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अब अलीगढ़ में भी होगी हिमाचल के सेब की बागवानी

Fri, 16 Sep 2022 01:33 AM IST
Aligarh Bureau अलीगढ़ ब्यूरो
Updated Fri, 16 Sep 2022 01:33 AM IST
सार

हिमाचल प्रदेश, उत्तराखंड और जम्मू-कश्मीर में की जाने वाली सेब की बागवानी अब अलीगढ़ में भी शुरू हो गई है।गभाना तहसील क्षेत्र के पिपलौठ गांव के प्रगतिशील किसान आरसी शर्मा ने करीब छह एकड़ में सेब का बाग लगाने का जज्बा दिखाया है।उनके इस सेब के बाग को देखने के लिए बाहर से भी किसान आने लगे हैं।

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Now Himachal's apple horticulture will be done in Aligarh too
सेब का पेड़ दिखाते गभाना तहसील क्षेत्र के गांव पिपलौठ निवासी आरसी शर्मा । - फोटो : CITY OFFICE

विस्तार

हिमाचल प्रदेश, उत्तराखंड और जम्मू-कश्मीर में की जाने वाली सेब की बागवानी अब अलीगढ़ में भी शुरू हो गई है। गभाना तहसील क्षेत्र के पिपलौठ गांव के प्रगतिशील किसान आरसी शर्मा ने करीब छह एकड़ में सेब का बाग लगाने का जज्बा दिखाया है। उनके इस सेब के बाग को देखने के लिए बाहर से भी किसान आने लगे हैं।
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पिपलौठ निवासी आरसी शर्मा (रमेश चंद्र शर्मा) सरकारी नौकरी से सेवानिवृत्त हैं। गांव में ही खेतीबाड़ी कराते हैं। उन्हें बागवानी का भी शौक है। कोरोना काल में उन्होंने सेब, अनार, अमरूद, पपीता, नीबू आदि फलों की बागवानी करने का निर्णय लिया। उन्होंने बताया कि अब सेब के पेड़ों पर फल लगने शुरू हो गए हैं। फलों की बागवानी से गांव के अलावा आसपास के मजदूरों को भी काम मिल गया है। उन्होंने बताया कि करीब तीन साल पहले सेब की खेती करने की योजना बनाई थी। इसके बाद हिमाचल प्रदेश से हरमन-99 वैरायटी के करीब 300 पौधे मंगाए। हालांकि, शुरुआत में लोगों ने मजाक उड़ाया, मगर जब सेब के पौधे सामान्य ढंग से बढ़ने लगे तो लोगों में उत्सुकता होने लगी। सेब का बाग देखने के लिए पड़ोसी जिले से भी लोग आने लगे। सभी जानना चाहते हैं कि यहां के मौसम में सेब की खेती किस प्रकार से की जा सकती है।
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खुद तैयार करते हैं वर्मी कंपोस्ट
उन्होंने बताया कि सेब के पौधों में वर्मी कंपोस्ट (खाद) डाला ताकि वे अच्छी तरह पनप सकें। खेत में ही वर्मी कंपोस्ट तैयार कराते हैं। खेत में गोबर, खरपतवार व केंचुए आदि से खाद बनाई जा रही है। एक से डेढ़ महीने बाद वर्मी कंपोस्ट तैयार हो जाती है। इस खाद के इस्तेमाल से पौधे में कीड़े नहीं लगते हैं।
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इसलिए खास है हरमन-99 प्रजाति
सेब की एकमात्र प्रजाति हरमन-99 ही 40 से 45 डिग्री तापमान में अच्छी उपज देती है। सेब की यह खास वैरायटी तैयार की गई है। सेब शीतोष्ण जलवायु वाला फल होता है। इसके पौधे ठंडे क्षेत्रों में ही लगाए जाते हैं, जो समुद्र तल से लगभग 4800 से 9000 फुट की ऊंचाई पर हों। मार्च और अप्रैल में सेब के पौधों पर फूल लगने शुरू हो जाते हैं।

वर्जन
- फलों की बागवानी में इन दिनों काफी फायदा है। इसकी मार्केट अच्छी है। जिले में किसानों को प्रोत्साहित किया जा रहा है कि वह फलों की खेती करें, जिससे उनकी आय का साधन बन सके।
- डॉ. धीरेंद्र कुमार, जिला उद्यान अधिकारी
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