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कासिमपुर पावर हाउसः स्टीम बॉल लीक होने से आठ नंबर यूनिट बंद
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हरदुआगंज तापीय परियोजना कासिमपुर पावर हाउस में 250 मेगावाट की आठ नंबर यूनिट बुधवार रात लगभग 12 बजे स्टीम बॉल लीक होने से बंद हो गई। इस कारण विद्युत उत्पादन भी कम हुआ। बृहस्पतिवार शाम यूनिट को ठीक किया गया। जिस पर देर रात तक लोड आने का अनुमान है।
बृहस्पतिवार को 250 मेगावाट यूनिट का स्टीम बॉल लीक होने के कारण यहां उत्पादन करीब 60 फीसदी ही रह गया। क्योंकि यह बड़ी यूनिटों में से एक है। जबकि यूनिट नंबर सात से 70 मेगावाट, यूनिट नंबर नौ से 150 मेगावाट तथा दस नंबर यूनिट से 368 मेगावाट विद्युत का उत्पादन यथावत होता रहा। यहां बुधवार देर रात से बृहस्पतिवार देर रात तक 588 मेगावाट का उत्पादन हुआ। जबकि चारों यूनिट पूरी क्षमता से चलती तो 1270 मेगावाट विद्युत उत्पादन हुआ। बृहस्पतिवार देर रात तक यूनिट नंबर 8 पर लोड आने का अनुमान लगाया जा रहा है।
परियोजना के अधिकारियों के अनुसार सभी यूनिटें चलाने के लिए 18 हजार मीट्रिक टन कोयला प्रतिदिन चाहिए। जबकि यहां कोयले की एक या दो रैक ही आ रही हैं। एक रैक में 57 डिब्बे होते हैं। इन डिब्बों में 4176 मीट्रिक टन कोयला आता है। ं परियोजना की कोल्ड यार्ड में 90 हजार मीट्रिक टन कोयला बताया जा रहा है, जो कि चार से पांच दिन का स्टॉक है। बीच में कोयले की रैक नहीं आईं तो विद्युत उत्पादन ठप हो सकता है। इस बारे में परियोजना के महाप्रबंधक की ओर से प्रदेश के गृह सचिव को अवगत करा दिया गया है। कोयला संकट से पहले परियोजना में पांच से छह रैक कोयले की प्रतिदिन आती थीं। कोयला सप्लाई कम होने का कारण लखनऊ मुख्यालय से कोल इंडिया को पूरा भुगतान नहीं किया जाना बताया जा रहा है। प्रयास किया जा रहा है कि कोयले की पांच से छह रैक प्रतिदिन की व्यवस्था करा दी जाए।
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बृहस्पतिवार को 250 मेगावाट यूनिट का स्टीम बॉल लीक होने के कारण यहां उत्पादन करीब 60 फीसदी ही रह गया। क्योंकि यह बड़ी यूनिटों में से एक है। जबकि यूनिट नंबर सात से 70 मेगावाट, यूनिट नंबर नौ से 150 मेगावाट तथा दस नंबर यूनिट से 368 मेगावाट विद्युत का उत्पादन यथावत होता रहा। यहां बुधवार देर रात से बृहस्पतिवार देर रात तक 588 मेगावाट का उत्पादन हुआ। जबकि चारों यूनिट पूरी क्षमता से चलती तो 1270 मेगावाट विद्युत उत्पादन हुआ। बृहस्पतिवार देर रात तक यूनिट नंबर 8 पर लोड आने का अनुमान लगाया जा रहा है।
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परियोजना के अधिकारियों के अनुसार सभी यूनिटें चलाने के लिए 18 हजार मीट्रिक टन कोयला प्रतिदिन चाहिए। जबकि यहां कोयले की एक या दो रैक ही आ रही हैं। एक रैक में 57 डिब्बे होते हैं। इन डिब्बों में 4176 मीट्रिक टन कोयला आता है। ं परियोजना की कोल्ड यार्ड में 90 हजार मीट्रिक टन कोयला बताया जा रहा है, जो कि चार से पांच दिन का स्टॉक है। बीच में कोयले की रैक नहीं आईं तो विद्युत उत्पादन ठप हो सकता है। इस बारे में परियोजना के महाप्रबंधक की ओर से प्रदेश के गृह सचिव को अवगत करा दिया गया है। कोयला संकट से पहले परियोजना में पांच से छह रैक कोयले की प्रतिदिन आती थीं। कोयला सप्लाई कम होने का कारण लखनऊ मुख्यालय से कोल इंडिया को पूरा भुगतान नहीं किया जाना बताया जा रहा है। प्रयास किया जा रहा है कि कोयले की पांच से छह रैक प्रतिदिन की व्यवस्था करा दी जाए।
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