काम नहीं कर रहे हैं।
-नये सिस्टम में बैंक शाखा में 10 रुपये का चालान जमा कर आवेदन के साथ देना है। लेकिन चालान किसके नाम से किस खाते के नाम से बनेगा। इसकी सही जानकारी कोई नहीं दे रहा है, जिससे चालान नहीं बन पा रहे हैं।
-नये सिस्टम में एक वर्ष की अवधि के प्रमाण पत्र सीएमओ के स्तर से और इसके बाद की अवधि के प्रमाण पत्र नगर मजिस्ट्रेट के स्तर से जारी किए जाएंगे। नगर मजिस्ट्रेट कार्यालय में कोई भी इस पर काम नहीं कर रहा है।
पुरानी व्यवस्था के अनुसार अगर जन्म या मृत्यु प्रमाण पत्र तीन माह से पुराना होता है तो वह हमारे कार्यालय में आता है। सत्यता जांच के बाद उसको संबंधित नगर निगम कार्यालय में भेजा जाता है। नई व्यवस्था का शासनादेश देखने के बाद ही नये निर्देश दिए जाएंगे।
-विनीत कुमार, सिटी मजिस्ट्रेट।
21 दिन के बाद प्रमाण पत्र ऑनलाइन कराने के लिए शपथ पत्र के साथ दिए गए ऑफ लाइन प्रार्थना पत्र पर हस्ताक्षर किए जा रहे हैं ताकि प्रमाण पत्र जारी हो सकें। सभी जरूरी निर्देश दिए गए हैं। प्रमाण पत्र जारी होने में कोई परेशानी नहीं हो।
-पंकज कुमार, एसडीएम अतरौली।
पहली फरवरी को सिविल रजिस्ट्रेशन सिस्टम लागू होने के बाद से जन्म मृत्यु का एक भी प्रमाण पत्र जारी नहीं हुआ है। कोई प्रक्रिया नहीं हो रही है। जिससे हजारों लोग परेशान है। अफसर भी कोई स्पष्ट जवाब नहीं दे रहे हैं।
-नवीन गुप्ता, शिवम लोकवाणी केंद्र, सेंटर प्वाइंट।
नगर निगम से लेकर लोकवाणी केंद्र तक हर जगह लोग मायूस लौट रहे हैं। अफसर नई प्रक्रिया के तहत कोई कार्रवाई नहीं कर रहे हैं। पूछने पर भी सही जवाब नहीं दे रहे हैं। स्कूलों में दाखिला करने के लिए लोग परेशान होकर घूम रहे हैं।
-अफजाल हमीद, पार्षद पति केलानगर, वार्ड 38।
न तो सीएससी पोर्टल से प्रमाण पत्र ऑनलाइन हो रहे और न ही नगर पालिका व विकास खंड कार्यालय से प्रमाण पत्र जारी हो रहे हैं। इससे परेशानी हो रही है। लोगों को राहत देने के लिए व्यवस्था अतिशीघ्र दुरुस्त होनी चाहिए।
-लोकेश वार्ष्णेय, सीएचसी केंद्र प्रभारी अतरौली।
मेरे नाती का स्कूल में दाखिला होना है। पिछले दस दिन से जन्म प्रमाण पत्र जारी करवाने के लिए घूम रहा हूं। प्रमाण पत्र बनना तो दूर ऑनलाइन आवेदन तक नहीं हो पा रहा है। प्रशासन को जल्द ही व्यवस्था दुरुस्त करानी चाहिए।
-राधाचरण, मढ़ौली।
जन्म व मृत्यु प्रमाण पत्र जारी नहीं होने से लोगों को परेशानी है। इन प्रमाण पत्रों के नहीं होने से लोगों के काम रुके पड़े हैं। शहर से लेकर देहात तक हर जगह यही समस्या सामने आ रही है। प्रशासन को जल्द ही जरूरी कदम उठाने चाहिए।
-दीपक, महगंवा।