{"_id":"578fd7ed4f1c1b3526c4b8b8","slug":"now-aligarh-apttikkwad-imposed-in-the-name-of-the-movie","type":"story","status":"publish","title_hn":"अब ‘अलीगढ़’ फिल्म के नाम पर आपत्ति..वाद ठोका","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
अब ‘अलीगढ़’ फिल्म के नाम पर आपत्ति..वाद ठोका
अमर उजाला ब्यूरो
Updated Thu, 21 Jul 2016 01:31 AM IST
विज्ञापन
अब ‘अलीगढ़’ फिल्म के नाम पर आपत्ति..वाद ठोका
एएमयू के प्रोफेसर सिरास के गे-स्कैंडल पर बनी मनोज वाजपेयी अभिनित चर्चित हिंदी फिल्म ‘अलीगढ़’ एक बार फिर विवाद खड़ा हो गया है और फिल्म का नाम ‘अलीगढ़’ देना असंवैधानिक करार देते हुए सीजेएम न्यायालय में वाद दायर किया है।
इस वाद में फिल्म के निर्माता, निर्देशक के अलावा सेंसर बोर्ड पर भी मुकदमा दर्ज करने की अपील की गई है। 4 जून को दायर की गई याचिका पर बुधवार को सुनवाई हुई, जिसमें वादी पक्ष ने जोरदारी से अपना पक्ष रखते हुए मुकदमे का अनुरोध किया।
इस फिल्म के विरुद्ध अधिवक्ता एनुल शाहिद जीवनगढ़, नवेद इदरीश हाथी वाला पुल, अखलाक अहमद जीवनगढ़ ने सीआरपीसी की धारा 156(3) के तहत वाद दायर किया है। जिसमें निर्माता सुनील लुल्ला, निर्देशक हंसल मेहता और सेंसर बोर्ड को आरोपी बनाया गया है।
विज्ञापन
याचिका में अपील है कि अलीगढ़ मिश्रित आबादी वाला अमन पंसद लोगों का शहर है। गे-स्कैंडल पर आधारित फिल्म का नाम इस शहर के नाम से जोड़कर निर्माता, निर्देशक ने अपने फायदे की कोशिश की है, जो शहर के लोगों की प्रतिष्ठा पर सवाल खड़ा करती है और लोगों को गहरा आघात लगा है।
गे-स्कैंडल के लिए इस शहर का नाम प्रयोग करना असंवैधानिक है। अलीगढ़ के बजाय फिल्म का नाम आगरा, बरेली या मुंबई भी रखा जा सकता था। इसमें अलीगढ़ के लोगों के प्रति अपमानजनक बातों के लिए आरोपी दोषी हैं। इसमें एक समुदाय विशेष को निशाना बनाया है, जिससे मिश्रित आबादी के शहर में नफरत फैलाने की कोशिश भी हुई है। एएमयू बिरादरी को भी ठेस पहुंचाई है। इसके लिए इन पर अर्थदंड लगाने के साथ-साथ मुकदमा दर्ज करने का आदेश दिया जाए। अंत में कहा गया है कि आरोपियों के नाम पते सही हैं, क्योंकि यह जानकारी आरटीआई के तहत जुटाई गई है।
विज्ञापन
इस वाद में फिल्म के निर्माता, निर्देशक के अलावा सेंसर बोर्ड पर भी मुकदमा दर्ज करने की अपील की गई है। 4 जून को दायर की गई याचिका पर बुधवार को सुनवाई हुई, जिसमें वादी पक्ष ने जोरदारी से अपना पक्ष रखते हुए मुकदमे का अनुरोध किया।
विज्ञापन
इस फिल्म के विरुद्ध अधिवक्ता एनुल शाहिद जीवनगढ़, नवेद इदरीश हाथी वाला पुल, अखलाक अहमद जीवनगढ़ ने सीआरपीसी की धारा 156(3) के तहत वाद दायर किया है। जिसमें निर्माता सुनील लुल्ला, निर्देशक हंसल मेहता और सेंसर बोर्ड को आरोपी बनाया गया है।
विज्ञापन
याचिका में अपील है कि अलीगढ़ मिश्रित आबादी वाला अमन पंसद लोगों का शहर है। गे-स्कैंडल पर आधारित फिल्म का नाम इस शहर के नाम से जोड़कर निर्माता, निर्देशक ने अपने फायदे की कोशिश की है, जो शहर के लोगों की प्रतिष्ठा पर सवाल खड़ा करती है और लोगों को गहरा आघात लगा है।
गे-स्कैंडल के लिए इस शहर का नाम प्रयोग करना असंवैधानिक है। अलीगढ़ के बजाय फिल्म का नाम आगरा, बरेली या मुंबई भी रखा जा सकता था। इसमें अलीगढ़ के लोगों के प्रति अपमानजनक बातों के लिए आरोपी दोषी हैं। इसमें एक समुदाय विशेष को निशाना बनाया है, जिससे मिश्रित आबादी के शहर में नफरत फैलाने की कोशिश भी हुई है। एएमयू बिरादरी को भी ठेस पहुंचाई है। इसके लिए इन पर अर्थदंड लगाने के साथ-साथ मुकदमा दर्ज करने का आदेश दिया जाए। अंत में कहा गया है कि आरोपियों के नाम पते सही हैं, क्योंकि यह जानकारी आरटीआई के तहत जुटाई गई है।