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अब नहीं होने देंगे चूक, प्रशासन ने झोंकी पूरी ताकत
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, अलीगढ़।
Updated Fri, 04 May 2018 03:09 AM IST
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छात्रों के धरने का जायजा लेते एडीएम सिटी श्याम बहादुर सिंह, एसपी सिटी अतुल श्रीवास्तव व अन्य।
- फोटो : अमर उजाला
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एएमयू में बुधवार को हुए बवाल के बाद पुलिस प्रशासनिक स्तर से अब कोई चूक न होने देने की पुरजोर कोशिश की जा रही है। इसी कड़ी में भारी भरकम फोर्स कैंपस के इर्द-गिर्द और पुराने शहर में तैनात कर दी गई है। किसी को भी गड़बड़ी नहीं करने दी जाएगी।
इस तरह का स्पष्ट रुख पुलिस प्रशासनिक स्तर से तय किया गया है। पीएसी, आरएएफ के अलावा मंडल भर से पुलिस बल बुलाया गया है। यहां पूर्व में तैनात रहे थानेदारों को भी बुलाया गया है। सोशल मीडिया पर भी कड़ी निगरानी कराई जा रही है।
कवायद 1 ः डेढ़ दर्जन थानेदाराें की चौबीसों घंटे तैनाती
एसपी सिटी अतुल श्रीवास्तव के अनुसार इस प्रकरण को ध्यान में रखते हुए दो कंपनी आरएएफ, तीन कंपनी पीएसी के अलावा शहर व देहात के अलावा हाथरस, एटा व कासगंज से कुल डेढ़ दर्जन से अधिक एसओ/इंस्पेक्टरों के अलावा हर थाने से सिपाहियों, तेज तर्रार दरोगाओं को लगाया गया है। इन सभी को राउंड द क्लाक तैनात किया जा रहा है। तीन-तीन सीओ स्थायी रूप से कैंपस के बाहर तैनात किए गए हैं। खुद एडीएम सिटी व एसपी सिटी लगातार निगरानी कर रहे हैं।
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कवायद-2ः सोशल मीडिया के दुरुपयोग पर सीधे रासुका
एडीएम सिटी एसबी सिंह के अनुसार इस प्रकरण में सोशल मीडिया पर निगरानी कराई जा रही है। कोई भी ऐसा पोस्ट नहीं करेगा और न ही किसी ऐसे वस्तु या सामग्री को फारवर्ड या शेयर करेगा, जिससे सांप्रदायिक उन्माद को बढ़ावा मिलता हो अथवा सांप्रदायिक समरसता को क्षति पहुंचती हो। यदि कोई व्यक्ति ऐसा करता है तो उसके विरुद्ध कार्रवाई की जाएगी। सांप्रदायिक उन्माद भड़काने व सांप्रदायिक सौहार्द बिगाड़ने के कारण राष्ट्रीय सुरक्षा अधिनियम के अंतर्गत कार्रवाई की जाएगी।
हिंदूवादियों के जाने के बाद क्यों बने हालात, होगी मजिस्ट्रेटी जांच
एएमयू बवाल को लेकर जिलाधिकारी चंद्रभूषण सिंह ने जारी आदेश में कहा है कि जिन्ना प्रकरण में 2 मई को कुछ हिंदूवादी पुतला फूंकने आए, जो बाब-ए-सैयद तक पहुंचे और वहां टकराव के हालात बने। मगर उन्हें पुलिस ने वहां से वापस कर दिया। इसके बाद एएमयू छात्र उनकी गिरफ्तारी व उन पर कार्रवाई की मांग को लेकर एकत्रित हुए। इस दौरान छात्र इस कदर बेकाबू हो गए कि वह सिविल लाइंस थाने की ओर कूच कर गए। इस दौरान बेकाबू छात्रों को रोकने के लिए पुलिस को लाठीचार्ज करना पड़ा व आंसू गैस के गोले छोड़ने पड़े। इसमें छात्रों व पुलिसकर्मियों सहित तमाम लोग जख्मी हुए। यह हालात क्यों बने, इसकी मजिस्ट्रेटी जांच की आवश्यकता प्रतीत होती है। इसके लिए जिलाधिकारी ने एडीएम वित्त बच्चू सिंह को जांच अधिकारी नियुक्त कर 15 दिन में जांच रिपोर्ट देने के आदेश दिए हैं।
कोई भी हाथ में न ले कानून: एडीजी
एएमयू में बुधवार को घटित प्रकरण के दूसरे दिन एडीजी आगरा जोन अजय आनंद ने अलीगढ़ आकर हालात का जायजा लिया और जिला पुलिस प्रशासन के अधिकारियों के साथ बैठक कर पूरा घटनाक्रम समझा। इस दौरान उन्होंने शुरुआती दौर में हुई पुलिस की चूक पर जांच कराने को कहा। साथ में निर्देश दिए कि कानून किसी को हाथ में न लेने दिया जाए। वहीं उन्होंने छात्रों से भी अपील की है कि वह अपनी बात कानून के दायरे में रहकर कहें। गुरुवार दोपहर एडीजी यहां पीडब्ल्यूडी गेस्ट हाउस पहुंचे। जहां उन्होंने आईजी डॉ संजीव गुप्ता, जिलाधिकारी चन्द्रभूषण सिंह, वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक अजय कुमार साहनी, पुलिस अधीक्षक नगर अतुल श्रीवास्तव के साथ बुधवार को हुए घटनाक्रम पर बैठक में चर्चा की। अधिकारियों ने उन्हें बताया छात्रों को करीब डेढ़ घंटे तक समझाया गया। इसके बाद भी वह पुलिस से जूझते रहे और शहर की ओर बढ़ गए। अगर उन्हें रोकने के लिए बल प्रयोग न किया गया होता तो शायद हालात बेकाबू हो जाते। बैठक के दौरान एडीजी ने विश्वविद्यालय परिसर के अंदर व बाहर कड़े सुरक्षा इंतजाम रखने, कानून व्यवस्था किसी भी कीमत पर न बिगड़ने देने का निर्देश दिया। इस दौरान अमर उजाला से हुई बातचीत में एडीजी ने बताया कि अब एएमयू में हालात पूरी तरह सामान्य हैं। स्थिति पुलिस प्रशासन के नियंत्रण में है। घटनाक्रम की शुरुआत में पुलिस के स्तर से जो कमी हुई थी, उसकी जांच कराई जाएगी। इसमें जो भी दोषी होगा, उसके खिलाफ कार्रवाई होगी। उन्होंने कहा कि किसी को माहौल नहीं बिगाड़ने दिया जाएगा। इस संबंध में हिदायत दे दी गई है और छात्रों से अपील है कि वह भी कानून हाथ में न लें।
अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर मिल रहा एएमयू छात्रों को समर्थन
अभिषेक शर्मा
एएमयू में बुधवार को जो कुछ हुआ, इसे तलबा (एएमयू के वर्तमान व पूर्व छात्र) बिरादरी एक सोची समझी साजिश करार दे रही है। वे सब कुछ योगी सरकार के इशारे पर होना बता रहे हैं। अब साक्ष्यों के साथ शुक्रवार को हाईकोर्ट और सुप्रीम कोर्ट में गुहार लगाने की तैयारी है। इसके लिए एएमयू छात्रसंघ के पूर्व सचिव व सुप्रीम कोर्ट में अधिवक्ता फर्रुख खान से छात्रनेताओं ने संपर्क भी किया है। इसके अलावा राष्ट्रपति को पत्र लिखकर दखल का अनुरोध भी एएमयू छात्रसंघ के अलावा ओल्ड ब्वायज यूनियन द्वारा किया जाएगा। दुनिया भर में फैले एएमयू के पूर्व छात्र ओल्ड ब्वायज यूनियन के जरिये आंदोलित छात्रों को अपना समर्थन दे रहे हैं।
इस संबंध में एएमयू छात्रसंघ के पूर्व अध्यक्ष फैजुल हसन ने बातचीत में जानकारी दी कि ओल्ड ब्वायज यूनियन के विश्वव्यापी नेटवर्क के जरिए पूर्व एएमयू छात्र एएमयू के संपर्क में हैं। सभी अपना-अपना समर्थन दे रहे हैं। इस प्रकरण को लेकर हर किसी के मन में सरकार व पुलिस प्रशासन के खिलाफ बेहद गुस्सा है। उन्होंने बताया कि चूंकि सब कुछ सरकार के इशारे पर सोची समझी साजिश के तहत हो रहा है तो हमें यहां से न्याय मिलने की उम्मीद कम है। इसलिए जीबीएम में यह तय किया गया है कि इस लड़ाई को कानूनी रूप से लड़ा जाए। इसके लिए हाईकोर्ट या सुप्रीम कोर्ट में एक जनहित याचिका सत्ताधारी जनप्रतिनिधियों व पुलिस प्रशासन के खिलाफ दायर की जाएगी। इसके साथ सीसीटीवी फुटेज व अन्य साक्ष्यपेश किए जाएंगे। उन्होंने बताया कि इसके अलावा राष्ट्रपति से भी पत्र लिखकर दखल का अनुरोध किया जाएगा। विभिन्न महत्वपूर्ण पदों पर काम कर रहे पूर्व छात्र भी अपने स्तर से पत्र लिखने की तैयारी में है।
कानूनी लड़ाई के लिए एएमयू छात्रसंघ के सचिव रहे फर्रुख खान से संपर्क किया गया है। फैजुल हसन ने बताया कि तैयारी पूरी हुई तो शुक्रवार को ही दस्तावेज सुप्रीम कोर्ट व हाईकोर्ट भेजे जाएंगे। वहां अधिवक्ताओं की राय के आधार पर आगे कार्रवाई की जाएगी। ओल्ड ब्वायज यूनियन के पदाधिकारी खुसरो खान का कहना है कि वह एएमयू छात्रों के उत्पीड़न के खिलाफ उनकी हर लड़ाई में उनके साथ हैं।
आरोप: जानबूझकर सिर पर किया गया वार
एएमयू छात्रों को रोकने के लिए पुलिस व आरएएफ द्वारा लाठीचार्ज किया गया। इस दौरान गंभीर रूप से जख्मी हुए छात्रसंघ अध्यक्ष मशकूर अहमद उस्मानी, पूर्व उपाध्यक्ष माजिन जैदी के सिर में गंभीर चोट आई है। प्रत्यक्षदर्शियों की मानें तो उनके सिरों पर सीधे हथियारों की बटों से वार किया गया। इसे लेकर छात्रसंघ बेहद आक्रोशित है। सीधा आरोप है कि जानबूझकर निशाना बनाकर सिर पर वार किया गया। इन तथ्यों को अदालत के सामने रखा जाएगा।
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इस तरह का स्पष्ट रुख पुलिस प्रशासनिक स्तर से तय किया गया है। पीएसी, आरएएफ के अलावा मंडल भर से पुलिस बल बुलाया गया है। यहां पूर्व में तैनात रहे थानेदारों को भी बुलाया गया है। सोशल मीडिया पर भी कड़ी निगरानी कराई जा रही है।
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कवायद 1 ः डेढ़ दर्जन थानेदाराें की चौबीसों घंटे तैनाती
एसपी सिटी अतुल श्रीवास्तव के अनुसार इस प्रकरण को ध्यान में रखते हुए दो कंपनी आरएएफ, तीन कंपनी पीएसी के अलावा शहर व देहात के अलावा हाथरस, एटा व कासगंज से कुल डेढ़ दर्जन से अधिक एसओ/इंस्पेक्टरों के अलावा हर थाने से सिपाहियों, तेज तर्रार दरोगाओं को लगाया गया है। इन सभी को राउंड द क्लाक तैनात किया जा रहा है। तीन-तीन सीओ स्थायी रूप से कैंपस के बाहर तैनात किए गए हैं। खुद एडीएम सिटी व एसपी सिटी लगातार निगरानी कर रहे हैं।
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कवायद-2ः सोशल मीडिया के दुरुपयोग पर सीधे रासुका
एडीएम सिटी एसबी सिंह के अनुसार इस प्रकरण में सोशल मीडिया पर निगरानी कराई जा रही है। कोई भी ऐसा पोस्ट नहीं करेगा और न ही किसी ऐसे वस्तु या सामग्री को फारवर्ड या शेयर करेगा, जिससे सांप्रदायिक उन्माद को बढ़ावा मिलता हो अथवा सांप्रदायिक समरसता को क्षति पहुंचती हो। यदि कोई व्यक्ति ऐसा करता है तो उसके विरुद्ध कार्रवाई की जाएगी। सांप्रदायिक उन्माद भड़काने व सांप्रदायिक सौहार्द बिगाड़ने के कारण राष्ट्रीय सुरक्षा अधिनियम के अंतर्गत कार्रवाई की जाएगी।
हिंदूवादियों के जाने के बाद क्यों बने हालात, होगी मजिस्ट्रेटी जांच
एएमयू बवाल को लेकर जिलाधिकारी चंद्रभूषण सिंह ने जारी आदेश में कहा है कि जिन्ना प्रकरण में 2 मई को कुछ हिंदूवादी पुतला फूंकने आए, जो बाब-ए-सैयद तक पहुंचे और वहां टकराव के हालात बने। मगर उन्हें पुलिस ने वहां से वापस कर दिया। इसके बाद एएमयू छात्र उनकी गिरफ्तारी व उन पर कार्रवाई की मांग को लेकर एकत्रित हुए। इस दौरान छात्र इस कदर बेकाबू हो गए कि वह सिविल लाइंस थाने की ओर कूच कर गए। इस दौरान बेकाबू छात्रों को रोकने के लिए पुलिस को लाठीचार्ज करना पड़ा व आंसू गैस के गोले छोड़ने पड़े। इसमें छात्रों व पुलिसकर्मियों सहित तमाम लोग जख्मी हुए। यह हालात क्यों बने, इसकी मजिस्ट्रेटी जांच की आवश्यकता प्रतीत होती है। इसके लिए जिलाधिकारी ने एडीएम वित्त बच्चू सिंह को जांच अधिकारी नियुक्त कर 15 दिन में जांच रिपोर्ट देने के आदेश दिए हैं।
कोई भी हाथ में न ले कानून: एडीजी
एएमयू में बुधवार को घटित प्रकरण के दूसरे दिन एडीजी आगरा जोन अजय आनंद ने अलीगढ़ आकर हालात का जायजा लिया और जिला पुलिस प्रशासन के अधिकारियों के साथ बैठक कर पूरा घटनाक्रम समझा। इस दौरान उन्होंने शुरुआती दौर में हुई पुलिस की चूक पर जांच कराने को कहा। साथ में निर्देश दिए कि कानून किसी को हाथ में न लेने दिया जाए। वहीं उन्होंने छात्रों से भी अपील की है कि वह अपनी बात कानून के दायरे में रहकर कहें। गुरुवार दोपहर एडीजी यहां पीडब्ल्यूडी गेस्ट हाउस पहुंचे। जहां उन्होंने आईजी डॉ संजीव गुप्ता, जिलाधिकारी चन्द्रभूषण सिंह, वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक अजय कुमार साहनी, पुलिस अधीक्षक नगर अतुल श्रीवास्तव के साथ बुधवार को हुए घटनाक्रम पर बैठक में चर्चा की। अधिकारियों ने उन्हें बताया छात्रों को करीब डेढ़ घंटे तक समझाया गया। इसके बाद भी वह पुलिस से जूझते रहे और शहर की ओर बढ़ गए। अगर उन्हें रोकने के लिए बल प्रयोग न किया गया होता तो शायद हालात बेकाबू हो जाते। बैठक के दौरान एडीजी ने विश्वविद्यालय परिसर के अंदर व बाहर कड़े सुरक्षा इंतजाम रखने, कानून व्यवस्था किसी भी कीमत पर न बिगड़ने देने का निर्देश दिया। इस दौरान अमर उजाला से हुई बातचीत में एडीजी ने बताया कि अब एएमयू में हालात पूरी तरह सामान्य हैं। स्थिति पुलिस प्रशासन के नियंत्रण में है। घटनाक्रम की शुरुआत में पुलिस के स्तर से जो कमी हुई थी, उसकी जांच कराई जाएगी। इसमें जो भी दोषी होगा, उसके खिलाफ कार्रवाई होगी। उन्होंने कहा कि किसी को माहौल नहीं बिगाड़ने दिया जाएगा। इस संबंध में हिदायत दे दी गई है और छात्रों से अपील है कि वह भी कानून हाथ में न लें।
अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर मिल रहा एएमयू छात्रों को समर्थन
अभिषेक शर्मा
एएमयू में बुधवार को जो कुछ हुआ, इसे तलबा (एएमयू के वर्तमान व पूर्व छात्र) बिरादरी एक सोची समझी साजिश करार दे रही है। वे सब कुछ योगी सरकार के इशारे पर होना बता रहे हैं। अब साक्ष्यों के साथ शुक्रवार को हाईकोर्ट और सुप्रीम कोर्ट में गुहार लगाने की तैयारी है। इसके लिए एएमयू छात्रसंघ के पूर्व सचिव व सुप्रीम कोर्ट में अधिवक्ता फर्रुख खान से छात्रनेताओं ने संपर्क भी किया है। इसके अलावा राष्ट्रपति को पत्र लिखकर दखल का अनुरोध भी एएमयू छात्रसंघ के अलावा ओल्ड ब्वायज यूनियन द्वारा किया जाएगा। दुनिया भर में फैले एएमयू के पूर्व छात्र ओल्ड ब्वायज यूनियन के जरिये आंदोलित छात्रों को अपना समर्थन दे रहे हैं।
इस संबंध में एएमयू छात्रसंघ के पूर्व अध्यक्ष फैजुल हसन ने बातचीत में जानकारी दी कि ओल्ड ब्वायज यूनियन के विश्वव्यापी नेटवर्क के जरिए पूर्व एएमयू छात्र एएमयू के संपर्क में हैं। सभी अपना-अपना समर्थन दे रहे हैं। इस प्रकरण को लेकर हर किसी के मन में सरकार व पुलिस प्रशासन के खिलाफ बेहद गुस्सा है। उन्होंने बताया कि चूंकि सब कुछ सरकार के इशारे पर सोची समझी साजिश के तहत हो रहा है तो हमें यहां से न्याय मिलने की उम्मीद कम है। इसलिए जीबीएम में यह तय किया गया है कि इस लड़ाई को कानूनी रूप से लड़ा जाए। इसके लिए हाईकोर्ट या सुप्रीम कोर्ट में एक जनहित याचिका सत्ताधारी जनप्रतिनिधियों व पुलिस प्रशासन के खिलाफ दायर की जाएगी। इसके साथ सीसीटीवी फुटेज व अन्य साक्ष्यपेश किए जाएंगे। उन्होंने बताया कि इसके अलावा राष्ट्रपति से भी पत्र लिखकर दखल का अनुरोध किया जाएगा। विभिन्न महत्वपूर्ण पदों पर काम कर रहे पूर्व छात्र भी अपने स्तर से पत्र लिखने की तैयारी में है।
कानूनी लड़ाई के लिए एएमयू छात्रसंघ के सचिव रहे फर्रुख खान से संपर्क किया गया है। फैजुल हसन ने बताया कि तैयारी पूरी हुई तो शुक्रवार को ही दस्तावेज सुप्रीम कोर्ट व हाईकोर्ट भेजे जाएंगे। वहां अधिवक्ताओं की राय के आधार पर आगे कार्रवाई की जाएगी। ओल्ड ब्वायज यूनियन के पदाधिकारी खुसरो खान का कहना है कि वह एएमयू छात्रों के उत्पीड़न के खिलाफ उनकी हर लड़ाई में उनके साथ हैं।
आरोप: जानबूझकर सिर पर किया गया वार
एएमयू छात्रों को रोकने के लिए पुलिस व आरएएफ द्वारा लाठीचार्ज किया गया। इस दौरान गंभीर रूप से जख्मी हुए छात्रसंघ अध्यक्ष मशकूर अहमद उस्मानी, पूर्व उपाध्यक्ष माजिन जैदी के सिर में गंभीर चोट आई है। प्रत्यक्षदर्शियों की मानें तो उनके सिरों पर सीधे हथियारों की बटों से वार किया गया। इसे लेकर छात्रसंघ बेहद आक्रोशित है। सीधा आरोप है कि जानबूझकर निशाना बनाकर सिर पर वार किया गया। इन तथ्यों को अदालत के सामने रखा जाएगा।