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अब लिंक एक्सप्रेस का नहीं होगा ‘संगम’
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प्रयागराज से चलकर मेरठ को जाने वाली संगम एक्सप्रेस अब लिंक एक्सप्रेस से अलग हो जाएगी। ट्रेन की लेटलतीफी को देखते हुए एनसीआर ने प्रस्ताव तैयार कर रेलवे बोर्ड को भेजा है। उम्मीद जताई जा रही है कि जल्द ही प्रस्ताव मुहर लग सकती है। ऐसा होने पर इन दोनों ट्रेनों में कोचों की संख्या बढ़ाई जाएगी, जिससे यात्रियों को वेटिंग टिकट के झंझट से काफी हद तक मुक्ति मिलेगी।
यह है वर्तमान व्यवस्था
1989 से संगम-लिंक एक्सप्रेस का संचालन हो रहा है। मेरठ से चलने वाली संगम एक्सप्रेस अलीगढ़ जंक्शन पर रात 10.40 बजे पर पहुंचती है। यहां देहरादून से आने वाली लिंक एक्सप्रेस को इसके साथ जोड़ा जाता है। इस प्रक्रिया में करीब 40 मिनट का समय लगता है। इसके बाद दोनों ट्रेनों को एक ट्रेन बनाकर प्रयागराज के लिए रवाना किया जाता है। इसी प्रकार प्रयागराज से आने वाली संगम-लिंक एक्सप्रेस रात 03.50 बजे अलीगढ़ जंक्शन पर आती है। इसके बाद यहां इस ट्रेन को दो हिस्सों में बांटा जाता है। एक हिस्सा मेरठ और दूसरा हिस्सा देहरादून के लिए रवाना होता है।
अलग करने की यह है वजह
एनसीआर के पीआरओ अमित मालवीर के मुताबिक बीते कई सालों से संगम-लिंक एक्सप्रेस की शेड्यूल टाइमिंग काफी खराब थी। इसका मुख्य कारण अलीगढ़ स्टेशन पर ट्रेन को जोड़ने और अलग-अलग करने में लगने वाला समय है। इस समस्या को दूर करने के लिए संगम एक्सप्रेस व लिंक एक्सप्रेस को अलग-अलग समय पर चलाने का प्रस्ताव भेजा है। रेलवे बोर्ड लगभग तैयार हो गया है। वर्तमान में इस ट्रेन में 23 या कभी 24 कोच होते हैं। संगम व लिंक एक्सप्रेस अलग-अलग चलने से दोनों ट्रेनों में तीन से चार अतिरिक्त स्लीपर व थर्ड एसी कोचों को लगाया जाएगा। जिससे ट्रेन में लगभग 300 बर्थ बढ़ जाएंगी। इतनी संख्या में बर्थ बढ़ने से यात्रियों की कंफर्म टिकट मिल सकेगा।
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यह है वर्तमान व्यवस्था
1989 से संगम-लिंक एक्सप्रेस का संचालन हो रहा है। मेरठ से चलने वाली संगम एक्सप्रेस अलीगढ़ जंक्शन पर रात 10.40 बजे पर पहुंचती है। यहां देहरादून से आने वाली लिंक एक्सप्रेस को इसके साथ जोड़ा जाता है। इस प्रक्रिया में करीब 40 मिनट का समय लगता है। इसके बाद दोनों ट्रेनों को एक ट्रेन बनाकर प्रयागराज के लिए रवाना किया जाता है। इसी प्रकार प्रयागराज से आने वाली संगम-लिंक एक्सप्रेस रात 03.50 बजे अलीगढ़ जंक्शन पर आती है। इसके बाद यहां इस ट्रेन को दो हिस्सों में बांटा जाता है। एक हिस्सा मेरठ और दूसरा हिस्सा देहरादून के लिए रवाना होता है।
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अलग करने की यह है वजह
एनसीआर के पीआरओ अमित मालवीर के मुताबिक बीते कई सालों से संगम-लिंक एक्सप्रेस की शेड्यूल टाइमिंग काफी खराब थी। इसका मुख्य कारण अलीगढ़ स्टेशन पर ट्रेन को जोड़ने और अलग-अलग करने में लगने वाला समय है। इस समस्या को दूर करने के लिए संगम एक्सप्रेस व लिंक एक्सप्रेस को अलग-अलग समय पर चलाने का प्रस्ताव भेजा है। रेलवे बोर्ड लगभग तैयार हो गया है। वर्तमान में इस ट्रेन में 23 या कभी 24 कोच होते हैं। संगम व लिंक एक्सप्रेस अलग-अलग चलने से दोनों ट्रेनों में तीन से चार अतिरिक्त स्लीपर व थर्ड एसी कोचों को लगाया जाएगा। जिससे ट्रेन में लगभग 300 बर्थ बढ़ जाएंगी। इतनी संख्या में बर्थ बढ़ने से यात्रियों की कंफर्म टिकट मिल सकेगा।
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