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अलीगढ़ः एचआईवी पीड़ित नाइजीरिया बंदी की मौत
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साइबर हैकिंग कर ठगी करने वाले गैंग के नाइजीरिया मूल के बंदी की शुक्रवार को जेएन मेडिकल कॉलेज में मौत हो गई। खास बात यह है कि इस गैंग के कई सदस्य पिछले एक साल से जेल में हैं। यह बंदी एचआईवी सहित अन्य कई बीमारियों से ग्रसित था। इसकी जमानत की प्रक्रिया भी हो चुकी थी।
सिविल लाइंस पुलिस ने नाइजीरिया मूल के दिल्ली में रहने वाले इस बंदी को साइबर हैकिंग, धोखाधड़ी, धौंस जमाने, आईटी एक्ट व विदेशी अधिनियम के तहत 8 दिसंबर 2020 को गिरफ्तार कर जेल भेजा था। वरिष्ठ जेल अधीक्षक विपिन मिश्रा के अनुसार मूल रूप से नाइजीरिया का यह बंदी दिल्ली में रहता था। जेल आने के बाद जांच में उसे एचआईवी सहित अन्य कई रोग उजागर हुए। इसके चलते उसे अब तक दो बार जेएन मेडिकल कॉलेज लंबे समय के लिए भरती कराया था। अब 29 नवंबर को सांस लेने में व छाती में दिक्कत पर फिर उसे भरती कराया गया था। जहां उसकी शुक्रवार देर शाम मौत हो गई। कारागार वरिष्ठ अधीक्षक विपिन मिश्रा के अनुसार उसकी जमानत की प्रक्रिया में परिवार की ओर से सहयोग नहीं मिल रहा था। अन्यथा रिहाई हो जाती। इस संबंध में दूतावास आदि को सूचना भिवजाई जा रही है। मेडिकल बोर्ड से शव का पोस्टमार्टम कराया जाएगा।
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सिविल लाइंस पुलिस ने नाइजीरिया मूल के दिल्ली में रहने वाले इस बंदी को साइबर हैकिंग, धोखाधड़ी, धौंस जमाने, आईटी एक्ट व विदेशी अधिनियम के तहत 8 दिसंबर 2020 को गिरफ्तार कर जेल भेजा था। वरिष्ठ जेल अधीक्षक विपिन मिश्रा के अनुसार मूल रूप से नाइजीरिया का यह बंदी दिल्ली में रहता था। जेल आने के बाद जांच में उसे एचआईवी सहित अन्य कई रोग उजागर हुए। इसके चलते उसे अब तक दो बार जेएन मेडिकल कॉलेज लंबे समय के लिए भरती कराया था। अब 29 नवंबर को सांस लेने में व छाती में दिक्कत पर फिर उसे भरती कराया गया था। जहां उसकी शुक्रवार देर शाम मौत हो गई। कारागार वरिष्ठ अधीक्षक विपिन मिश्रा के अनुसार उसकी जमानत की प्रक्रिया में परिवार की ओर से सहयोग नहीं मिल रहा था। अन्यथा रिहाई हो जाती। इस संबंध में दूतावास आदि को सूचना भिवजाई जा रही है। मेडिकल बोर्ड से शव का पोस्टमार्टम कराया जाएगा।
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