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सावन के सोमवारों पर मंदिर नहीं, घर में ही करें जलाभिषेक
Thu, 25 Jun 2020 12:32 AM IST
राजेश सिंह
न्यूूज डेस्क, अमर उजाला, अलीगढ़।
न्यूूज डेस्क, अमर उजाला, अलीगढ़।
Published by: राजेश सिंह
Updated Thu, 25 Jun 2020 12:32 AM IST
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श्रावण मास व कावड़ यात्रा को लेकर धर्मगुरुओं के साथ बैठक करते डीएम, एसएसपी।
- फोटो : neeraj
चार माह से धार्मिक अनुष्ठान से लेकर सार्वजनिक कार्यक्रमों के लिए अभिशाप बने कोरोना वाइरस की काली छाया छह जुलाई से शुरू हो रहे सावन के सोमवार एवं कांवड़ यात्रा पर भी पड़ गई है। शासन ने कोरोना के दृष्टिगत कांवड़ यात्रा स्थगित कर दी है। सावन के सोमवारों पर भी मंदिरों में जलाभिषेक रोकने को आम सहमति बनाने की कोशिश शुरू हो गई है।
इस मामले में बुधवार को डीएम ने धर्मगुरुओं व जन प्रतिनिधियों की बैठक बुलाई। जिला मजिस्ट्रेट चंद्र भूषण सिंह ने बताया कि कोरोना वायरस संक्त्रस्मण फैलने से रोकने के लिए शासन स्तर पर कांवड़ यात्रा स्थगित कर दी गई है। इस साल कांवड़ यात्रा सावन मास में छह जुलाई से 20 अगस्त तक प्रस्तावित है। सावन के सोमवारों व कांवड़ यात्रा के दौरान मंदिरों में जलाभिषेक करने की परंपरा है।
संक्रमण फैलने के दृष्टिगत श्रद्धालु मंदिर में न आकर घर पर ही जलाभिषेक करें। यदि मंदिर आएं भी तो एक साथ भीड़ में न आकर कोरोना वायरस के संक्रमण से स्वयं एवं दूसरों को सुरक्षित रखते हुए जलाभिषेक कर सकते हैं। जिला मजिस्ट्रेट ने कहा कि धर्मगुरु एवं संत लोगों को जागरूक कर कांवड़ यात्रा स्थगन एवं अपने घरों में ही पूजा-पाठ करने के संबंध में अपील जारी करें।
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सहमत नजर आये धर्म गुरु
डीएम ने मंदिर समिति और महंतों से सावन के सोमवार में श्रद्धालुओं से उचित दूरी का पालन कराने पर चर्चा की। धर्म गुरुओं ने कहा कि सोमवार व शिवरात्रि पर हजारों की संख्या में श्रद्धालु जलाभिषेक करते हैं। ऐसे में उचित दूरी का पालन कराना संभव नहीं है। एसएसपी मुनिराज जी ने धर्मगुरुओं को आश्वस्त किया कि जलाभिषेक करने आये भक्तगणों एवं श्रद्धालुओं को स्थानीय स्तर पर उचित सुरक्षा प्रदान की जाएगी। मंदिरों में जलाभिषेक करने पर मास्क का प्रयोग करते हुए सामाजिक दूरी को बनाए रखना होगा। यदि मास्क और सोशल डिस्टेंसिंग का पालन नहीं किया जाता है तो कार्रवाई होगी। इस मौके पर राजू पंडितजी, महंत कौशलनाथ योगी, छोटू दास महाराज, ठा. सत्यपाल, रजत गोस्वामी, नीलेश भार्गव, राकेश सक्सेना आदि प्रमुख रूप से मौजूद रहे।
आचार्य ब्रजेश शास्त्री बोले, घर में ही करें जलाभिषेक
धर्मगुरु बृजेश शास्त्री ने कहा कि वर्तमान में कोरोना महामारी के संकटकाल में ऐसा कोई कदम न उठाएं जिससे किसी को दु:ख या पीड़ा पहुंचे। हम श्रावण मास में मंदिरों में जाकर जलाभिषेक नहीं करेंगे, बल्कि अपने घरों में स्थापित शिवलिंग पर जल चढ़ाकर विधिवत पूजा अर्चना करेंगे। यदि घर में शिवलिंग स्थापित नहीं है तो परम पिता परमेश्वर को याद करते हुए अपने अंगुष्ठ पर ही जलाभिषेक कर सकते हैं, इससे उसी फल की प्राप्ति होगी जो मंदिर में जलाभिषेक करने से होती है।
छह जुलाई से शुरू हो रहे हैं सावन
सावन का महीना छह जुलाई से शुरू हो रहा है। पहले दिन ही सोमवार है। सावन की शिवरात्रि 19 जुलाई को है। जबकि सावन तीन अगस्त तक रहेगा।
इन मंदिरों पर पड़ेगा विशेष प्रभाव
अचलताल स्थित अचलेश्वर महादेव मंदिर, जयगंज स्थित मंगलेश्वर महादेव मंदिर, गभाना के भूमिया बाबा और खेरेश्वर धाम में सबसे ज्यादा जलाभिषेक सावन के सोमवार में होता है। हजारों की संख्या में श्रद्धालु इन मंदिरों में पहुंचते हैं और जलाभिषेक करते हैं। कलेक्ट्रेट की बैठक में जैसा सभी ने साफ कर दिया है कि सोमवार के दिन उचित दूरी का पालन कराना टेढ़ी खीर साबित होगा। ऐसे में मंदिर को बंद रखना ही बेहतर होगा। इसके अलावा देहात क्षेत्र के प्रसिद्ध मंदिरों को लेकर भी अभी निर्णय होना है।
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इस मामले में बुधवार को डीएम ने धर्मगुरुओं व जन प्रतिनिधियों की बैठक बुलाई। जिला मजिस्ट्रेट चंद्र भूषण सिंह ने बताया कि कोरोना वायरस संक्त्रस्मण फैलने से रोकने के लिए शासन स्तर पर कांवड़ यात्रा स्थगित कर दी गई है। इस साल कांवड़ यात्रा सावन मास में छह जुलाई से 20 अगस्त तक प्रस्तावित है। सावन के सोमवारों व कांवड़ यात्रा के दौरान मंदिरों में जलाभिषेक करने की परंपरा है।
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संक्रमण फैलने के दृष्टिगत श्रद्धालु मंदिर में न आकर घर पर ही जलाभिषेक करें। यदि मंदिर आएं भी तो एक साथ भीड़ में न आकर कोरोना वायरस के संक्रमण से स्वयं एवं दूसरों को सुरक्षित रखते हुए जलाभिषेक कर सकते हैं। जिला मजिस्ट्रेट ने कहा कि धर्मगुरु एवं संत लोगों को जागरूक कर कांवड़ यात्रा स्थगन एवं अपने घरों में ही पूजा-पाठ करने के संबंध में अपील जारी करें।
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सहमत नजर आये धर्म गुरु
डीएम ने मंदिर समिति और महंतों से सावन के सोमवार में श्रद्धालुओं से उचित दूरी का पालन कराने पर चर्चा की। धर्म गुरुओं ने कहा कि सोमवार व शिवरात्रि पर हजारों की संख्या में श्रद्धालु जलाभिषेक करते हैं। ऐसे में उचित दूरी का पालन कराना संभव नहीं है। एसएसपी मुनिराज जी ने धर्मगुरुओं को आश्वस्त किया कि जलाभिषेक करने आये भक्तगणों एवं श्रद्धालुओं को स्थानीय स्तर पर उचित सुरक्षा प्रदान की जाएगी। मंदिरों में जलाभिषेक करने पर मास्क का प्रयोग करते हुए सामाजिक दूरी को बनाए रखना होगा। यदि मास्क और सोशल डिस्टेंसिंग का पालन नहीं किया जाता है तो कार्रवाई होगी। इस मौके पर राजू पंडितजी, महंत कौशलनाथ योगी, छोटू दास महाराज, ठा. सत्यपाल, रजत गोस्वामी, नीलेश भार्गव, राकेश सक्सेना आदि प्रमुख रूप से मौजूद रहे।
आचार्य ब्रजेश शास्त्री बोले, घर में ही करें जलाभिषेक
धर्मगुरु बृजेश शास्त्री ने कहा कि वर्तमान में कोरोना महामारी के संकटकाल में ऐसा कोई कदम न उठाएं जिससे किसी को दु:ख या पीड़ा पहुंचे। हम श्रावण मास में मंदिरों में जाकर जलाभिषेक नहीं करेंगे, बल्कि अपने घरों में स्थापित शिवलिंग पर जल चढ़ाकर विधिवत पूजा अर्चना करेंगे। यदि घर में शिवलिंग स्थापित नहीं है तो परम पिता परमेश्वर को याद करते हुए अपने अंगुष्ठ पर ही जलाभिषेक कर सकते हैं, इससे उसी फल की प्राप्ति होगी जो मंदिर में जलाभिषेक करने से होती है।
छह जुलाई से शुरू हो रहे हैं सावन
सावन का महीना छह जुलाई से शुरू हो रहा है। पहले दिन ही सोमवार है। सावन की शिवरात्रि 19 जुलाई को है। जबकि सावन तीन अगस्त तक रहेगा।
इन मंदिरों पर पड़ेगा विशेष प्रभाव
अचलताल स्थित अचलेश्वर महादेव मंदिर, जयगंज स्थित मंगलेश्वर महादेव मंदिर, गभाना के भूमिया बाबा और खेरेश्वर धाम में सबसे ज्यादा जलाभिषेक सावन के सोमवार में होता है। हजारों की संख्या में श्रद्धालु इन मंदिरों में पहुंचते हैं और जलाभिषेक करते हैं। कलेक्ट्रेट की बैठक में जैसा सभी ने साफ कर दिया है कि सोमवार के दिन उचित दूरी का पालन कराना टेढ़ी खीर साबित होगा। ऐसे में मंदिर को बंद रखना ही बेहतर होगा। इसके अलावा देहात क्षेत्र के प्रसिद्ध मंदिरों को लेकर भी अभी निर्णय होना है।