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चार साल से कनेक्शन नहीं, 60 हजार का बिल
अमर उजाला/ ब्यूरो
Updated Sun, 28 Aug 2016 01:25 AM IST
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चार साल से कनेक्शन नहीं, 60 हजार का बिल
- फोटो : रुपेश
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चार साल पहले कनेक्शन कटवाने के बाद भी आ गया 60 हजार का बिल। यह बिजली विभाग की कार्यप्रणाली की एक बानगी भर है। यहां कनेक्शन भले ही कट जाए लेकिन विभाग का मीटर घूमना जारी रहता है। इसका नतीजा उपभोक्ता का उत्पीड़न और एक अधिकारी से दूसरे अधिकारी के चक्कर काटने के रूप में सामने आता है।
हरदुआगंज के गांव सरमस्तीपुर के रहने वाले दर्शन सिंह इसी उत्पीड़न का दंश पिछले चार साल से झेल रहे हैं। सन 2012 में इन्होंने अपना कनेक्शन कटवा दिया और पीडीसी (परमानेंट डिसकनेक्शन) की सभी औपचारिकताएं पूरी कर दीं। इसके बाद होना तो यह चाहिए था कि इनको वह सिक्योरिटी मिल जानी चाहिए थी जो इन्होंने कनेक्शन लेते समय जमा की थी। लेकिन इसके बाद भी विभाग ने इन्हें 60 हजार रुपये का बिल थमा दिया। पिछले चार साल से दर्शन सिंह इस बिना उपभोग किए बिल को सही कराने के लिए विलाल डिग्गी परिसर में इधर से उधर भटक रहे हैं। अक्सर यह होता है कि सुबह की चाय और दोपहर का खाना परिसर में ही खड़े होने वाले कुल्चे वाले के पास होता है। परिसर में चाय वाले, कुल्चे वाले, छोले वाले इनके अच्छी तरह परिचित हो गए हैं लेकिन विभाग के कर्मचारियों और अधिकारियों के साथ संवेदना का धागा अभी नहीं बंधा है।
देते हैं ‘अपनों’ को ‘झटका’, औरों को क्या छोड़ेंगे
अलीगढ़। बिजली विभाग को अपने उपभोक्ताओं के साथ ही अपने विभाग के पूर्व सहकर्मियों के साथ भी कोई सहानुभूति नहीं है। विभाग से रिटायर हो चुके एक कर्मचारी की विधवा लोदी विहार सासनी गेट निवासी 81 वर्षीय रामकली देवी की भी यही वेदना है। एक तो उन्हें पिछले पांच महीने से पेंशन नहीं मिली है। दूसरे उन पर 1.60 लाख रुपये की रिकवरी विभाग ने और निकाल दी है। इससे पूरा परिवार ही डिस्टर्ब हो गया है। अब उनके बेटे गिरीश कुमार विद्यार्थी अपनी मां को पेंशन दिलवाने के लिए पिछले पांच महीने से विभाग के चक्कर काट रहे हैं लेकिन अभी तक कोई सुनवाई नहीं है। गिरीश कुमार विद्यार्थी कहते हैं कि विभाग के कुछ लोगों ने जानबूझकर 1996 और 2006 का वेजेज रिवीजन पेंशन में शामिल नहीं किया है। जिससे आउटस्टैंडिंग निकल रही है। अगर उन लाभों को (जिनकी कि रामकली देवी हकदार हैं) भी शामिल कर लिया जाए तो सब कुछ सही है। उन्होंने आरोप लगाया कि इस जानबूझकर छोड़ी गई गड़बड़ी के पीछे कुछ खास तरह की ‘मंशा’ लगती है।
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गांव के 40 घरों को थमाया बढ़ा हुआ बिल...
अलीगढ़। बिजली विभाग की सबसे ज्यादा ज्यादतियां बिजली के बिल में ही देखने में आती हैं। शनिवार को लाल डिग्गी परिसर में आए गांव आसना अजीतपुर के हारून ने बताया कि तीन महीने पहले उसने 5 हजार रुपये का बिल जमा किया और उसकी रसीद भी ले ली। इसके बाद वह निश्चिंत हो गया कि अब सामान्य रूप से जो बिलिंग आएगी उसका भुगतान वह करता रहेगा। लेकिन कुछ ही दिनों बाद उसे बिजली विभाग का झटका तब लगा जब उसे 6600 रुपये का बिल थमा दिया गया। बाद में जानकारी करने पर पता चला कि उसके साथ ही नहीं गांव के करीब 40 घरों में ऐसा और हुआ है। इसके बाद अब हारुन और गांव के अन्य लोग बिजली विभाग के चक्कर काट रहे हैं।
200 रुपये जमा करने में खर्चा 2 हजार
अलीगढ़। गांव भांकरी अहिवासी के गिर्राज किशोर शर्मा ने आठ महीने पहले नलकूप के लिए आवेदन किया था। 70 की उम्र में आठ महीने तक गांव से शहर के कार्यालय तक करीब 30-40 किलोमीटर की कवायद के बाद उनका नलकूप तो स्वीकृत हो गया लेकिन अब उन्हें प्रोसेसिंग फीस के रूप में 200 रुपये जमा करने हैं। जिसके लिए वह पिछले चार पांच दिनों से प्रयास कर रहे हैं। जिस्म ने जब थकान का साथ पकड़ा तो उन्होंने अपने भतीजे 55 वर्षीय भतीजे दिनेश कुमार को साथ ले लिया। कभी साहब मीटिंग में होते हैं तो कभी संबंधित कर्मचारी पटल पर नहीं होता है। बुजुर्ग की आंखों में रह जाता है सिर्फ इंतजार। सिर्फ इस शुल्क जमा करने की कवायद में ही गिर्राज किशोर शर्मा के दो हजार से अधिक रुपये आने जाने आदि अन्य में खर्च हो चुके हैं।
सासनी गेट में आज रहेगी बिजली ठप
अलीगढ़। सासनी गेट उप केंद्र से निकलने वाले 11 केवी हाथरस अड्डा फीडर पर रविवार को लाइन शिफ्टिंग का काम होना है। इसके चलते पला रोड, बैंक कॉलोनी, मायापुरी, बिहारी नगर, गोपाल पुरी, कृष्णा पुरी, भगवान नगर, सराय मान सिंह, हरिनगर, दुर्गापुरी और बाबूलाल जैन इंटर कॉलेज के आसपास के इलाके में सुबह 10 बजे से लेकर 5 बजे तक बिजली नहीं रहेगी।
लेकिन कैश काउंटर खुले रहेंगे
अलीगढ़। शहरी विद्युत वितरण खंड प्रथम, बारहद्वारी से जुड़े बिलिंग काउंटर सासनी गेट, हाथरस अड्डा, पला रोड, शांति निकेतन, बारहद्वारी, गांधी पार्क में सभी कैश काउंटर रविवार को अवकाश के दौरान भी खुले रहेंगे।
ऐसा नहीं कि गांवों में 70 साल से बिजली नहीं
अलीगढ़। बिजली के वितरण की एक मात्र संस्था दक्षिणांचल विद्युत वितरण निगम से लोगों को कई तरह की शिकायत हो सकती हैं। लेकिन ताजा मामला नगला फतेहा में बिजली की स्थिति को लेकर अन्य गांवों में विद्युतीकरण की स्थिति को लेकर है। कई तरह की बातें कही जा रही हैं और सुनी जा रही हैं। इन सबके बीच अमर उजाला ने जिले के गांवों के विद्युतीकरण के हो रहे कार्य के विषय में कुछ स्तर पर बन रही भ्रम की स्थिति को देखते हुए दक्षिणांचल विद्युत वितरण निगम (वितरण) के मुख्य अभियंता बीएस गंगवार से बातचीत की।
अमर उजाला- गांवों के विद्युतीकरण में भ्रम की स्थिति है। कहा जा रहा है कि आजादी के बाद से वहां बिजली नहीं है। सत्य क्या है?
बीएस गंगवार- यह बात सही नहीं है। दीन दयाल ग्राम विद्युतीकरण योजना के अंतर्गत जिन गांवों में ट्रांसमिशन के ढांचे के खड़ा किया जा रहा है, वहां ऐसा नहीं है कि पिछले 70-80 वर्षों से बिजली है ही नहीं। ऐसे गांवों में पहले से पुराने ढांचे पर बिजली की उपलब्धता है। लेकिन लाइन लॉस रोकने, एरियल बंच कंडक्टर की लाइनें डालने, नए ट्रांसफार्मर लगाने, जर्जर हो चुके खंभों और तारों को बदलने आदि के लिए लार्सन एंड टूब्रो कंपनी काम कर रही है और ढांचा खड़ा कर रही है। यह काम गांवों के साथ शहरों में भी हो रहा है। लेकिन नए इंफ्रस्ट्रक्चर की शुरूआत के समय ऐसा कहना कि यहां पर आजादी के बाद से बिजली नहीं है, यह उचित नहीं है।
अमर उजाला- यह काम कब से हो रहा है?
बीएस गंगवार- ग्रामों के विद्युतीकरण की योजना पिछली सरकारों के समय से चल रही है। पहले इसका नाम राजीव गांधी ग्रामीण विद्युतीकरण योजना था। जिसका नाम अब दीन दयाल उपाध्याय के नाम पर रख दिया गया है। शासन का लक्ष्य है कि गांवों को भरपूर बिजली दी जाए। इसके चलते की उन गांवों का नाम केंद्र की इस योजना के लिए भेजा गया है जहां पर ढांचा दुरुस्त करने की या नया ढांचा खड़ा करने की सबसे ज्यादा जरूरत है।
अमर उजाला- लेकिन देखा जा रहा है कि कार्यदायी संस्था बहुत धीमी गति से काम कर रही है। इसको लेकर जनता में असंतोष है।
बीएस गंगवार- यह बात सही है। ऐसी संस्थाएं स्पष्ट रूप से समझ लें कि मानकों के विपरीत, नियमों के खिलाफ और समय पर अगर काम नहीं होता है तो इसके लिए कड़ी से कड़ी कार्रवाई की जाएगी। हमारा लक्ष्य जनता को बेहतर से बेहतर बिजली आपूर्ति बेहतर ढांचे के साथ उपलब्ध कराना है।
अमर उजाला- उपभोक्ताओं की बिलिंग और अन्य कई प्रकार की शिकायतें रहती हैं। क्या कारण है?
बीएस गंगवार- यह सही है। लेकिन अब प्रीपेड मीटर जैसी व्यवस्थाएं आ रही हैं। इसमें विभागीय संलिप्तता कम होगी और उपभोक्ता स्वयं अपना हिसाब किताब देख सकेगा। इसके अलावा अगर किसी की कोई शिकायत है तो वह सीधे मुझे बता सकता है।
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हरदुआगंज के गांव सरमस्तीपुर के रहने वाले दर्शन सिंह इसी उत्पीड़न का दंश पिछले चार साल से झेल रहे हैं। सन 2012 में इन्होंने अपना कनेक्शन कटवा दिया और पीडीसी (परमानेंट डिसकनेक्शन) की सभी औपचारिकताएं पूरी कर दीं। इसके बाद होना तो यह चाहिए था कि इनको वह सिक्योरिटी मिल जानी चाहिए थी जो इन्होंने कनेक्शन लेते समय जमा की थी। लेकिन इसके बाद भी विभाग ने इन्हें 60 हजार रुपये का बिल थमा दिया। पिछले चार साल से दर्शन सिंह इस बिना उपभोग किए बिल को सही कराने के लिए विलाल डिग्गी परिसर में इधर से उधर भटक रहे हैं। अक्सर यह होता है कि सुबह की चाय और दोपहर का खाना परिसर में ही खड़े होने वाले कुल्चे वाले के पास होता है। परिसर में चाय वाले, कुल्चे वाले, छोले वाले इनके अच्छी तरह परिचित हो गए हैं लेकिन विभाग के कर्मचारियों और अधिकारियों के साथ संवेदना का धागा अभी नहीं बंधा है।
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अलीगढ़। बिजली विभाग को अपने उपभोक्ताओं के साथ ही अपने विभाग के पूर्व सहकर्मियों के साथ भी कोई सहानुभूति नहीं है। विभाग से रिटायर हो चुके एक कर्मचारी की विधवा लोदी विहार सासनी गेट निवासी 81 वर्षीय रामकली देवी की भी यही वेदना है। एक तो उन्हें पिछले पांच महीने से पेंशन नहीं मिली है। दूसरे उन पर 1.60 लाख रुपये की रिकवरी विभाग ने और निकाल दी है। इससे पूरा परिवार ही डिस्टर्ब हो गया है। अब उनके बेटे गिरीश कुमार विद्यार्थी अपनी मां को पेंशन दिलवाने के लिए पिछले पांच महीने से विभाग के चक्कर काट रहे हैं लेकिन अभी तक कोई सुनवाई नहीं है। गिरीश कुमार विद्यार्थी कहते हैं कि विभाग के कुछ लोगों ने जानबूझकर 1996 और 2006 का वेजेज रिवीजन पेंशन में शामिल नहीं किया है। जिससे आउटस्टैंडिंग निकल रही है। अगर उन लाभों को (जिनकी कि रामकली देवी हकदार हैं) भी शामिल कर लिया जाए तो सब कुछ सही है। उन्होंने आरोप लगाया कि इस जानबूझकर छोड़ी गई गड़बड़ी के पीछे कुछ खास तरह की ‘मंशा’ लगती है।
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गांव के 40 घरों को थमाया बढ़ा हुआ बिल...
अलीगढ़। बिजली विभाग की सबसे ज्यादा ज्यादतियां बिजली के बिल में ही देखने में आती हैं। शनिवार को लाल डिग्गी परिसर में आए गांव आसना अजीतपुर के हारून ने बताया कि तीन महीने पहले उसने 5 हजार रुपये का बिल जमा किया और उसकी रसीद भी ले ली। इसके बाद वह निश्चिंत हो गया कि अब सामान्य रूप से जो बिलिंग आएगी उसका भुगतान वह करता रहेगा। लेकिन कुछ ही दिनों बाद उसे बिजली विभाग का झटका तब लगा जब उसे 6600 रुपये का बिल थमा दिया गया। बाद में जानकारी करने पर पता चला कि उसके साथ ही नहीं गांव के करीब 40 घरों में ऐसा और हुआ है। इसके बाद अब हारुन और गांव के अन्य लोग बिजली विभाग के चक्कर काट रहे हैं।
200 रुपये जमा करने में खर्चा 2 हजार
अलीगढ़। गांव भांकरी अहिवासी के गिर्राज किशोर शर्मा ने आठ महीने पहले नलकूप के लिए आवेदन किया था। 70 की उम्र में आठ महीने तक गांव से शहर के कार्यालय तक करीब 30-40 किलोमीटर की कवायद के बाद उनका नलकूप तो स्वीकृत हो गया लेकिन अब उन्हें प्रोसेसिंग फीस के रूप में 200 रुपये जमा करने हैं। जिसके लिए वह पिछले चार पांच दिनों से प्रयास कर रहे हैं। जिस्म ने जब थकान का साथ पकड़ा तो उन्होंने अपने भतीजे 55 वर्षीय भतीजे दिनेश कुमार को साथ ले लिया। कभी साहब मीटिंग में होते हैं तो कभी संबंधित कर्मचारी पटल पर नहीं होता है। बुजुर्ग की आंखों में रह जाता है सिर्फ इंतजार। सिर्फ इस शुल्क जमा करने की कवायद में ही गिर्राज किशोर शर्मा के दो हजार से अधिक रुपये आने जाने आदि अन्य में खर्च हो चुके हैं।
सासनी गेट में आज रहेगी बिजली ठप
अलीगढ़। सासनी गेट उप केंद्र से निकलने वाले 11 केवी हाथरस अड्डा फीडर पर रविवार को लाइन शिफ्टिंग का काम होना है। इसके चलते पला रोड, बैंक कॉलोनी, मायापुरी, बिहारी नगर, गोपाल पुरी, कृष्णा पुरी, भगवान नगर, सराय मान सिंह, हरिनगर, दुर्गापुरी और बाबूलाल जैन इंटर कॉलेज के आसपास के इलाके में सुबह 10 बजे से लेकर 5 बजे तक बिजली नहीं रहेगी।
लेकिन कैश काउंटर खुले रहेंगे
अलीगढ़। शहरी विद्युत वितरण खंड प्रथम, बारहद्वारी से जुड़े बिलिंग काउंटर सासनी गेट, हाथरस अड्डा, पला रोड, शांति निकेतन, बारहद्वारी, गांधी पार्क में सभी कैश काउंटर रविवार को अवकाश के दौरान भी खुले रहेंगे।
ऐसा नहीं कि गांवों में 70 साल से बिजली नहीं
अलीगढ़। बिजली के वितरण की एक मात्र संस्था दक्षिणांचल विद्युत वितरण निगम से लोगों को कई तरह की शिकायत हो सकती हैं। लेकिन ताजा मामला नगला फतेहा में बिजली की स्थिति को लेकर अन्य गांवों में विद्युतीकरण की स्थिति को लेकर है। कई तरह की बातें कही जा रही हैं और सुनी जा रही हैं। इन सबके बीच अमर उजाला ने जिले के गांवों के विद्युतीकरण के हो रहे कार्य के विषय में कुछ स्तर पर बन रही भ्रम की स्थिति को देखते हुए दक्षिणांचल विद्युत वितरण निगम (वितरण) के मुख्य अभियंता बीएस गंगवार से बातचीत की।
अमर उजाला- गांवों के विद्युतीकरण में भ्रम की स्थिति है। कहा जा रहा है कि आजादी के बाद से वहां बिजली नहीं है। सत्य क्या है?
बीएस गंगवार- यह बात सही नहीं है। दीन दयाल ग्राम विद्युतीकरण योजना के अंतर्गत जिन गांवों में ट्रांसमिशन के ढांचे के खड़ा किया जा रहा है, वहां ऐसा नहीं है कि पिछले 70-80 वर्षों से बिजली है ही नहीं। ऐसे गांवों में पहले से पुराने ढांचे पर बिजली की उपलब्धता है। लेकिन लाइन लॉस रोकने, एरियल बंच कंडक्टर की लाइनें डालने, नए ट्रांसफार्मर लगाने, जर्जर हो चुके खंभों और तारों को बदलने आदि के लिए लार्सन एंड टूब्रो कंपनी काम कर रही है और ढांचा खड़ा कर रही है। यह काम गांवों के साथ शहरों में भी हो रहा है। लेकिन नए इंफ्रस्ट्रक्चर की शुरूआत के समय ऐसा कहना कि यहां पर आजादी के बाद से बिजली नहीं है, यह उचित नहीं है।
अमर उजाला- यह काम कब से हो रहा है?
बीएस गंगवार- ग्रामों के विद्युतीकरण की योजना पिछली सरकारों के समय से चल रही है। पहले इसका नाम राजीव गांधी ग्रामीण विद्युतीकरण योजना था। जिसका नाम अब दीन दयाल उपाध्याय के नाम पर रख दिया गया है। शासन का लक्ष्य है कि गांवों को भरपूर बिजली दी जाए। इसके चलते की उन गांवों का नाम केंद्र की इस योजना के लिए भेजा गया है जहां पर ढांचा दुरुस्त करने की या नया ढांचा खड़ा करने की सबसे ज्यादा जरूरत है।
अमर उजाला- लेकिन देखा जा रहा है कि कार्यदायी संस्था बहुत धीमी गति से काम कर रही है। इसको लेकर जनता में असंतोष है।
बीएस गंगवार- यह बात सही है। ऐसी संस्थाएं स्पष्ट रूप से समझ लें कि मानकों के विपरीत, नियमों के खिलाफ और समय पर अगर काम नहीं होता है तो इसके लिए कड़ी से कड़ी कार्रवाई की जाएगी। हमारा लक्ष्य जनता को बेहतर से बेहतर बिजली आपूर्ति बेहतर ढांचे के साथ उपलब्ध कराना है।
अमर उजाला- उपभोक्ताओं की बिलिंग और अन्य कई प्रकार की शिकायतें रहती हैं। क्या कारण है?
बीएस गंगवार- यह सही है। लेकिन अब प्रीपेड मीटर जैसी व्यवस्थाएं आ रही हैं। इसमें विभागीय संलिप्तता कम होगी और उपभोक्ता स्वयं अपना हिसाब किताब देख सकेगा। इसके अलावा अगर किसी की कोई शिकायत है तो वह सीधे मुझे बता सकता है।