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न ताली न बधाई, जो बची रकम थी वो लॉक डाउन ने खर्च कराई   

Sat, 30 May 2020 12:26 AM IST
राजेश सिंह न्यूूज डेस्क, दीपक शर्मा, अलीगढ़।
न्यूूज डेस्क, दीपक शर्मा, अलीगढ़। Published by: राजेश सिंह Updated Sat, 30 May 2020 12:26 AM IST
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Neither clap nor congratulations, the remaining amount was spent by the lock down
गुरु चवनी माई (पीले कपड़ों में) के साथ बैठे किन्नर परिवार के सदस्य। - फोटो : Rupesh
सामान्य दिनों में घर घर जाकर ताली बजाकर बधाई के गीत गाने वाले किन्नर समुदाय के लोग महामारी के चलते हुए लॉकडाउन में बुरी तरह घिर गए हैं। पिछले तीन महीने से इनकी आजीविका का एकमात्र साधन पूरी तरह ठप है। ऐसे में इनके लिए जीवन यापन करने की समस्या बहुत बढ़ गई है, क्योंकि सहायता उपलब्ध कराने वाली संस्थाएं और सरकारी तंत्र इनको सहायता पाने वालों की सूची में मानता ही नहीं है।
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शहर में एक अनुमान के मुताबिक 250 से अधिक लोग किन्नर समुदाय से ताल्लुक रखते हैं। इनमें मुख्य रूप से शाह जमाल, नई बस्ती, आवास विकास कॉलोनी, जेल रोड और सिविल लाइन के कुछ इलाकों में इनकी बस्तियां मौजूद हैं। 20 किन्नरों के समूह पर एक गुरु होता है।
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यह गुरु ही परिवार का मुखिया होता है। पिता तुल्य होता है। इनका मुख्य कार्य घर घर जाकर बधाइयां गाना और शगुन के रूप में पैसा लेना है। इसी से इनका जीवन यापन होता है। इसके साथ ही जब बाजार खुलता है तो यह शुभ अवसरों पर दुकानदारों से भी बधाई की भेंट स्वीकार करते हैं। लेकिन लॉक डाउन ने सब कुछ बदल दिया है। 
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पंजाबी क्वार्टर नई बस्ती में समूह की गुरु चवनि माई कहती हैं सोचा था एक महीने लॉक डाउन रहेगा। तो जो बचत थी वह भी खर्च हो गई और हमने हमसे भी मजबूर लोगों की मदद भी कर दी, लेकिन आज तीन महीने हुए हैं। हालत बहुत खराब हो गई है। न शादियां हो रही है और जहां बच्चे पैदा हो रहे हैं वहां पर भी लोगों को हमारी मौजूदगी असहज करती है।


इन्हीं गुरु के परिवार की सदस्य महक कहती हैं बड़ा सुना है कि लोग खाना राशन बांट रहे हैं। नेता राशन बांट रहे हैं। हमारी तो कोई सुध लेने ही नहीं आया।  किन्नर शिखा कहती हैं हम लोगों के पास आधार कार्ड है लेकिन राशन कार्ड नहीं है इसके चलते हमें सस्ते दामों पर मिलने वाले अनाज की सुविधा भी नहीं मिल पा रही है। 



हमारी प्रशासन से मांग है कि कम से कम सरकारी योजनाओं का लाभ तो हमें दिलाया जाए। किन्नर आलिया कहती हैं लॉकडाउन खत्म भी हो जाए, लेकिन हमें लग रहा है हमारी मुश्किलें खत्म होने वाली नहीं। क्योंकि शादी समारोहों का स्वरूप बदल गया है और घर घर जाकर बधाई गाने और मांगने के लिए भी लगता नहीं समाज हमारी राह को सहज करेगा। किन्नर पिंक कहती हैं हमारी जिला प्रशासन से मांग है कि जिस प्रकार अन्य लोगों को राशन श्रमिकों को पैसा आदि उपलब्ध कराया जा रहा है। हमें भी यह लाभ दिया जाए।
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