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UP: दौड़ते हुए, नाचते हुए कोई यूं ही नहीं मर जाता... अचानक नहीं होती दिल की बीमारी; टेस्ट होने चाहिए

Sat, 30 Nov 2024 02:37 PM IST
शाहरुख खान अमर उजाला नेटवर्क, अलीगढ़
अमर उजाला नेटवर्क, अलीगढ़ Published by: शाहरुख खान Updated Sat, 30 Nov 2024 02:37 PM IST
सार

हृदय रोग विशेषज्ञ प्रो. एमयू रब्बानी का कहना है कि अब परीक्षण बहुत जरूरी हो गया है। दौड़ते हुए, नाचते हुए कोई यूं ही नहीं मर जाता। बीस दिन में दौड़ते हुए तीन की मौत हो गई। दूल्हा नाचते वक्त मर गया था। 

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No one dies while running and dancing just like that Cardiologist Prof. MU Rabbani said Tests should be done
heart attack - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

दौड़ते हुए, नाचते हुए, ऑफिस जाते वक्त, घर में काम करते समय अचानक गश खाकर गिरे और सांसें थम गईं। आमतौर पर अचानक होने वाली मौत को हार्ट अटैक ही माना जाता है। हृदय रोग विशेषज्ञ भी यही कहते हैं। लेकिन साथ में डाक्टर यह भी सलाह देते हैं कि अगर किसी परिवार के सदस्य को कम उम्र में हृदय रोग होता है तो परिवार के लोगों को जांच जरूर करानी चाहिए। कई बार रोग हार्ट की बीमारी पैदाइशी भी होती है लेकिन हम बगैर परीक्षण के उसे समझ नहीं पाते। ऐसे में जिनके घरों में हार्ट अटैक से बच्चों या नौजवानों की मौत हुई हो वह अपना परीक्षण जरूर कराएं।
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दिल सब बताता है लेकिन हम नजरअंदाज कर जाते हैं
चिकित्सकों का कहना है कि दिल की बीमारी कोई अचानक नहीं होती। हार्ट बताता है कि वह ठीक नहीं है। लेकिन हम नजरअंदाज करते रहते हैं। सीने में दर्द होता है उसे गैस का दर्द मान लेते हैं। सांस फूलती है लेकिन ध्यान नहीं देते। ब्लडप्रेशर बढ़ा रहता है मगर हम समझ ही नहीं पाते।

जेएन मेडिकल कॉलेज के पूर्व डीन और हृदय रोग विशेषज्ञ प्रो. एमयू रब्बानी ने कहा कि तमाम बच्चे और नौजवान जन्मजात दिल की बीमारी से पीड़ित होते हैं। यह सब जांच से ही पता चल सकता है। समय से रोग पकड़ में आता है तो इलाज से दुरुस्त किया जा सकता है।
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बच्चों के दिल पर चढ़ रही मांस की परत
एएमयू के जेएन मेडिकल कॉलेज के कॉर्डियोलॉजी डिपार्टमेंट के चेयरमैन प्रो. आसिफ हसन ने बताया कि हार्ट अटैक मौत की वजह होती है, लेकिन हर मौत को हार्टअटैक माना जाए यह भी जरूरी नहीं। प्रो. हसन ने कहा कि संभवत: बच्चे की मौत उसके दिल पर मांस की परत बढ़ने से हुई होगी। इसमें अचानक खेलते-कूदते से मौत हो जाती है।

पोस्टमार्टम कराया जाता है तो मौत की सही वजह की जानकारी हो जाती है। यह जन्मजात बीमारी होती है। इस बीमारी में दिल की परत सामान्य व्यक्ति के दिल से तीन-चार गुना मोटी होती है। अचानक दिल की धड़कन बढ़ने से मौत हो जाती है। उन्होंने कहा कि ऐसे में मृतक बच्चे के भाई-बहन, माता-पिता का ईको होना चाहिए, ताकि यह पता लग सके, कोई और तो इसकी चपेट में नहीं है।
 
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इमरजेंसी में रोजाना पहुंच रहे तीन हार्ट अटैक के मरीज
जेएन मेडिकल कॉलेज के इमरजेंसी में रोजाना तीन हार्ट अटैक के मरीज पहुंच रहे हैं। कॉर्डियोलॉजी डिपार्टमेंट के चेयरमैन प्रो. आसिफ हसन ने बताया कि ओपीडी में दिल संबंधी बीमार व्यक्तियों की संख्या 50 से ज्यादा बढ़ गई है।
 

अचानक सीने में उठा दर्द, मौत
20 नवंबर को अलीगढ़ मुस्लिम यूनिवर्सिटी (एएमयू) के पूर्व कुलसचिव एसएम अफजल के बेटे सैयद बरकात हैदर (29) की हार्टअटैक से मौत हो गई थी। सैयद हैदर को बेचैनी के साथ घबराहट होने लगी। सुबह 4:45 सीने में तेज दर्द उठा। परिजन उन्हें जेएन मेडिकल कॉलेज ले गए, लेकिन डॉक्टरों ने मृत घोषित कर दिया था।

 

सीने में हुआ दर्द, ले गए अस्पताल, मौत
5 नवंबर को शहर के बाल रोग विशेषज्ञ डॉ. लवनीश अग्रवाल की हार्ट अटैक से मौत हो गई थी। सुबह टहलकर घर वापस आए। उन्होंने नहाया-धोया। सुबह 8 बजे क्लीनिक जाने की तैयारी कर रहे थे, तभी उनके सीने में दर्द उठा। परिजन, उन्हें निजी अस्पताल ले गए, जहां उनकी मौत हो गई थी।

 

हार्ट अटैक से मौत
खैर कोतवाली के गांव अर्राना निवासी 20 वर्षीय ममता को शनिवार की सुबह दौड़ते समय दिल का दौरा पड़ा था, जिससे मौत हो गई थी। पुलिस भर्ती की लिखित परीक्षा पास करने के बाद वह गांव के बाहर मैदान में अपनी बहन और गांव की अन्य लड़कियों के साथ सुबह दौड़ की तैयारी कर रही थी। शनिवार की सुबह पांच बजे भी बहन और अन्य लड़कियों के साथ दौड़ लगा रही थी तभी उसे दिल का दौरा पड़ा था। परिजन उसे पहले जिला अस्पताल फिर जेएन मेडिकल कॉलेज लेकर पहुंचे जहां डॉक्टरों ने मृत घोषित कर दिया था।
 

डीजे पर नाचते दूल्हे की मौत

बच्चे को सांस फूलने की शिकायत हो, तो डॉक्टर दिखाएं : प्रो. रब्बानी
जेएन मेडिकल कॉलेज के पूर्व डीन और हृदय रोग विशेषज्ञ प्रो. एमयू रब्बानी ने कहा कि बच्चे की असमय मौत दुर्भाग्यपूर्ण है। हालांकि, कुछ बच्चों में जन्मजात दिल की बीमारी होती है। अगर उसकी जांच न कराई जाए, तो आगे नुकसान हो सकता है। उन्होंने कहा कि अगर बच्चे में सांस फूलने और सीने में दर्द की शिकायत हो, तो फौरन उसकी जांच करानी चाहिए।
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